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विधायक आदर्श ग्राम का सिर्फ तमगा मिला, विकास कार्यों के लिए बजट नहीं

Updated: IST The medal was the only legislator model village, n
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सांसदों को उनके क्षेत्र के दो-दो गांवों को गोद लेकर आदर्श ग्राम बनाने का जिम्मा क्या सौंप दिया, ठीक उनकी देखा-देखी प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने भी की

जांजगीर-चांपा. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सांसदों को उनके क्षेत्र के दो-दो गांवों को गोद लेकर आदर्श ग्राम बनाने का जिम्मा क्या सौंप दिया,

ठीक उनकी देखा-देखी प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने भी की। मुख्यमंत्री डॉ. सिंह ने जिले समेत प्रदेश के विधायकों को उनके निर्वाचन क्षेत्र के एक-एक गांव को गोद लेकर उसकी सूरत बदलने का जिम्मा सौंपा तो जरूर है,

लेकिन विधायक अपने गोद लिए गांव को किस फंड से आदर्श ग्राम का स्वरूप प्रदान करेंगे, यह दो साल बाद भी तय नहीं हो सका है।

संभवत: इसी वजह से विधायक आदर्श ग्राम तमगा पाने के बाद भी जिले के छह गांव सुविधा संपन्न नहीं बन पाए है।

पत्रिका की टीम ने विधायक आदर्श ग्रामों में पहुंचकर जब वहां के ग्रामीणों से चर्चा की तो कई चौकानें वाली बातें सामने आई। जिन 6 गांवों को जिले के विधायकों ने गोद लेकर आदर्श बनाने का संकल्प लिया है,

वहां के ग्रामीणों को शासन की योजनाओं का ही भली-भांति लाभ नहीं मिल पा रहा है। विधायक आदर्श गांव में जहां स्वच्छ भारत मिशन का बुरा हाल है। वहीं अब तक शराबबंदी नहीं हो पाई है।

आदर्श ग्राम की घोषणा के बाद ग्रामीण जहां विकास को लेकर उत्साहित नजर आ रहे थे, वे ही अब गांव में अपेक्षित विकास नहीं होने से विधायक को जी-भरकर कोसते नजर आ रहे है। कई विधायक भी अलग से बजट नहीं होने की बात कहकर राज्य सरकार पर ही आरोप मढ़ रहे हैं।

दो साल बाद भी नहीं बदली हेडसपुर की तस्वीर

अकलतरा विधायक चुन्नीलाल साहू ने ग्राम हेडसपुर को आदर्श ग्राम बनाने चुना हैं, लेकिन गांव की तस्वीर आज भी वही है जो दो साल पहले थी।

वाईफाई और कम्प्यूटर टेक्नोलॉजी की बात तो छोडि़ए, यहां एक अदद प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र तक नहीं है। ग्रामीणों को यदि सर्दी-बुखार भी हो जाए तो उपचार के लिए तीन किलोमीटर दूर पंतोरा जाना पड़ता है।

सड़क भी इतनी जर्जर है कि उससे होकर गुजरना लोगों के लिए आसान नहीं है। हद की बात तो यह है कि यहां के लोगों ने प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना का सिर्फ नाम ही सुना है,

किन्तु किसी को अब तक इसका लाभ नहीं मिला है। इस गांव की अबादी 11 सौ है, जिसमें से चंद लोग ही शिक्षित है। यहां मूलभूत सुविधाओं का अभाव है।

आदर्श ग्राम का खाका जानने के बाद ग्रामीण खुशी से गदगद हो रहे थे, लेकिन कार्ययोजना के अनुरूप काम नहीं होने से अब उनके चेहरों पर मायूसी छायी हुई है। विधायक भी बजट की समस्या बता रहे हैं।

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