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Video Icon जब नहीं रहा पुलिस का सहारा तो पुत्री की सलामती के लिये मंदिर में मांग रहे मन्नत

Updated: IST Kanpur
जब नहीं रहा पुलिस का सहारा तो पुत्री की सलामती के लिये मंदिर में मांग रहे मन्नत

कानपुर देहात. घर में लाडली की आवाजें आना बंद होने के बाद अब सिर्फ सन्नाटे का राज्य हो गया है। बेटी का लड़कपन और उसकी ठिठोली याद करके परिजनों के आंसू नहीं रुक रहे है। सिर्फ एक आस लगाए बस गांव के मंदिर में भगवान से उसकी सलामती की दुआ मांग रहे है। जहां एक ओर सूबे की योगी सरकार महिला अपराध के मामलों में सख्ती और तत्काल कार्यवाही करने के दावे कर रही हैं। वहीं दूसरी ओर इसकी जमीनी हकीकत कुछ और ही हैं। न तो पुलिस पीड़ित परिवार का मामला दर्ज कर रही हैं और न ही महिला अपराध मामलों में गम्भीरता दिखा रही हैं।

ऐसा ही एक मामला जनपद कानपुर देहात के बरौर में देखने को मिला। जहां एक नाबालिग को गांव के लोगों के इशारे पर एक युवक बहला फुसलाकर ले गया। लेकिन पुलिस पीड़ित परिवार की सुनने की बजाए उन्हे थाने से टरकाती रही। जिसके बाद पीड़ित परिवार पुलिस के आलाधिकारियों से मिला। आलाधिकारियों के निर्देश के बाद मामला तो दर्ज कर लिया गया, लेकिन कार्यवाही के नाम पर केवल आश्वासन ही पीड़ित परिवार को दिया गया। जिसका परिणाम यह है कि आज परिजनों के लिये बेटी लाडली एक ख्वाब बनकर रह गयी है।

जिसके चलते पीड़ित परिवार को केवल अब भगवान का सहारा ही रह गया है। वे प्रतिदिन गांव के मन्दिर में जाकर पूजा अर्चना कर भगवान से नाबालिक की सलामती और जल्द घर वापसी की मन्नत मांग रहे हैं।

खेत से घर आई और हो गयी गायब

बताया गया कि बरौर थाना क्षेत्र के कस्बा बरौर की एक नाबालिक को 7 अप्रैल 2017 की शाम को गांव के रघुवीर और उसकी पत्नी रेशमा के इसारे पर रूरा थाना क्षेत्र के इन्दरूक गांव का प्रभू दयाल ले गया। जिसके बाद नाबालिक के परिजनों ने स्थानीय थाना पुलिस बरौर को इसकी सूचना दी। लेकिन पुलिस ने कार्यवाही करने की बजाए उन्हे थाने से टरका दिया। करीब 20 दिन तक थाने के चक्कर काटने के बाद हताश पीड़ित परिवार जिले के पुलिस आलाधिकारियों के दर पर न्याय की गुहार लगाई। जिसके बाद पुलिस ने आलाधिकारियों के निर्देश पर मामला तो दर्ज कर लिया। लेकिन कार्यवाही के नाम पर फिर से टरकाना शुरू कर दिया।

पीड़ित परिवार के घर रघुवीर का आना जाना था

पीड़ित परिवार की माने तो इन्दरूक के प्रभु दयाल का रघुवीर के घर आना जाना था। वह अक्सर रघुवीर के घर आया करता था। इसी के चलते वह 7 अप्रैल को रघुवीर के घर आया था। पीड़ित परिवार नाबालिक के साथ खेतों में गेहूं की कटान का काम रहा था। इसी दौरान नाबालिक पुत्री पानी लाने के लिये घर चली आई। जिसके बाद काफी देर तक वह वापस खेत नही पहुंची।

पुत्री की चिंता होने पर जब पीड़ित परिवार घर पहुंचा तो वहां भी पुत्री को नहीं पाया। जिसके बाद उसकी खोजबीन शुरू की, लेकिन उसका पता नहीं चला। खोजबीन के दौरान पीड़ित परिवार को नाबालिक पुत्री को प्रभू दयाल द्वारा बहला-फुसलाकर ले जाने की
जानकारी हुई। जिसके बाद पीड़ित परिवार थाने पहुंचा लेकिन थाना पुलिस ने उनकी नहीं सुनी और करीब 20 दिन तक थाने से टरकाते रहे। इसके बाद पीड़ित परिवार आलाधिकारियों के पास पहुंचा। तब जाकर पुलिस ने आलाधिकारियों के निर्देश के बाद मामला तो दर्ज कर लिया लेकिन कार्यवाही के नाम पर केवल पीड़ित परिवार को आश्वासन ही मिला।

अब भगवान से मांग रहे अपनी लाडली

करीब 4 माह से पुत्री के गायब होने और पुलिस की कार्यशैली से पीड़ित परिवार परेशान हो गया तो अब पुलिस से भरोसा उठने के बाद वह भगवान का सहारा लेने को मजबूर है। इसलिए अब पीड़ित परिवार केवल भगवान के भरोसे ही अपनी पुत्री की तलाश में लगा हुआ है। सुबह से ही पीड़ित परिवार रोज गांव के मन्दिर में जाकर पूजा अर्चना कर पुत्री की जल्द वापसी और सलामती की मन्नत भगवान से मांग रहे हैं। पुलिस की इस कार्यशैली और पीड़ित परिवार के सवालों का जवाब पुलिस आलाधिकारियों के पास नहीं हैं।

वहीं पुलिस आलाधिकारियों की माने तो मामला दर्ज हैं। मामले की जांच की जा रही हैं और आरोपियों की गिरफ्तारी जल्द की जायेगी।

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