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UP Election 2017

इस बहुबली ने फिर दी धमकी, नहीं दिया टिकट तो निर्दलीय लडूंगा चुनाव

Updated: IST ATIQ
बहुबली ने चुनाव आयोग के दफ्तर पर लगाई टकटकी

कानपुर. समाजवादी साइकिल किसकी होगी उसकी सुनवाई चुनाव आयोग के दफ्तर दिल्ली में हो रही है। कैंट से सपा के कैंडीडेट अतीक अहमद भी साकिल किस खेमे को मिलेगी उस पर टकटकी लगाए हुए हैं। अतीक अहमद से फोन पर बातचीत की गई तो उन्होंने बताया कि साइकिल का सिंबल फ्रीज नहीं होना चाहिए। अगर ऐसा होता है तो पार्टी को काफी नुकसान उठाना पड़ सकता है। अतीक के मुताबिक अगर सपा का चुनाव चिन्ह फ्रीज होता है तो भी कैंट से निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनावी मैदान पर उतरूंगा। इलाहाबाद की पहरेदारी की थी अब कानपुर के लागों की रखवाली करने की ठान ली है।

गंगा की नगरी में रहूंगा, चुनाव लड़ूंगा

अतीक अहमद ने कहा कि सपा का चुनाव चिन्ह अगर फ्रीज होता है तो भी गंगा की नगर से ही चुनाव लडूंगा। सीएम की लिस्ट पर नाम न होने पर अतीक अहमद ने दो टूक कहा कि, सीएम टिकट देंगे तो भी कैंट से चुनाव जीतेंगे, नहीं देते बावजूद हम यहां से जनप्रतिनिधि बनकर सेवा करेंगे। अतीक के मुताबिक इस सीट पर भाजपा का कई सालों से कब्जा रहा है। इस बार हम यहां से भाजपा को हाराएंगे, साथ ही अन्य सीटों पर भी संप्रदायिक ताकतों को हराने के लिए सेकुलर दलों के लिए प्रचार भी करेंगे।
कांग्रेस से गठबंधन होने पर होगा फाएदा

अतीक अहमद ने कहा कि अगर सीएम अखिलेश यादव कांग्रेस के साथ गठबंधन करना चाहते हैं तो हम उनके साथ हैं। कांग्रेस से अगर सीएम का गठबंधन हुआ तो सूबे में अखिलेश यादव भारी बहुमत से दूसरी बार सरकार बनाएंगे। वहीं समाजवादी पार्टी में चल रहे घमासान में फंसे नेता और कार्यकर्ताओं के भी दिल्ली दरबार पर नजर बनाए हुए हैं। चुनाव आयोग मुलायम और अखिलेश गुट के बीच पार्टी सिंबल आवंटित होने या फ्रीज करने को लेकर फैसला करेगा। अगर पार्टी दो धड़ों में बंटी तो बीच का रास्ता अख्तियार करने वाले नेता अपने पत्ते खोल देंगे। इसमें खासकर वह नेता होंगे, जो किसी सीट से चुनाव लड़ना चाहते हैं।
पलड़ा देखकर ही खोलेंगे पत्ते

आर्य नगर, छावनी और गोविंद नगर विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ने की इच्छा रखने वाले नेता आज अपने पत्ते खोल सकते हैं। जिसका पलड़ा अखिलेश गुट में भारी हुआ, वह वफादार बनने की कोशिश करेगा। जिसे मायूसी होगी, वह मुलायम शिवपाल गुट में अपनी आस्था जताएगा। पार्टी के वरिष्ठ नेताओं का कहना है कि इसमें उन लोगों का नुकसान भी हो सकता है, जिन्होंने अपनी आस्था किसी एक गुट में जता दी है और वहां पर चुनाव लड़ने वाले उस गुट के समर्थक दावेदार ज्यादा हैं। आर्य नगर विधानसभा सीट पर समीकरण बन बिगड़ सकता है। यहां पर शिवपाल यादव ने रीता जितेंद्र बहादुर सिंह का टिकट काट दिया है। अखिलेश गुट की लिस्ट में भी इसे खाली ही दिखाया गया है।

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