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Photo Icon इस अनोखे पहाड़ में हैं इको सिस्टम मैकेनिकों के बंगले, इनके लिए जन्नत है ये स्थान

Updated: IST Vultures residences in mountains of Kymore
कटनी जिले के इस पहाड़ में है सफाई सेवकों का आशियाना, यहां से भरते हैं दुनियाभर में उड़ान

जबलपुर/कटनी। बेफिक्री के साथ आसमान में बुलंद उड़ान भरने वाले पक्षियों के राजा पर आज भले ही खतरा मंडरा रहा हो, लेकिन न सिर्फ ये खूबसूरत होते हैं बल्कि इनके आशियाने भी अनोखे हैं। हम बात कर रहे हैं इको सिस्टम को कंट्रोल में रखने वाले सफाई सेवक गिद्धों की। वैसे तो ये पूरे देशभर में पाए जाते हैं, लेकिन इनके आशियाने कटनी जिले के कैमोर पहाड़ में हैं। इसे इनका बंगला कहा जाए तो कोई अतिश्योक्ति नहीं होगी। ये स्थान को बड़ा ही पसंद करते हैं और वन विभाग द्वारा कराई गई गिद्धों की गणना में यहां पर सर्वाधिक मात्रा में पाए गए हैं। कैमोर के इस अनोखो चट्टानों वाले पहाड़ में रह रहे हैं। यहां से सुबह जब उड़ान भरते हैं तो आसमान का बड़ा ही खूबसूरत नजारा होता है।

बड़ा ही आकर्षक है ये पहाड़
कैमोर की पर्वत श्रृंखलाएं बहुत दूर तक फैली हैं। इस ऊंचे पहाड़ा में बसते हैं गिद्ध। ये चट्टानों की खोह में अपना रहवास बनाए हुए हैं। शाम ढलते ही ये उड़ानभर कर अपने आशियाने में पहुंचते हैं और सुबह धूप निकलते ही यहां से भोजन की तलाश में उड़ान भरते हैं। आज देश के कई हिस्सों में गिद्धों के संरक्षण व प्रजनन के लिए प्रयास किए जा रहे हैं ऐसे में गिद्धों का यह पसंदीदा स्थान बड़ा ही कारगर सिद्ध हो सकता है। इस स्थान को वन विभाग ने इको टूरिज्म बनाने का भी प्रस्ताव तैयार किया है।

Vultures residences in mountains of Kymore

गत वर्ष हुई गिद्ध गणना के आंकड़े
-गिद्ध गणना की रेंज संख्या-06
-जिले में मिले गिद्ध-103
-वयस्क गिद्ध की संख्या-93
-बच्चा गिद्धों की संख्या-10
-23 जनवरी को मिले गिद्ध-24
-जिले में गिद्धों की प्रजाति-04

गिद्धों की मौत का कारण-डाइक्लोफिनेक दवा
पर्यावरण को शुद्ध रखने और मानव के मित्र माने जाने वाले गिद्ध पक्षियों खतरे के बादल मंडरा रहे हैं। बताया जा रहा है कि मवेशियों को लगने वाले इंजेक्शन, भोजन का अभाव और जंगलों का घनत्व कम होने से गिद्ध तेजी से घट रहे हैं। इसका असर ईको-सिस्टम पर भी पड़ रहा है। गिद्ध ऊंची उड़ान भरकर मुर्दा पशु को ढूंढ लेते हैं और उनका आहार करते हैं। यह समूह में रहते हैं।

