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जशपुर जिले में मक्के की हो रही बंपर खेती, किया जा रहा है निर्यात, किसान खुश

Updated: IST agriculture
दर्जनों किसानों ने 10 एकड़ से अधिक क्षेत्र में मक्के की खेती कर बड़े पैमाने पर मक्के का उत्पादन किया है।

जशपुरनगर/रनपुर. जशपुर जिले में धान, टमाटर, मिर्च, रामतिल और टाऊ की खेती बड़े पैमाने में की जाती है। इन फसलों से हजारों किसान लाभांवित हो रहे हैं। हालांकि मौसम की मार और अधिक पैदावार से कई बार किसानों को नुकसान भी झेलना पड़ता है। वहीं अब किसानों की रूचि मक्का की फसल ओर बढ़ी है। जिले के बगीचा विकासखंड के दर्जनों गावों में मक्के की इस वर्ष बंपर खेती की गई है। दर्जनों किसानों से 10 एकड़ से अधिक क्षेत्र में मक्के की खेती कर बड़े पैमाने पर मक्के का उत्पादन किया है। बगीचा विकासखंड के ग्राम पंचायत रनपुर, भितघरा और बेलसोंग डेम के किनारे बड़े पैमाने में मक्के की खेती जा रही है। एक-एक किसानों ने लगभग 7 से 15 एकड़ तक के क्षेत्रफल में मक्के की खेती कर बेहतर उत्पादन किया है। धान की फसल के साथ किसान अब दूसरे फसलों की ओर भी रूचि ले रहे हैं। बगीचा विकासखंड में बहने वाली डोड़की नदी के किनारे किसान महेश राम भगत ने लगभग 10 एकड़ से अधिक के क्षेत्रफल में मक्के का फसल लिया है।

इसके साथ ही घुघरी निवासीकिसान लखन राम ने बेलसोंग डेम के किनारे मक्के का फसल लगाया था। अब फसल के पकने के बाद किसान उसका निर्यात कर रहे हैं। किसानों ने बताया कि उनके क्षेत्र में मक्का का उचित मूल्य न मिल पाने की वजह से उन्हें इसे सस्ते दरों में ही बाहर निर्यात करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा, अगर जिले में ही मक्के की उचित दरों में खरीदी की व्यवस्था किए जाने से किसानों को अच्छी कमाई मिल सकती है। स्थानीय स्तर पर मक्के की खेती पर शासकीय मदद नहीं मिल पा रही है। बावजूद इसके किसान मक्के की खेती कर मुनाफा कमा रहे हैं।

रांची हो रहा निर्यात

बंपर खेती से मिलने वाला अनाज को जिला के पड़ोसी राज्य झारखंड की राजधानी रांची निर्यात किया जा रहा है। किसान इंद्रनाथ ने बताया कि उसने दुर्गापारा में 7 एकड़ में मक्के की फसल ली है। जशपुर में उचित कीमत नहीं मिलने की वजह से मक्का को रांची भेजा जा रहा है।

प्रोटीन का है स्त्रोत

मक्का में प्रोटीन प्रचुर मात्रा में पाया जाता है। इसका उपयोग वर्तमान में जिले में कम किया जाता है। किसान इसका निर्यात रांची और अंबिकापुर कर रहे हैं, जहां व्यपारी इसका उपयोग मुर्गी, गाय, बैल और अन्य पालतु जानवरों के पोषक आहार के लिए करते हैं।

डोड़की नदी के किनारे मक्का

मक्का की खेती करने वाला किसान महेश राम ने बताया कि उसने इस वर्ष डोड़की नदी के किनारे 10 एकड़ के क्षेत्रफल में मक्का बोया था। और फसल भी बहुत अच्छी हुई। बड़े पैमाने में मक्का एकत्र कर अंबिकापुर और रांची निर्यात किया जा रहा है। उसने कहा कि डोड़की नदी के किनारे मौसम अनुकूल होने का लाभ मक्का की खेती को मिल रहा है। साल-दर-साल मक्का की खेती करने वाले कृषकों की संख्या भी बढ़ रही है। इस वर्ष बीते वर्षों की तुलना में अधिक मात्रा में मक्का की खेती की गई है।

स्थानीय खरीदी की मांग

दुर्गापारा में 10 एकड़ में मक्के की खेती करने वाले इंद्रनाथ राम ने कहा कि स्थानीय स्तर पर खरीदी होने से और बेहतर मुनाफा किसानों को हो सकता है। उन्होंने कहा, अनुकूल मौसम की वजह से बेहतर उत्पादन होने से प्रति एकड़ एक लाख रुपए तक का मुनाफा हो जाता है, इसलिए किसानों की रूचि मक्का उत्पादन में बढ़ रही है। उन्होंने कहा, शासकीय खरीदी होने से काम और बेहतर हो सकता है।

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