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मातृत्व सप्ताह से हटकर इस अस्पताल मे हो रहा है मौत का खेल

Updated: IST doctors
प्रदेश सरकार ने जननी सुरक्षा योजना के तहत सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में तमाम सुविधायें मुहैया करा रखी हैं, जिससे प्रसूता महिलाओं को किसी भी समस्या का सामना न करना पड़े।

कानपुर देहात। प्रदेश सरकार ने जननी सुरक्षा योजना के तहत सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में तमाम सुविधायें मुहैया करा रखी हैं, जिससे प्रसूता महिलाओं को किसी भी समस्या का सामना न करना पड़े। गर्भवती होने से लेकर प्रसव होने तक स्वास्थ्य केंद्र द्वारा समुचित व्यवस्था करना साथ ही प्रसव होने के बाद शिशु के जन्म लेने के बाद बच्चे की देखभाल के लिये उचित सलाह देना व आशा द्वारा शुरुआत से लेकर अंत तक प्रसूता कि देखभाल करना है। जिसके लिये सरकार ने अभी हाल में क्षेत्र में कार्य कर रही आशा बहुओं को मोबाइल कुंजी की सुविधा प्रदान की। जिसके माध्यम से आशा गांव में प्रसूता की जानकारी कर उसका पूरा ख्याल रखे। घर से लेकर अस्पताल तक पहुंचाने की उसको जिम्मेदारी सौंपी गयी है। इसके लिये मातृत्व सप्ताह भी चलाया जा रहा है। जिससे जननी की देखभाल सहित उसे उचित परामर्श देते हुये मृत्यु दर को कम करना, इस योजना का उद्देश्य है। लेकिन झींझक स्थित वीरांगना अवंतीबाई सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र मे मातृत्व सप्ताह का कोई महत्व नहीं दिख रहा है। इससे हटकर अस्पताल कर्मी अपने पुराने ढर्रे में मशगूल हैं। इस सप्ताह अस्पताल कर्मियों की लापरवाही के चलते दो प्रसूताओं की मौत हो चुकी है और करीब तीन माह में आधा दर्जन प्रसूता काल के गाम में समा चुकी है।

नहीं होता शासन व अधिकारियों के आदेश का पालन
बीते वर्षाें प्रदेश सरकार के प्रमुख सचिव रामबहादुर सिंह झींझक सीएचसी का दौरा करते हुये महिला वार्ड व प्रसव कक्ष का निरीक्षण करते हुये गंदगी देख फटकार लगाई। जिसके बाद पूंछ्तांछ मे लापरवाही उजागर हुयी थी, जिसमें नवजात शिशु को प्रथम बार स्वच्छ कॉटन में रखना, बच्चे का वजन करना, प्रसूता का विशेष ख्याल रखना आदि हितायतें दी गयी थी। लेकिन उन आदेशों की धज्जियां उड़ाते हुये यहां मनमाने तरीके से गर्भवती महिला का प्रसव करा दिया जाता है और प्रसूता या बच्चे की मौत होने पर खून की कमी होने की बात कहकर पल्ला झाड़ लिया जाता है। इस परम्परा से इस स्वास्थ्य केंद्र में अनवरत कार्य जारी है।

स्वास्थ्य केंद्र बना मौत का केंद्र
18 अक्टूबर को संस्थागत प्रसव के लिये झींझक क्षेत्र औरंगाबाद डालचंद्र गांव की राजकुमारी को झींझक सीएचसी मे भर्ती कराया गया था। शाम करीब 4 बजे प्रसूता ने एक मृत शिशु को जन्म दिया। जिसके बाद प्रसूता की हालत बिगड गयी। मौजूद डाक्टर अजय गौतम ने खून की कमी बताते हुये उसे रेफर कर दिया। जिला अस्पताल ले जाते समय उसकी रास्ते मे मौत हो गयी। वहीं 14 अक्टूबर को झींझक बस्ती निवासी अन्नपूर्णा पत्नी अमित संखवार ने अस्पताल में जुड़वा बच्ची को जन्म दिया। जिस पर डाक्टर ने बच्ची की हालत चिंताजनक बताते हुये प्रसूता को घर भेज दिया लेकिन कुछ समय बाद घर पहुंची महिला की हालत बिगड़ गयी। अस्पताल पहुंचने पर डाक्टर ने रेफर कर दिया जहां रास्ते में उसकी भी मौत हो गयी।

सीएचसी प्रभारी सिद्धार्थ पाठक का कहना है कि आज रात प्रसूता की मौत के मामले मे प्रसूता का रक्तश्राव अधिक हो गया था। फिलहाल आशा व मृतक परिजनों के घर जाकर जांच की जायेगी। लापरवाही पाये जाने पर कार्रवाई की जायेगी। वहीं बीती घटना में परिजनों की लापरवाही भी सामने आयी है।

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