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वकीलों ने की लॉ कमीशन की रिपोर्ट वापस लेने की मांग

Updated: IST jhabua
अभिभाषक संघ ने बिल की प्रति का दहन कर ज्ञापन सौंपा

झाबुआ. जिला अभिभाषक संघ ने भारतीय विधिा परिषद के आह्वान पर शुक्रवार को लॉ कमीशन की सिफारिशों के विरोध में दोपहर बाद न्यायालयीन कार्यों से विरत रहकर प्रतिवाद दिवस मनाया। इस दौरान अभिभाषकों ने बिल की प्रतियों का दहन करते हुए राष्ट्रपति के नाम कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा।

ज्ञापन में बताया कि देश के समस्त अधिवक्ताओं की स्वतंत्रता छीनने, अधिवक्ताओं के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई के लिए सरकार के स्वतंत्र आयोग बनाने का निर्णय व उसकी प्रक्रिया के विरुद्ध भारतीय विधि परिषद ने लॉ कमीशन के पास अपना विरोध दर्ज कराया था। इसमें निवेदन किया था कि अधिवक्ताओं के अनुशासन के आदेश अधिवक्ता अधिनियम 1961 की धारा 35 के तहत पारित किए जाते हैं तो उसकी अपील अंतिम तौर पर उच्चतम न्यायालय निराकृत करती है। इसलिए इसमें हस्क्षेप की जरूरत नहीं है। न्यायपालिका एवं विधायिका दोनों को अभिभाषकों की स्वतंत्रता में हस्तक्षेप करने की विधिक एवं नैतिक आवश्यकता नहीं है, लेकिन उक्त सुझाव को लॉ कमीशन ने न मानते हुए अधिवक्ताओं की स्वतंत्रता छीनने के लिए न्यायपालिका और विधायिका से जुड़े व्यक्तियों का आयोग बनाने का सुझाव भी दिया है।

कुछ समय पूर्व लॉ कमीशन ने अपनी 266 बी रिपोर्ट द एडवोकेट एक्ट 1961 (रेग्युलेशन ऑफ लीगल प्रोफेशन) द्वारा एक्ट ने कई संशोधन प्रस्तावित कर एडवोकेट संशोधित बिल 2017 का ड्राफ्ट प्रस्तुत किया है। लॉ कमीशन ने अपनी रिपोर्ट में सर्वोच्च न्यायालय के न्याय निर्णय महीपालसिंह राणा विरुद्ध उप्र राज्य (जुलाई 2016) का संदर्भ देते हुए यह टिप्पणी की कि एडवोकेट एक्ट के कुछ प्रावधानों पर पुन: विचार की अत्यंत आवश्यकता है। इसी प्रकार अधिवक्ताओं के व्यवसाय में आ जाने एवं लॉ कॉलेजेस तथा अधिवक्ताओं के पी्र-इनरोलमेंट के संबंध में भी काफी संशोधित प्रस्ताव किए हैं।

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