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हाईसिक्योरिटी नम्बर प्लेट के बिना दौड़ रहे 97 फीसदी वाहन

Updated: IST  rto jabalpur
आठ लाख से अधिक वाहनों में से महज 20 हजार वाहनों में एचएसआरपी लगी हैं

जबलपुर। परिवहन विभाग बेलगाम वाहनों पर अंकुश लगाने से लेकर उनकी चाल सुधारने के लिए नई-नई घोषणाएं कर रहा है। लेकिन, उसकी तमाम कवायदें कागजों में ही दम तोड़ रही हैं। विभाग ने हाई सिक्योरिटी रजिस्ट्रेशन प्लेट (एचएसआरपी) अनिवार्य किया है। लेकिन, हकीकत यह है कि जिले के आठ लाख से अधिक वाहनों में से महज 20 हजार वाहनों में एचएसआरपी लगी हैं। 97 फीसदी वाहन साधारण नम्बर प्लेट के साथ दौड़ रहे हैं। एचएसआरपी बनाने वाली कंपनी दिल्ली की लिंक उत्सव ऑटो सिस्टम प्राइवेट लिमिटेड के साथ वर्ष 2014 में अनुबंध समाप्त होने के बाद से आधुनिक नम्बर प्लेट का निर्माण बंद है।

यह थी मंशा

वाहनों के नम्बर प्लेट की एकरूपता और सुरक्षा उपायों के चलते वाहनों में एचएसआरपी अनिवार्य की गई थी। योजना थी कि चौराहों से गुजरते वक्त यदि कोई वाहन चालक नियमों का उल्लंघन करेगा, तो सीसीटीवी कैमरे एचएसआरपी को पहचान लेंगे। इसके जरिए वाहन स्वामी पर कार्रवाई सम्भव होगी। इस प्लेट में विशेष होलोग्राम था। इसका कॉपीराइट सिर्फ विभाग के पास सुरक्षित होने के कारण चोरी के वाहनों की धरपकड़ आसान होने का दावा किया गया था।

इन कारणों से फेल हुई कंपनी

राज्य सरकार ने पूरे प्रदेश के परिवहन कार्यालयों में पंजीकृत वाहनों को एचएसआरपी लगाने के लिए सिर्फ लिंक उत्सव कंपनी से अनुबंध किया। अनुबंध के मुताबिक कंपनी को आरटीओ में निर्धारित शुल्क जमा करने वाले वाहन स्वामियों को पंजीयन के एक सप्ताह के अंदर एचएसआरपी लगाकर देना था। नए के साथ पुराने वाहनों के लिए भी एचएसआरपी अनिवार्य होने से प्लेट निर्माण का भार बढ़ गया। इससे एचएसआरपी की वेटिंग तीह माह तक पहुंच गई। इसके चलते आरटीओ कार्यालयों में लिंक उत्सव की खिड़की पर प्रतिदिन विवाद होने लगे। परिवहन विभाग की निगरानी में चूक और खराब ग्राहक सेवा के कारण कंपनी का कामकाज बंद हो गया।

इनका कहना है कि

हाई सिक्योरिटी रजिस्ट्रेशन प्लेट की व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए कार्रवाई की जा रही है। एचसीआरपी से सम्बंधित प्रक्रिया की अनुमति के लिए प्रस्ताव फाइनेंशियल एडवायजरी को भेजा गया है। अनुमति मिलने के बाद इसके लिए ओपन टेंडर किए जाएंगे।
वीके सूर्यवंशी, एडिशनल ट्रांसपोर्ट कमिश्नर

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