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अरे ये क्या! शिक्षित लोग ही फंस रहे ठगों के मायाजाल में, 1 साल में करोड़ों की ठगी

Updated: IST swindle with educated persons
जिले में ठगी के अपराध का ग्राफ काफी बढ़ चुका है। जिले में साक्षरता की दर भले ही बढ़ी हो, लेकिन जागरुकता के मामले में लोग अब भी पीछे हैं

कवर्धा. जिले में ठगी के अपराध का ग्राफ काफी बढ़ चुका है। जिले में साक्षरता की दर भले ही बढ़ी हो, लेकिन जागरुकता के मामले में लोग अब भी पीछे हैं। इसके चलते ही लोग ठगी, धोखाधड़ी के शिकार हो रहे हैं। धोखाधड़ी करने वालों ने जिले के लोगों को विभिन्न मामलों में करोड़ों रुपए की चपत लगा चुके हैं।

वर्ष 2015 में क्राइम ब्रांच अफसर बताकर दो आरोपी ने एक लाख 70 हजार रुपए की ठगी कर दी। व्यापारी को झांसा दिया कि वह क्राइम ब्रांच का अधिकारी है और उसके पास जो भी रकम है, वह उसे दे। ठग ने अपनी बातों में ऐसा उलझाया कि व्यापारी को रकम देना पड़ा। व्यापारी ने ठग को एक लाख 70 हजार रुपए की रकम दी।

एक युवक ने खुद को सांसद प्रतिनिधि बताकर नौकरी लगाने के नाम पर तीन लाख की ठगी कर दी। जब नौकरी नहीं मिली तब प्रार्थी ने ठग के खिलाफ पुलिस में शिकायत की है और न्यायालय में परिवाद भी दायक किया गया। इस तरह दो और नौकरी लगाने का मामला सामने आया। वहीं सोना-चांदी चमकाने के नाम पर धोखाधड़ी करने का मामला सामने आते रहता है। चांदी के महीम कणों को झाड़कर वजन कम किया और धोखाधड़ी करते हैं। कुल मिलाकर जिले के लोग सबसे ज्यादा नौकरी व पैसों के डबल के खेल में फंस रहे हैं। पुलिस लगातार लोगों को इस दिशा में जागरूक करते रहती है, लेकिन इसके बाद भी लोग ठगी के शिकार हो जाते हैं।

नौकरी व पैसा बड़ी कमजोरी
जिले में ठगी व धोखाधड़ी के अब तक जितने मामले सामने आए हैं, उनमें नौकरी लगने के नाम पर ठगी सबसे प्रमुख हैं। नौकरी लगने के लिए लोग लाखों रुपए दूसरों को देते हैं और फिर ठगी का शिकार हो जाते हैं। वहीं ज्यादा ब्याज दर व रकम दोगुना के लालच में भी जल्दी आते हैं। इसके साथ ही सरकारी राशि का गबन, फर्जी अंकसूची व दस्तावेज और सोना-चांदी ज्यादा देने के नाम पर भी जिले के लोग ठगी का शिकार हो चुके हैं। बावजूद लोग इससे सबक नहीं लेते। हर माह करीब दो लोग ठगों के झांसे में आ जाते हैं।

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