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सभी वाहन पहुंच गए बड़े घर, अब हम घर कैसे जाएंगे सर?

Updated: IST All the vehicles reached the big house, how will w
केन्द्रीय विद्यालय जांजगीर में अध्ययनरत विद्यार्थियों की स्थिति उस समय दयनीय हो गई, जब स्कूल छूटने के बाद घर जाने के लिए उनकी स्कूल वैन नहीं पहुंची।

जांजगीर-चांपा. केन्द्रीय विद्यालय जांजगीर में अध्ययनरत विद्यार्थियों की स्थिति उस समय दयनीय हो गई, जब स्कूल छूटने के बाद घर जाने के लिए उनकी स्कूल वैन नहीं पहुंची।

इस दौरान बच्चे चिलचिलाती धूप में खड़े होकर घंटों वेन का इंतजार करते रहे। वहीं जिन पालकों को इस स्थिति का अंदाजा हो गया था, वे अपने वाहन से बच्चों को स्कूल लेने पहुंचे थे।

ऐसा इसलिए हुआ कि यातायात पुलिस केन्द्रीय विद्यालय प्रबंधन को सुप्रीम कोर्ट के नियम के मुताबिक अपने स्कूल वाहनों को अपडेट करने को कहा था।

जब ऐसा नहीं हुआ तो ट्रैफिक पुलिस ने शनिवार शाम से सभी वाहन थाने में खड़ा करवा दिया था। इस बात की जानकारी विद्यालय प्रबंधन को पहले होने के बावजूद उन्होंने बच्चों को लाने ले जाने के लिए कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की।

बच्चे सोमवार को जैसे-तैसे अपने साधन से स्कूल तो पहुंच गए, लेकिन जब दोपहर 1.45 बजे छुट्टी हुई तो विद्यालय प्रबंधन ने सभी विद्यार्थियों को गेट के बाहर चिलचिलाती धूप में छोड़ दिया।

चिलचिलाती धूप में खड़े छोटे-छोटे बच्चे पसीने से तरबतर होकर परेशान होते रहे, वहीं विद्यालय के प्राचार्य और शिक्षक स्टॉफ एसी कक्ष में बैठकर आराम फरमाते रहे। उन्होंने बच्चों की सुध लेना भी मुनासिब नहीं समझा।

कौन है इसके लिए जिम्मेदार?- केन्द्रीय विद्यालय के गेट के बाहर शेड तक की व्यवस्था नहीं है। जबकि इस विद्यालय में सैकड़ों छोटे.छोटे बच्चे पढ़ रहे हैं। पिछले कुछ माह से यहां सिक्योरिटी गार्ड तैनात किया गया है, जो बच्चों को गेट तक छोडऩे के बाद अपनी जिम्मेदारी से इतिश्री कर लेते हैं।

प्राचार्य ने दिया गैर जिम्मेदाराना जवाब- जिला मुख्यालय जांजगीर में संचालित केन्द्रीय विद्यालय में वाहन की व्यवस्था नहीं है, यह तो सभी अभिभावकों को भलिभांति पता है,

लेकिन जिन वाहनों से विद्यार्थी स्कूल पहुंचते हैं, अवकाश के समय उन वाहनों तक बच्चों को पहुंचाने की जिम्मेदारी विद्यालय प्रबंधन की होती है।

विद्यालय की प्रभारी प्राचार्य संगीता लूथर का कहना है कि बच्चों की सुरक्षा की जिम्मेदारी उन पर केवल विद्यालय परिसर तक सीमित है।

विद्यालय के बाहर क्या होता है, वाहन आएं हैं या नहीं, बच्चे घर पहुंचे या नहीं, इसकी जिम्मेदारी प्रबंधन पर नहीं है। प्रभारी प्राचार्य के इस तर्क से लगता है कि केवी प्रबंधन को बच्चों की सुरक्षा की कोई चिंता नहीं है।

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