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नोटबंदी का दर्द: बेटे ने उधार के पैसों से किया पिता का अंतिम संस्कार

Updated: IST kanpur note ban
पीएम मोदी के 500 और 1000 के नोटबंदी से श्माशान और कब्रिस्तान में भी इसका असर दिख रहा है।

कानपुर. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पांच सौ और एक हजार के नोटबंदी से जहां आम इंसान परेशान हो रहा है, वहीं श्माशान और कब्रिस्तान में भी इसका असर दिख रहा है। घाटों में पंडा तो कब्रिस्तानों में मौलवी शव दफनाने से पहले नए नोट की डिमांड कर रहे हैं। शुक्रवार की सुबह भैरवघाट स्थित श्मशान घाट में पनकापुर निवासी अभय कुशवाहा अपने पिता का शव लेकर पहुंचे थे। अभय के पास पिता के दाह संस्कार के लिए पुराने नोट थे। लेकिन पंडा ने नए नोट की डिमांड की तो उसने पड़ोसी से चार हजार रूपए उधार लेकर पिता के शव का दाह संस्कार किया।

कफन के लिए भी नहीं थे नोट
अजय ने बताया कि बीमारी के चलते पिता की गुरूवार को मौत हो गई थी। मेरे पास नए नोट नहीं थे। सुबह जब मैं पिता के शव के लिए कफन लेने के लिए दुकानदार के पास गया तो उसने नए नोट मांगे। मेरे पास एक हजार का पुराना नोट था। दुकानदार ने नोट लेने से इंकार कर दिया। दुकानदार से गिड़गिड़ाने के बाद उसने मेरे पिता के शव का दो गज का कफन उधार में दिया।

अर्थी का पांच हजार आया खर्चा
अजय ने बताया कि पिता के शव का दाह संस्कार के दौरान पूरे पांच हजार रूपए लगे हैं। चार हजार उधारी ली है तो एक हजार पत्नी रखे हुए थी। अजय के मुताबिक मोदी सरकार को बड़े नोट बंद करने से पहले बैंक की बिगड़ी व्यवस्था को दुरूस्त करना चाहिए था। काकादेव की स्टेट बैंक की शाखा में मैं पिता की मौत के बाद गुरूवार को दोपहर से लाइन पर खड़ा रहा, लेकिन नंबर आते ही बैंक में पैसा खत्म हो गया। पैसा न होने के चलते मैं अपने पिता का कल दाह संस्कार नहीं कर सका। आज उधार पैसे लेकर पिता की चिता को मुखाग्नि दी।

बिठूर में चेक लेकर किया जाता है दाह संस्कार
बिठूर स्थित आधा दर्जन शवदाह गृह हैं। सती घाट के पंडा कल्लू ने बताया कि उन्होंने अपने यहां पहले से ही चेक सिस्टम कर दिया है। अंतिम संस्कार के बाद जितना भी पैसा बनता हो उसका चेक देकर चुकता किया जा सकता है। अगर शव लाने वाले लोगों के परिजनों के पास चेक व नकदी नहीं होने पर हम उन्हें उधार पर सारी व्यवस्था कराते हैं और जब पैसे हो जाते हैं तो लोग आकर वापस कर देते हैं। इसके अलावा गुरूवार तक यहां पर पुराने नोट भी लिए जा रहे थे, लेकिन आज से अब यह नोट लेना हमलोगों ने बंद कर दिया है।

कब्रिस्तानों में भी उधारी पर दफनाए जा रहे शव
कानपुर के कबिस्तानों पर आने वाले शवों को पैसे न होने की दशा में उधार पर दफनाया जा रहा है। बड़ी इदगाह के अंजुमन इस्लाहुल ने बताया कि कब्रिस्तान में दफनाने से पहले परिजन को एक रसीद कटानी पड़ाती है, जिसे दफन रसीद कहते हैं। इसके लिए भी लोग पुराने नोट लेकर आ रहे हैं। अगर लोग पैसे का इंतजाम कर ले रहे हैं तो बेहतर है। अगर नए नोट का इंतजाम नहीं हो पा रहा है तो उन्हें उधार में ही रसीद दी जा रही है। साथ ही शव को दफनाने के लिए कब्र खेदनी पड़ती है, जिसका खर्च डेढ़ से दो हजार रूपए आता है। नोटबंदी के चलते यह पैसा भी उधार करके जाने को विवश हो रहे हैं।

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