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Photo Icon इन पत्थरों से आती है नगाड़ों की आवाज, रिसर्च में भी नहीं सुलझे ये रहस्य

Updated: IST hill
कुदरत के कई ऐसे रहस्य जिन्हें वैज्ञानिक भी नहीं सुलझा पाए, वर्षों रिसर्च की गई। लेकिन इनसे पर्दा अब तक नहीं उठ सका।

जबलपुर। कुदरत के कई ऐसे रहस्य जिन्हें वैज्ञानिक भी नहीं सुलझा पाए, वर्षों रिसर्च की गई। लेकिन इनसे पर्दा अब तक नहीं उठ सका। एक ऐसे ही स्थान की ओर आपको हम लेकर जा रहे हैं जहां कुदरत ने एक ऐसा करिश्मा कर रखा है जो किसी आश्चर्य से कम नहीं है।

सीतारपटन अंजनिया व बम्हनी मार्ग पर दो ऐसे बड़े पत्थर हैं जिन्हें पीटने पर नगाड़े जैसी आवाज आती है। इसी खूबी की वजह से यह स्थान इतना अधिक फेमस है कि लोग दूर-दूर से इसे देखने यहां पहुंचते हैं। यही नहीं आधारताल के समीप स्थित पहाड़ को भी इसी खूबी की वजह से टनटनिया पहाड़ के नाम से जाना जाता है।

भारतीय संस्कृति निधि (इंटेक) के द्वारा साल 2014 में प्रकाशित हमारी विरासत जिला मंडला में इस क्षेत्र का वर्णन किया गया है। इस स्थान से जुड़ी हुई कई तरह की मान्यताएं भी हैं जिसकी वजह से ये पर्यटन के साथ ही धार्मिक स्थल के रूप में भी जाना जाता है।

लव-कुश का जन्म
मान्यता है कि माता सीता ने लव-कुश को इसी स्थान पर जन्म दिया था। उनके जन्म की खुशी में यहां नगाड़े बजाए गए थे जो अब पत्थर बन गए हैं। महर्षि बाल्मीक का आश्रम भी इसी स्थान पर था जहां माता सीता ने 12 वर्ष बिताए थे।

बालों के निशान
माता सीता के इसी स्थान से ही धरती में प्रवेश का वर्णन प्राप्त होता है। बताते हैं कि यहां उनके बालों के निशान अब भी मौजूद हैं। एक फिसलन पट्टी भी जिसकी वजह से ही इसे रपटा (फिसलन) के नाम से जाना जाता है। यहां पहले घना जंंगल हुआ करता था जो समय के साथ अब रहवासी क्षेत्र में परिवर्तित हो चुका है। यहां मौजूद पत्थरों के बीच एक गुप्त गुफा भी है। इसे काफी रहस्यात्मक बताया जाता है। कुछ ऐसे निशान भी हैं जिनके बारे में अब भी खोज की जा रही है।
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