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जीवनदीप की राशि में बंदरबाट

Updated: IST In the amount of Jeevandeep controversy
जीवनदीप समिति की राशि मेें स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों की टेंढ़ी नजर है। सरकारी राशि का उपयोग मरीजों के हित में किया जाना है।

जांजगीर-चांपा. जीवनदीप समिति की राशि मेें स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों की टेंढ़ी नजर है। सरकारी राशि का उपयोग मरीजों के हित में किया जाना है।

लेकिन विभागीय कर्मचारी इस राशि का बेजा उपयोग करने आमादा हैं। इस आशय की शिकायत बदस्तूर उच्चाधिकारियों से की जा रही है। लेकिन अधिकारी अपनी हरकतों से बाज नहीं आ रहे हैं।

जीवनदीप समिति की राशि मरीजों के द्वारा लिए गए सहयोग राशि से अस्पतालों में जमा होती है। इस राशि का उपयोग अस्पतालों में मरीजों के हित में ही खर्च करना होता है।

लेकिन अस्पतालों में पदस्थ जिम्मेदार अधिकारी एवं कर्मचारियों द्वारा बंदरबाट की शिकायतें मिल रही है। ऐसा नहीं है कि इस तरह की शिकायतें नई बात है। इस तरह का बंदरबांट पिछले कई अर्से से किया जा रहा है। मरीजों से मिली 5 से 10 रुपए की राशि ही अस्पतालों में लाखों रुपए जमा हो जाती है।

इस राशि का उपयोग मरीजों के स्वास्थ्य के लिए मशीन, दवा खरीदी सहित अन्य कार्यों के लिए किया जाना चाहिएए लेकिन जिला अस्पताल हो या फिर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र वहां पदस्थ डॉक्टरों द्वारा इस राशि का दुरूपयोग किया जाता है।

जबकि इस राशि का उपयोग समिति के लोगों की राय के बाद किया जाता है। समिति के लोगों को अंधेरे में रखकर जिम्मेदार मनमाना खर्च करते हैं। अस्पतालों में ऐसे सामानों की खरीदी की जाती है जिसमें डॉक्टरों को अधिक कमीशन मिलता है। सामान खरीदी की शिकायत भी उच्चाधिकारियों से की जाती है।

सुनने वाला कोई नहीं होता। अलबत्ता कुप्रबंध का खामियाजा सरकारी अस्पताल में भर्ती गरीब वर्ग के मरीजों को भुगतना पड़ता है।

यह हो सकता था लाभ

जीवनदीप की राशि का उपयोग यदि अस्पतालों में इमानदारी पूर्वक किया जाए तो मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध हो सकता है। लेकिन डॉक्टर ही इस राशि का बेजा उपयोग करते हैं।

हकीकत में मरीजों के हितों को देखकर उनके लिए अत्याधुनिक यंत्र, ब्रांडेड दवा सहित अन्य संसाधन खरीदा जाए तो इसका लाभ मरीजों को मिलेगाए लेकिन अस्पताल के डॉक्टर इस दिशा में कारगर प्रयास नहीं करते।

मोर्चा खोला जाएगा

छत्तीसगढ़ स्वास्थ्य कर्मचारी संघ के जिला अध्यक्ष संजय सिंह ने बताया कि स्वास्थ्य विभाग में जहां-जहां गड़बड़ी की शिकायत होगी। वहां कर्मचारी संघ अपनी आवाज मुखर करेगा।

गड़बड़ी और मरीजों के हित में भ्रष्टाचार करने वाले अधिकारियों को बेनकाब किया जाएगा। स्थानीय स्तर के अधिकारियों से ऐसे कर्मचारियों के खिलाफ शिकायत की जाएगी।

शिकायतों का निराकरण यहां नहीं होने पर स्वास्थ्य सचिव को मामले से अवगत कराया जाएगा। इसके बाद भी भ्रष्ट अधिकारी बाज नहीं आएंगे तो उनके खिलाफ मोर्चा खोला जाएगा।

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