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'राइड फॉर जेंडर फ्रीडम' के तहत देशव्यापी यात्रा पर निकले राकेश, पहुंचे झांसी  

Updated: IST rakesh
विश्वविद्यालय में विद्यार्थियों से संवाद के बाद पत्रकारों से बातचीत में राकेश ने बताया कि 15 मार्च 2014 को चेन्नई से उन्होंने यह साइकिल यात्रा शुरू की थी।

झांसी। साइकिल से देशव्यापी यात्रा पर निकले राकेश आज झांसी पहुंचे। लेखक, पत्रकार और सामाजिक कार्यकर्ता राकेश कुमार सिंह अब तक 15000 किलो मीटर से अधिक साइकिल चला चुके हैं। 'राइड फॉर जेंडर फ्रीडम' के तहत साइकिल से यात्रा कर रहे राकेश स्त्री-पुरुष समानता का अपने अनूठे अंदाज में सन्देश दे रहे हैं। आज बुंदेलखंड विश्वविद्यालय पहुंचे राकेश ने पत्रकारिता और फाइन आर्ट विभाग के विद्यार्थियों से जेंडर इक्वलिटी पर चर्चा की।

29 महीने से चला रहे हैं साइकिल

विश्वविद्यालय में विद्यार्थियों से संवाद के बाद पत्रकारों से बातचीत में राकेश ने बताया कि 15 मार्च 2014 को चेन्नई से उन्होंने यह साइकिल यात्रा शुरू की थी। अब तक वे चार लाख लोगों से मुलाकात कर चुके हैं। वे जगह-जगह पर लोगों से संवाद कर लैंगिक समानता से जुड़े मसलों पर तथ्यों और तर्कों के आधार पर लोगों को इस मुद्दे पर वैचारिक बहस के लिए प्रेरित कर रहे हैं। वे केरल, कर्नाटक, उड़ीसा, बिहार, नेपाल, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, तमिलनाडू होते हुए आज झांसी पहुंचे हैं।

बिहार में होगा यात्रा का समापन

राकेश ने बताया कि इस यात्रा का समापन 15 फरवरी 2018 को बिहार के छपरा के तरियानी में होगा। समापन पर ग्लोबल यूथ कान्क्लेव का आयोजन होगा। पंद्रह दिवसीय इस कान्क्लेव में देश-दुनिया में लैंगिक समानता पर काम कर रहे एक्टिविस्ट और युवा हिस्सा लेंगे। 'बम संकर टन गनेस' नाम की किताब का लेखन कर चुके राकेश यात्रा के अपने अनुभवों पर एक किताब भी लिख रहे हैं।

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