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Photo Icon नौ रूपों में विराजमान आदिशक्ति के इस दरबार में पुलिस कर्मियों की है बड़ी आस्था

Updated: IST temple
नगर के बीचों बीच स्थित माता रानी का सर्वधर्म मंदिर, जिसमें मैया अपने 9 रूपों में विराजमान होकर सब पर कृपा बरसा रही है।

कानपुर देहात। कहते हैं, मां से बड़ा इस दुनिया में कोई नहीं है। जब बच्चे को कोई परेशानी होती है तो बिन कहे मां सब कुछ महसूस कर लेती है। मां की हर बात निराली है। जिसे हम लोग दो रूपों में जानते हैं, एक जननी तो दूसरी जगत जननी है। जिनसे बिना मांगे ही सब कुछ मिल जाता है। ऐसा ही एक मां का दरबार जिले के झींझक नगर में स्थित है, जिसे लोग सर्वधर्म मंदिर के नाम से जानते हैं। इस मंदिर की स्थापना के लिये आदिशक्ति ने स्वयं नगर के अशोक गुप्ता को प्रेरित किया, जो उस समय बर्तनों का व्यापार करते थे और परिवार के भरण पोषण के लिये दूसरे व्यापार भी करते थे। जो स्वयं मातारानी के बड़े उपासक थे। उन पर जगत जननी की ऐसी अनुकम्पा हुयी कि उन्होंने व्यापार को खत्म कर एक सुंदर दरबार बनवाकर उनकी सेवा में लग गये और आज वह घर छोड़कर उसी मंदिर में रहकर मां के सेवाकार बन गये हैं। उनकी पत्नी भी उनके साथ रहकर इस सेवा कार्य में भरपूर सहयोग करती है।

क्या है सर्वधर्म मंदिर की पृष्ठभूमि
नगर के बीचों बीच स्थित माता रानी का सर्वधर्म मंदिर, जिसमें मैया अपने 9 रूपों में विराजमान होकर सब पर कृपा बरसा रही है। इसकी अपनी एक कहानी है। नगर के निवासी अशोक गुप्ता करीब 20 साल पहले बर्तनों का व्यापार करते थे, जिससे वह अपने परिवार का जीवन यापन करते थे, लेकिन मां दुर्गा के बड़े उपासक थे। मातारानी ने उनकी सेवा से खुश होकर एक दिन उनको स्वप्न दिया, जिसमें उन्होंने अशोक गुप्ता को प्रेरित किया कि उनका सेवा का समय आ गया है। वह अपने प्लाट के स्थान पर एक सुंदर मंदिर स्वयं बनवायें और उनकी सेवा करें तो उन्होंने अव्यवस्थाओं के चलते माता से विनती की कि मैं गरीब कैसे आपका दरबार बनाऊंगा तो उन्होंने कई बार स्वप्न दिया और कहा कि मुझ पर विश्वास रखो, सब हो जायेगा। यह बात उनके दिमाग में बैठ गयी। जिसके बाद अशोक दुकान की बिक्री होने के बाद उसका लेखा जोखा रखे बिना वह सारा पैसा एकत्रित करने लगे।

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6 माह मंदिर निर्माण तो 6 माह कार्य करते थे
अब अशोक का एक ही उद्देश्य था कि माता के निर्देशों का पालन करना है, जिसके बाद उन्होंने 2002 में मंदिर निर्माण के लिये अपने प्लाट में नींव खुदवा डाली और मैया की कृपा से जो नक्शा उनके दिमाग में बनता गया, वो बनवाने लगे। धीरे धीरे दुकान खत्म हो गयी। 6 महीने में जो पैसा एकत्रित होता था, उससे मंदिर निर्माण कराते थे। फिर 6 माह वह प्लाट बिक्री का कार्य करने लगे। उसमें जो धन इकट्ठा होता था। वह फिर 6 महीने बाद मंदिर में लगा देते थे। इस तरह मंदिर बनने के बाद लोग वहां दर्शन के लिये आने लगे। धीरे धीरे लोगों की आस्था बढ़ने लगी।

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राजमिस्त्री की इच्छा से बनी गुम्बद टूट गयी
मंदिर के निर्माण कार्य मे लगे औरैया के मिस्त्री रामसरन ने अशोक से कहा कि इसकी गुम्बद मै अपने नक्से से बनाता हूँ। जब मिस्त्री ने वह गुम्बद बनाई तो बनने के बाद वह भर भराकर गिर गयी। रात मे स्वप्न मे माता ने कहा कि जो तुम्हारे दिमाग मे नक्सा बनेगा। वैसा ही बनवाना है, और अंतता इस मंदिर की सेवा के लिये किसी महिला को कार्यभार सौंपा जाये। जिसके बाद माता के बताये नक्से पर पूरा मंदिर निर्माण कराया गया।

क्यों है पुलिसकर्मियों की आस्था
उस दौरान चौकी इंचार्ज हरदयाल सिंह की पत्नी गर्भवती थी। वह अपनी पत्नी को बहुत चाहते थे। उन्होंने इस दरबार मे पहुंचकर मां से अर्जी लगाई। जिसके बाद उनके घर एक पुत्री ने जन्म लिया और फिर उनकी तरक्की दिन प्रतिदिन होती गयी। यह बात उन्होंने सभी को बताई कि माता ने स्वप्न दिया था जिसके बाद पुलिसकर्मी शिवराम सिंह, छत्रपाल सिंह, मुकेश यादव, ए के सिंह, बलिराज शाही, सीपी तिवारी, बीपी मिश्रा, अमरीश यादव आदि तमाम लोगो की इस दरबार मे आस्था बढ गयी, जिसके बाद सबकी तरक्की हुयी। ऐसे पुलिस कर्मियों की आस्था सर्वधर्म मंदिर में बढ़ गयी।
पुजारी अशोक गुप्ता का कहना है कि आज मैं 21 वर्षाें से माता की सेवा में लगा हूं। इस दरबार में स्थानीय भक्तों सहित कानपुर, दिल्ली आदि दूर दराज के लोग मां के अलौकिक रूप के दर्शन करने आते हैं। माता की कृपा से बराबर निर्माण कार्य चलता रहता है।

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