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बंपर आवक से जमीन पर आए टमाटर के दाम

Updated: IST tomato
इन दिनो पत्थलगांव मंडी मे बाहर से आए व्यापारियो द्वारा टमाटर प्रतिभार 100 से 150 रुपए की दर पर खरीदा जा रहा है,

पत्थलगांव. पत्थलगांव की मंडी मे इन दिनो टमाटर की आवक भरपूर मात्रा मे है जिसके चलते इन दिनो टमाटर तीस चालीस रुपए प्रति किलो से उतर कर पांच रुपए किलो की दर पर बेचा जा रहा है। वही अधिक टमाटर आने की वजह से व्यापारियो द्वारा भी किसानो से जमकर तोल-मोल की जा रही है। इन दिनो पत्थलगांव मंडी मे बाहर से आए व्यापारियो द्वारा टमाटर प्रतिभार 100 से 150 रुपए की दर पर खरीदा जा रहा है, इस टमाटर को इन व्यापारियो द्वारा झारखंड, बंगाल और ओडिशा मे ले जाकर 40 से 50 रुपए किलो तक की दर पर आसानी से बेचा जा रहा है।

इस वर्ष औसत से अधिक मानसून की वजह से टमाटर की फसल मे किसानो को पहले ही भारी नुकसान हुआ था जिसके चलते टमाटर की कीमतो मे भारी उछाल आ गया था, पर अब दूसरी फसल के टमाटर आने से इनकी कीमतो मे कमी देखी जा रही है विगत कुछ दिनो पहले यहां की मंडी मे टमाटर तीस से चालीस रुपए की दर पर बेचा जा रहा था वही बाहर से आए व्यापारियो द्वारा किसानो से प्रतिभार टमाटर हजार से ग्यारह सौ रुपए की दर पर खरीद रहे थे, लेकिन टमाटर की अधिक आवक होने के कारण इन दिनो किसानो को उनके टमाटर की सही कीमत नही मिल पा रही है।

इन सब बातो मे कृषको के सामने टमाटर की फसल एक बडी समस्या बन कर आ गई है जो किसान कर्ज लेकर टमाटर की खेती किए थे उन्हे अपने टमाटर मे सही रेट ना मिलने से वे अपने कर्ज को उतारने मे भी लाचार दिखाई पड रहे हैं। ऐसे में यह माना जा रहा है कि दर में गिरावट से किसानों का मेहनताना भी नहीं निकल रहा है।

टमाटर आधारित उद्योग की मांग

क्षेत्र के कृषको ने राजनैतिक दल से जुडे नेताओ पर आरोप लगाते हुए उन्हे अपना उल्लू सीधा करने के दौरान बडी-बडी बातें करने का आरोप लगाया है। इनका कहना था कि चुनाव के दौरान क्षेत्र के कृषको को उनकी समस्याओ से निजात दिलाने की नेताओ द्वारा बात तो कही जाती है, लेकिन वोट लेकर वे अपने किए वादे भुला दे रहे हैं। कृषको का कहना था कि यदि यहां टमाटर सॉस का प्लांट लगा दिया जाता तो कृषको को बाहरी व्यापारियों के हाथो अपनी फसल कौडियों के दाम बेचनी नही पडती।

ग्रेडिंग मशीन से मिलता उचित लाभ

क्षेत्र मे अत्यधिक मात्रा मे होने वाली टमाटर की फसल को देखते हुए शासन द्वारा लुडेग मे टमाटर ग्रेडिंग का प्लांट लगाया था। लेकिन संबंधित विभागीय की लापरवाही के कारण टमाटर ग्रेडिंग प्लांट का शुभारंभ नही किया जा सका है। शासन की पहल से इस ग्रेडिंग प्लांट को एक निजी कंपनी को दे दिया गया था पर वह भी इसे चालू नही कर सकी। जिसकी वजह से किसानो को ग्रेडिंग मशीन का लाभ कभी भी नही मिल सका यदि समय रहते इस प्लांट का किसानो को लाभ मिल जाता तो आज कृषकों के सामने अपनी फसल को लेकर इस प्रकार की विडंबना उत्पन्न नही होती।

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