इन क्षेत्रों में रहते हैं गिद्ध
वन विभाग द्वारा स्पॉट पर पहुंचकर घोंसलों में बैठे गिद्धों की गणना दूरवीन व कैमरे के माध्यम से की गई। जिले भर के 6 वन परिक्षेत्र कटनी, रीठी, बहोरीबंद, ढीमरखेड़ा, बड़वारा व विजयराघवगढ़ में गणना हुई थी। गणना में मात्र विगढ़ रेंज स्थित कैमोर की पहाडिय़ों में गिद्ध पाए गए। विजयराघवगढ़ रेंज के ग्राम सलैया, कछगवां, बिस्तरा स्थित कैमोर की पहाड़ी के कक्ष क्रमांक 33 में 47, कक्ष क्रमांक 34 में 36 व कक्ष क्रमांक 70 में 20 गिद्ध मिले थे।

पशुओं की दवा ने घटा दिया कुनबा
गिद्धों की सबसे अधिक मौत 1990 के दशक में बताई जा रही है। वजह पशुओं को दी जाने वाली दवा डाइक्लोफिनेक है, जो कि पशुओं के दर्द को मिटाने में मदद करती है। जब यह दवा खाया हुआ पशु मर जाता है और अगर उसे मरने से थोड़ा पहले यह दवाई दी गई होती है और उसे गिद्ध खाएगा तो गिद्ध के गुर्दे बंद हो जाते हैं और वह मर जाता है। हालांकि पिछले वर्ष कि तुलना में इस वर्ष काफी गिद्ध बढ़े हैं। पिछली बार की गणना में जिले में मात्र 24 गिद्ध मिले थे, जिनकी संख्या बढ़कर 103 हो गई है, जबकि जिले में लगभग 200 से अधिक गिद्ध बताए जा रहे हैं। अधिकारियों ने बताया कि गिद्ध 5.5 से 6.3 किलो तक होता है। इसकी लंबाई 80-103 सेमी तथा पंख खोलने में 1.96 से 2.38 मीटर की चौड़ाई होती है।

पंचकुला में हो रहा संरक्षण कार्य
वन सरंक्षक केके भारद्वाज ने बताया कि जिले 4 प्रजाति के गिद्ध पाए जाते हैं। जिसमें सफेद गिद्ध, चमर गिद्ध, पतली चोंच के गिद्ध व राज गिद्ध शामिल हैं। इसके साथ ही 2 प्रजातियां बाहर से आती हैं। गिद्धों के प्रजनन के लिए पंचकुला हरियाणा में संरक्षित स्थान तैयार किया गया है। इसके साथ ही भोपाल में भी प्रजनन के लिए स्थान सुनिश्चित किया जा रहा है।

Vulture

गिद्धों का संरक्षण आवश्यक
इस प्रजाति पर विलुप्ति का खतरा तेजी से मंडरा रहा है। समय रहते इनके संरक्षण पर ध्यान नही दिया तो त्रेताकालीन के जटायु अर्थात गिद्ध को हम सिर्फ तस्वीरों में ही देख पाएंगे। पर्यावरण को स्वच्छ रखने हानिकारक रसायनों का प्रयोग न हो तभी पक्षियों की प्रजाति को बचाया जा सकेगा। पर्यावरणविदों का मानना है कि बदलती जलवायु, कृषि में कीटनाशकों का बढ़ता प्रयोग और मानव जनित कारण पक्षियों की विलुप्ति का कारण बन गए है।

ये गिद्धों की खासियत
- गिद्ध सबसे ऊंची उड़ान भरने वाला पक्षी होता है।
- शिकार करने के लिए गिद्ध की चोंच टेढ़ी और मजबूत होती है
- गिद्ध पकृति के बनाए हुए बेहतरीन सफाई कर्मी हैं
- गिद्ध पर्यावरण को स्वच्छ व स्वस्थ रखने में मदद करते हैं
- सड़े-गले मांस को जिसमें बहुत सारे गंदे बैक्टीरिया व वाइरस होते हैं, उसे खाते हैं
- गिद्धों में देखने के साथ सूंघने की क्षमता भी बहुत तेज होती है
- गिद्ध के पंख बहुत मजबूत होते हैं
- गिद्ध बीमारियों को फैलने से रोकने का सबसे बेहतीन पक्षी है

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