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Photo Icon WORLD MUSIC DAY : इन हस्तियों को देख युवा चुन रहे संगीत की राह

Updated: IST music therapy
आज विश्व संगीत दिवस : अब हर बीएड कॉलेज में भी दी जाने लगी संगीत की शिक्षा

जबलपुर। संगीत की दुनिया में संस्कारधानी का एक अलग ही रुतबा रहा है। चाहे बात यहां के संगीतकारों की हो या फिर संगीत शिक्षण संस्थाओं की। संगीत के पुरोधाओं ने शहर को संगीत की सौगात दी और उनके शिष्यों ने अब तक इसे संभाल रखा है। संगीत संस्कारधानी के रोम-रोम में बसा है। कई नाम मायानगरी में जाकर गौरव दिला चुके हैं। वहीं संगीत की नई पौध शहर की संगीत संस्थाओं द्वारा तैयार की जा रही है। जिसमें गायन और वादन की हर विधा में कोई न कोई कमाल कर चुका है। पिछले साल से संगीत को बीएड के साथ भी अनिवार्य कर दिया गया है। जिसके चलते अब हर बीएड कॉलेज में भी संगीत की शिक्षा दी जाने लगी है।

नाम जो परम्परा बन गए
संस्कारधानी में 1947 में दादा देशपांडे ने म्यूजिक कॉलेज की स्थापना की थी। तब से लेकर आज तक आनंद जोशी, गायत्री नायक, माया नावलेकर, सुंदरलाल सोनी, अनंत कृष्णन, राधा धनोप्या, केशव राव तामह्नकर, मधुकर राव, वीगो पंचभाई, पीवाय अरुणकर, पद्मा सप्रे, प्रभाकर बागड़देव, सरोज परांजपे, वत्सला वर्वे, आदेश श्रीवास्तव जैसे कई नाम शामिल हैं, जो अपनी विधा में संगीत को ऊंचाइयों पर ले गए।

10 से ज्यादा संस्थाएं
शहर के सबसे पुरानी संगीत शिक्षण संस्था भातखंडे के प्राचार्य विलास मंडपे ने जानकारी देते हुए बताया कि वर्तमान में शहर में 10 से अधिक संस्थाओं द्वारा संगीत की शिक्षा दी जा रही है। जो राजा मानसिंह तोमर संगीत विवि से संबंद्ध हैं। वहीं रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय से संबंद्ध 2 कॉलेज हैं। जहां बीए और एमए संगीत से किया जा रहा है।

पिछले साल की संख्या
मानकुंवर गल्र्स कॉलेज- 22
भातखंडे संगीत कॉलेज- 418
संभागीय बाल भवन- 400
(म्यूजिक में एडमिशन लेने वाले छात्र)

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