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इस डकैत के बेटे को शिवपाल ने कराई थी साइकिल की सवारी, मायावती को गिराया था औंधें मुंह!

Updated: IST Dakku
उत्तर प्रदेश में तीसरे चरण का मतदान 19 फरवरी को है, लेकिन यह पहली बार है कि बैलट पर बुलट भारी नहीं पड़ी।

कानपुर। उत्तर प्रदेश में तीसरे चरण का मतदान 19 फरवरी को है, लेकिन यह पहली बार है कि बैलट पर बुलट भारी नहीं पड़ी। पाठा और चंबल के जंगल से फतवे नहीं जारी किए गए, क्योंकि फतवे जारी करने वाले धाकड़ डकैत अब नहीं रहे। पाठा के जंगल में तीन दशक तक राज करने वाला खुंखार डकैत ददुआ के इनकाउंटर में मारे जाने से पहले ही उसने अपने परिवार के सियासत की जमीन जंगल में बैठकर तैयार कर दी थी। ददुआ ने बेटे वीर सिंह को शिवपाल सिंह यादव की साइकिल पर सवार कर विधायक बनवाया था। इतना ही नहीं उसने अपने छोटे भाई को भी राजनीति में इंट्री करवाई और वह लोकसभा चुनाव जीतकर सांसद बना।

पाठा के जंगल में 1980 से लेकर 2007 तक डकैत ददुआ का एकतरफा राज था। वह जंगल से फतवा जारी करता और उसी का चुना हुआ नेता जनप्रतिनिधि बनता था। डकैत ददुआ का रसूख बुंदेलखंड से लेकर फतेहपुर कौशांबी और एमपी तक चलता था। इन जिलों की अधिकतर सीटों पर उसी के कैंडीडेट्स जीतकर विधानसभा में पहुंचते थे। ददुआ का जंगल में राजनीतिक सफर 1984 के बाद शुरु हुआ। पहले वह कांग्रेस और जनता पार्टी से अंदरखाने जुड़ा रहा, लेकिन 90 के दशक में वह हाथी पर सवार हो गया। ददुआ के फरमान के चलते ही बसपा की पकड़ बुंदेलखंड व फतेहपुर में जबरदस्त रही। हाथी यहां से कई सीटों पर जीतता रहा। ददुआ कभी आरके पटेल, दद्दू प्रसाद सहित अनेत नेताओं के लिए लोगों से बंदूक के बल पर वोट दिलवाता रहा।

बेटे और भाई को लेकर बसपा से ठनी

ददुआ चित्रकूट जिले से अपने बेटे को चुनाव लड़वाना चाहता था। बकायदा उसने बसपा नेताओं से मायावती तक अपनी बात भी पहुंचाई थी, लेकिन जब मायावती ने उसके बेटे व भाई को बसपा में इंट्री और टिकट देने के लिए इंकार कर दिया तो डकैत उखड़ गया। उसने अपने भाई को सपा में शामिल करवाकर सीधे मायावती को चैलेंज कर दिया। सपा के टिकट पर भाई एमपी चुना गया और बेटे को भी शिवपाल यादव ने साइकिल पर बैठा लिया। इसके बाद 2002 के चुनाव में सपा को जिताने के लिए ददुआ ने फरमान सुनाया और अधिकतर बसपा नेता इन जिलों से हार गए और उसी वक्त से उसके खात्में की कहानी शुरु हो गई।

2012 में वीर सिंह पटेल चुने गए विधायक

कुख्यात डकैत ददुआ के बेटे वीर सिंह पटेल पांच साल तक चित्रकूट जिले से सदर विधायक रहे हैं। 2012 विधानसभा चुनाव में शिवपाल यादव ने उन्हें टिकट दिया था। वीर सिंह ने बसपा कैंडीडेट्स को भारी मतों से हराकर सदर सीट जीती थी। वीर इससे पहले 2006 में सपा से ही जिला पंचाय अध्यक्ष का चुनाव जीते थे। वीर सिंह इस बार फिर सपा की टिकट पर चुनाव लड़ रहे हैं। जानकारों की माने तो चित्रकूट जिलें में आज भी कुछ लोग ददुआ के नाम पर मत देते हैं। ददुआ का अपने समाज के अलावा आदिवासियों के बीच अच्छी थी और इसी के चलते उसके बेटे को फाएदा हो रहा है।

चेला कर रहा हैं अंदरखाने मदद

पांच लाख का इनामी डकैत बबुली कोल ददुआ के बेटे को जिताने के लिए उसकी अंदरखाने मदद कर रहा है। आदिवासी समाज से आने वाले डकैत कोल ने अपने गुर्गों को वीर सिंह को जिताने के लिए लगा रखा है। बबुली कोल कभी ददुआ गैंग के लिए काम करता था। ददुई के मारे जाने के बाद उसने बलखड़िया पटेल के गैंग में शामिल हो गया। पुलिस इनकाउंटर में बलखड़िया के मारे जाने के बाद उसने खुद गैंग खड़ा कर लिया। बबुली के साथ ददुआ गैंग के खास लोग शामिल है। वहीं डकैत गौरी भी अपने गुरु के बेटे को चुनाव जिताने के लिए एक्शन पर आ गया है।

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