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प्रभु के पीके को इंदौर-पटना एक्सप्रेस हादसे के मिले सुराग, रिपोर्ट बनकर तैयार

Updated: IST Pukhrayan Rail Accident
कमिश्नर ने जांच में सबसे बड़ी चूक एक अतिरिक्त बोगी लगाए जाने के साथ उसमें यात्रियों की संख्या ज्यादा सामने आई है। पीके सेंट्रल स्टेशन पर खड़ी छतिग्रस्त कोचों की जांच की।

विनोद निगम
कानपुर. इंदौर-पटना एक्सप्रेस हादसे की जांच के लिए रेलमंत्री सुरेश प्रभु ने कमिश्नर सेफ्टी रेलवे पीके अचार्या को सौंपी थी। हादसे के बाद पीके तीन दौर की जांच कर दिल्ली लौट गए थे, लेकिन ट्रेन दुर्घटना के कारण की तह तक वह नहीं पहुंच सके थे। चौथी बार हो रही इस जांच में इस बार उनके साथ भारी भरकम इंजीनियरों की टीम भी साथ में है। टीम के सदस्य बुधवार और गुरुवार को न केवल घटनास्थल पहुंचकर जायजा लिया बल्कि घटना से जुड़े कई लोगों से बयान भी लिए।

अचार्या गुरुवार को सेंट्रल स्टेशन पहुंचे और रेलवे के 41 कर्मचारियों व अधिकारियों से बयान लिए। सूत्र बताते हैं कि कमिश्नर ने जांच में सबसे बड़ी चूक एक अतिरिक्त बोगी लगाए जाने के साथ उसमें यात्रियों की संख्या ज्यादा सामने आई है। पीके सेंट्रल स्टेशन पर खड़ी छतिग्रस्त कोचों की जांच की। बुधवार को कुछ अधिकारियों ने चटके ट्रैक को देखने का आग्रह किया था, जिस पर उन्होंने ध्यान नहीं दिया। वह छतिग्रसित वातानुकुलित बी-3 की दूसरी पर गुरुवार को जांच की। कोच में हॉट एक्सल की संभावना को देख सभी पहियों के एक्सल को अपने सामने खुलवाये, उसमें आग लगने के कोई लक्षण नहीं मिले, ग्रीस हरा था, जिससे पता चल यह रहा था कि एक्सल की हाल में ही ग्रीसिंग की गई है। इसके बाद उन्होंने कोच की बॉडी मैटेरियल की जांच के निर्देश दिए। अचार्या ने सभी छतिग्रस्त बोगिंयों को देखा। रेल फैक्चर की जगह कोचों की तरफ अधिक ध्यान देने पर इंजीनियरिंग विभाग के अफसरों को फिलहाल राहत मिली, वहीं अन्य शाखाओं के अधिकारियों के पसीने छूट रहे हैं।

20 नवंबर को हुआ था ट्रेन हादसा

बीस नवंबर की वो काली सुबह जिसने न जाने कितने लोगो के घरों की रौशनी छीन ली बल्कि कई बच्चों के सर से उनके मां बाप का हाथ हमेशा हमेशा के लिए उठा दिया। हम बात कर रहे उसी खौफनाक दुर्घटना की जो कानपुर देहात के भोगनीपुर की दलेल नगर क्रासिंग के पास हुयी थी, जिसमे इंदौर से आ रही इंदौर पटना एक्सप्रेस की चौदह बोगियां चकना चूर हो गयी थीं और दुर्घटना के बाद तीन दिनों तक चले रेस्क्यू ऑपरेशन में मरने वालों की संख्या 150 हो गयी थी। साथ ही दो सौ से अधिक यात्री घायल हो गए थे। भयावय हुए इस हादसे की हकीकत जानने को हर कोई बेताब सा दिख रहा है।

रेलमंत्रालय ने अचार्या को सौंपी थी जांच

इस हादसे का पता करने के लिए रेल मंत्रालय ने कमिश्नर सेफ्टी रेलवे अचार्या को लगाया गया है। जिन्होंने हादसे के दो दिन बाद ट्रेन चालक और परिचालक से पूछताछ करते हुए जांच शुरू की थी। जांच के चरण का दौर लगातार तीन दिन तक चला था, लेकिन एक बार फिर चौथी बार जांच की शुरुवात की गयी है, जिसको लेकर विभाग में हड़कंप मचा हुआ है। वहीं सेन्ट्रल स्टेशन के डिप्टी सीटीएम के बंद कमरे में 41 लोगों से गहन पूछताछ की। साथ ही कई अन्य बिन्दुओं पर भी ध्यानाँकित किया जा रहा है। सीआरएस की जांच के बीच यह भी अंदाजा लगाया जा रहा है कि आरडीएसओ कार्यालय में चल रही दुर्घटना ग्रसित ट्रेन के सैम्पलों की जाँच जल्द ही आ जाएगी, इसके बाद हादसे के राज पर से पर्दा उठ जायेगा और यह साफ़ हो जायेगा कि हादसा मानवीय कारणों से हुआ है कि किसी अन्य खामियों से ट्रेन दुर्घटनाग्रसित हुयी है।
41कर्मी व अधिकारियों से पूछताछ

कानपुर देहात के पुखरायां में इंदौर-राजेंद्र नगर (पटना) एक्सप्रेस दुर्घटना मामले की जांच गुरुवार को एकबार फिर से शुरू हो गई। रेल संरक्षा आयुक्त पीके आचार्या सेंट्रल स्टेशन के डिप्टी सीटीएम कक्ष में बने कैंप आफिस में गुरुवार की सुबह 40 से ज्यादा रेल कर्मचारियों से पूछताछ की। रेलवे ने जिन कर्मियों की पूछताछ होनी है, उनकी सूची पहले से ही बनाने के साथ ही उन्हें पहले ही जांच की सूचना दे दी थी। सूत्र बताते हैं कि सीआरएस द्वारा दुर्घटनास्थल से सील किए कर आरडीएसओ भेजे गए टूटे ट्रैक और पेंड्राल क्लिप के बाबत प्रारंभिक रिपोर्ट भी आ सकती है, जिस पर मंथन हो सकता है।

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