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Video Icon एडवोकेट अमेण्डमेंट बिल के विरोध वकीलों ने की हड़ताल, केंद्र सरकार को लगाई फटकार

Updated: IST Advocate Strike
एडवोकेट अमेण्डमेंट बिल 2017 के विरोध में शुक्रवार को कानपुर के वकील हड़ताल पर चले गए। इससे दूर-दराज से आए फरियादियों को मायूस हेकर अपने घर वापस लौटना पड़ा।

कानपुर. एडवोकेट अमेण्डमेंट बिल 2017 के विरोध में शुक्रवार को कानपुर के वकील हड़ताल पर चले गए। इससे दूर-दराज से आए फरियादियों को मायूस हेकर अपने घर वापस लौटना पड़ा। बार एसोसियशन अध्यक्ष तरुणेन्द्र बाजपेई न इस दौरान कहा कि रिटायर्ड जस्टिस बीएस चौहान द्वारा एक जांच और सिफारिश की गयी है, जिसमें वकीलों की आल इंडिया लेवल पर अनुशाशन समिति होनी चाहिए। अनुशाशन समिति में किसी भी अधिवक्ता को मेंबर नहीं बनाया गया है। जिससे हमारी स्वायत्ता पर असर पड़ेगा। बार एसोसिशन अध्यक्ष का कहना है कि अधिवक्ता समाज ही हर बुराई से लड़ने की ताकत रखता है। इनके भष्टाचार का खुलासा ना हो, इनकी अकूत संपत्ति की जांच ना हो, इसीलिए अधिवक्ताओं को कमजोर करने का काम किया जा रहा है। यदि हमें मिनिमाइज करने की कोशिश केंद्र सरकार ने की तो उनका हमत अस्तित्व समाप्त ही कर देंगे।

क्या है एडवोकेट अमेण्डमेंट बिल
बार एसोसिएशन के अध्यक्ष ने बताया कि केंद्र सरकार इस बिल के जरिए हमारी स्वतंत्रता पर प्रहार करने जा रही है। जिसे वकील नहीं मानेंगे। अगर केंद्र सरकार ने ऐसा कोई भी कदम उठाया तो उसे गंभीर परिणाम भुगतने के लिए तैयार रहना होगा। बताया गया कि लॉ कमीशन द्वारा पेश की गई अपनी 266वीं रिपोर्ट में एडवोकेट अमेण्डमेंट बिल 2017 का ड्राफट तैयार किया गया है। इसके माध्यम से एडवोकेट एक्ट 1961 के प्रावधानों में महत्वपूर्ण फेरबदल कर वकीलों की स्वतंत्रता पर प्रहार किया गया है। बताया, लॉ कमीशन की इस सिफारिश से देश भर के वकील समुदाय में आक्रोश व्याप्त है।

अनुसाशन समिति पर होना चाहिए वकील-
बार एसोसिएशन के अध्यक्ष के मुताबिक जस्टिस बीएस चौहान ने वकीलों के मामले की जांच के लिए एक टीम बनाने का सुझाव दिया है। इस टीम में उन्होंने वकीलों को दूर रखा है। केंद्र सरकार इसके जरिए वकीलों के काम पर व्यवधान डालना चाहिए। अगर सरकार को लगता है कि वकील गलत काम कर रहे हैं तो समिति में एक वकील को रखना चाहिए, जिससे की वह किसी वकील की शिकायत पर उसका पक्ष रख सके। लेकिन सरकार वकीलों को इस बिल के जरिए डराना चाहती है, पर हम डरने वाले नहीं हैं। वकीलों को राजनीति में नहीं घसीटना चाहिए।

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