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सरकारी क्रय केन्द्रों के बजाय मिलों को गेहूं देने में किसान खुश

Updated: IST Wheat purchase center
निजी आटा मिलों में मिल रहा सरकारी केंद्रों की तुलना में अधिक पैसा

जौनपुर. गेहूं के दामों में भारी अंतर होने के कारण किसान गेहूं सरकारी केंद्रों के बजाए निजी आटा मिलों को बेचने में रुचि दिखा रहे हैं। किसानों का कहना है कि जब उन्हें निजी मिलों में दाम अधिक मिल रहा है, साथ ही कोई अन्य व्यय नहीं झेलना पड़ रहा तो वह सरकारी खरीद केंद्रों पर गेहूं क्यों बेचे।

भाजपा ने सत्ता में आते ही गेहूं के दाम में गत वर्ष के मुकाबले तकरीबन 100 रुपयों की वृद्धि की है। सरकार की मंशा थी कि किसान इस बार सरकार को अधिक गेहूं बेचें, लेकिन सरकार के दामों को देखते हुए प्राइवेट आटा मिलों ने भी गेहूं के दाम को और बढ़ा दिया। गेहूं के दामों में तकरीबन 100 रुपये का फर्क होने के चलते किसान अपना गेहूं प्राइवेट मिल को बेचने में ज्यादा खुश हैं।

गौरतलब है कि शासन से गेहूं का समर्थन मूल्य 1625 रुपये जबकि प्राइवेट मिलों में किसानों का गेहूं 1750 रुपये प्रति कुंतल तक भुगतान किया जा रहा है। किसानों का कहना है कि सरकारी केंद्रों पर उन्हें गेहूं के दाम कम मिलते हैं साथ ही अन्य कई प्रकार के व्यय भी किसानों को ही झेलने पड़ते हैं। इससे किसानों को लागत के मुताबिक दाम नहीं मिल पाते हैं। किसानों का कहना है कि महीनों मेहनत करने के बाद भी सरकार की ओर से बेहतर दाम नहीं मिलते हैं, तो प्राइवेट गेहूं बेचना किसानों की मजबूरी बन जाता है। अगर सरकार पहले ही गेहूं के दाम को किसान की मेहनत के मुताबिक तय कर दें तो कोई भी किसान प्राइवेट मिल को गेहूं नहीं बेचेगा।

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