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नहर निर्माण में घटिया सामग्री का उपयोग

Updated: IST Canal use inferior materials in construction

बम्हनीडीह. विकासखंड के ग्राम पंचायत झर्रा, भंवरेली, मोहगांव, चोरिया के किसानों के लिए बन रहे माइनर नहर निर्माण में लापरवाही बरती जा रही है।

मरम्मत में प्रयोग किए जा रहे निर्माण सामग्री को लेकर किसानों ने आपत्ति जताई है।

नहर निर्माण में लगे ठेकेदार द्वारा घटिया सामग्री का इस्तेमाल करने का आरोप लगाते हुए किसानों ने बताया कि माइनर नहर निर्माण में सीमेंट की मात्रा कम कर रेत व गिट्टी ज्यादा डालकर नहर बनाई जा रही है।

इसके कारण नहर निर्माण के दौरान ही उखडऩे लगी है। साथ ही निर्माण कराने के बाद उस पर पानी डालकर तराई भी नहीं करने की जानकारी दी गई है।

इस नहर से पांच-छह गांवों के किसानों को लाभ मिलना है, लेकिन ठेकेदार द्वारा नहर निर्माण में बरती जा रही लापरवाही से किसानों को फायदा की जगह नुकसान ही नजर आ रहा है।

क्योंकि घटिया सामग्री से बनने वाली नहर पानी के रफ्तार से टूटकर उनकी फसल को तबाह कर सकती है। किसानों ने शासन-प्रसासन से अपनी समस्या बता कर नहर की मांग की थी।

नहर बनने से लाभान्वित होने वाले गांवों के किसानों ने बताया कि उनको सिंचाई सुविधा प्रदान करने के लिए कई बार नेता व अधिकारियों से मिल कर अपनी समस्या बताई थी, तब जा कर आज नहर का निर्माण किया जा रहा है।

इस माइनर नहर योजना कि लागत लगभग दो करोड़ो रुपए है, लेकिन नहर निर्माण में ठेकेदार और विभागीय अधिकारी अपनी मनमर्जी चला रहे हैं, जिसके

चलते करोड़ों रुपए की लागत से बनने वाली माइनर नहर अभी से उखड़ कर टूटने लगी है। किसानों ने बताया कि पानी के अभाव में उनके खेत बंजर हो रहे थे।

इससे किसानों में भी नहर से पर्याप्त पानी की उम्मीद जगी थी, लेकिन ठेकेदार द्वारा नहर निर्माण में बरती जा रही लापरवाही से नहर से पानी मिलने की उम्मीद अब टूटने लगी है।

उन्होंने बताया कि ठेकेदार नहर निर्माण में घटिया सामग्री का इस्तेमाल करा रहा है। इससे उन्हें नही लगता कि माइनर नहर पानी की बहाव क्षमता को रोक पाएगी। किसानों का कहना है

विभागीय अनदेखी और ठेकेदार की मनमर्जी से यह निर्माण चल रहा है। इस नहर से उन पांच-छह गावों के किसानों को लाभ मिलना है, जिनके पास कृषि के लिए जमीन तो काफी है,

लेकिन पानी के अभाव में फसल लेना ही भूल गए हैं। चोरिया, झर्रा, भंवरेली, मोहगांव के किसानों को सिंचाई के लिए पानी की उपलब्धता के अभाव में यहां की सैकड़ों एकड़ भूमि उजाड़ पड़ी है।

नहर के निर्माण से अब इन गांवों के किसानों के दिन अच्छे आने वाले थे। विभागीय अधिकारियों के मुताबिक निर्माण में गुणवत्ता का विशेष ध्यान रखा जा रहा है।

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