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दसवीं बोर्ड परीक्षा :  तीसरे रैंक में आया अमन कलवानी, आईएएस बनने की चाह

Updated: IST Tenth board examination: Aman Kalvani, third in ra
अमन कुमार पिता राजकुमार ने कक्षा दसवीं की बोर्ड परीक्षा में तीसरे रैंक में परीक्षा उत्तीर्ण कर जिले का नाम रोशन किया है

जांजगीर-चांपा। अमन कुमार पिता राजकुमार ने कक्षा दसवीं की बोर्ड परीक्षा में तीसरे रैंक में परीक्षा उत्तीर्ण कर जिले का नाम रोशन किया है। अमन का कहना है कि वह पढ़ लिखकर आईएएस अफसर बनना चाहता है। वह डभरा क्षेत्र के छोटे से गांव कटेकोनी गांव में रहकर अच्छी शिक्षा ग्रहण किया और 584 अंक अर्जित कर 97.33 प्रतिशत अंक हासिल किया है। उसका मानना है कि पढ़ाई के लिए संसाधनों का रोड़ा सामने नहीं आता। उसका कहना है कि सामान्य परिवार में रहकर 97 टॉप 5 में मुकाम बनाना कठिन था। सुबह जब वह रिजल्ट देखा तो विश्वास नहीं हो रहा था। उसने बताया कि वह हर दिन सात से आठ घंटे पढ़ाई करता था। बाद में जब उसके मोबाइल में फोन करने वालों का तांता लग गया तब विश्वास हुआ और रिजल्ट देखकर संतुष्टि हुई। घर परिवार में मिठाई खिलवाने वालों का तांता लगा हुआ है।

 third in rank

पांचवें रैंक में विवेक ने बनाया स्थान- मेडिकल हब की नगरी चांपा में डॉक्टरों की भीड़ में रहकर उसके मन में डॉक्टर बनने का जुनून सवार हो गया था। इसी लगन से पढ़ाई की शुरूआत की और टॉप 5 में मुकान बनाया। विवेक ने 582 नंबर अर्जित कर 97 प्रतिशत अंक लाना है। विवेक कुमार पिता भूपेंद्र कुमार कक्षा बारहवीं की पढ़ाई पूरी कर एमबीबीएस डॉक्टर बनना चाहता है। माता-पिता शिक्षक हैं जो शिक्षा के क्षेत्र में आगे लाने के लिए चौबीसों घंटा मदद करने आमादा रहते हैं। बोर्ड परीक्षा रिजल्ट निकलते ही पूरे शहर के लोगों का हुजूम उनके घरों में उमड़ पड़ा। उसका मानना है कि पूरी लगन और मेहनत से पढ़ाई करो तो निश्चित ही अच्छे मुकाम पर पहुंचा जा सकता है। विवेक ने बताया कि वह लगातार आठ घंटे पढ़ाई करता था। यही वजह है कि वह 97 प्रतिशत अंकों से उत्तीर्ण हुआ है।

नौंवें रैंक में सुमीत नायक ने बनाया स्थान

सुमीत नायक ने नौंवें रैंक में 578 अंक, 96.33 प्रतिशत अर्जित कर साफ्टवेयर इंजीनियर बनना चाहता है। उसे शहर के लोगों ने जिले का नायम का दर्जा दिया है। सरस्वती शिशु मंदिर में पढ़ाई कर बेहतर मुकाम बनाया है। रिजल्ट निकलते ही सरस्वती शिशु मंदिर में पूरे शहरवासियों का हुजूम उमड़ पड़ा। उसने बताया कि वह भविष्य में साफ्टवेयर इंजीनियर बनना चाहता है। इसके लिए वह अभी से पढ़ाई के लिए जुट गया है। वह लगातार 8 घंटे पढ़ाई करता था। उसके माता पिता पढ़ाई के लिए हमेशा दबाव बनाते थे। जिसके परिणति वह बेहतर रिजल्ट लाया है। उसके माता पिता ने बताया कि वह बहुत ही आज्ञाकारी बेटा है। पढ़ाई के अलावा अन्य गतिविधियों में भी उसका पूरा ध्यान जाता था। शिशु मंदिर वरिवार भी उसकी पढ़ाई के लगन को देखकर हैरत में रहते थे और उन्हें पूरा विश्वास था कि वह टॉप टेन में मुकाम बनाएगा।

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