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UP Election 2017

यह इंसान है पीएम मोदी का सबसे बड़ा मुरीद, इस तरह से करता है असहायों की सेवा

Updated: IST kanpur
जब पीएम मोदी चाय बेचकर इस मुकाम तक पहुंच सकते हैं तो मेरे जैसा गरीब कुछ असहायों की सेवा तो कर ही सकता है।

अरविंद वर्मा
कानपुर देहात. समाज में पैसे कमाने व उन पैसों ऐश करने वाले इंसान तो आपने अक्सर देखे होंगे, लेकिन अकबरपुर के गोपाल जी मिश्रा एक ऐसे इंसान हैं, जो अकबरपुर जिला अस्पताल के बाहर 22 वर्षाे से चाय व समोसे की दुकान खोलकर लोगों की सेवा करते हैं। जिससे वह अपना घर भी चलाते हैं और अपने बच्चों का भरण पोषण करते हैं। अस्पताल में आने वाले गरीब असहायों को वह निशुल्क चाय नाश्ता देकर सेवाकार्य करते हैं।

पीएम मोदी के मुरीद हैं गोपाल जी
लोग बताते हैं कि 2014 में प्रधानमंत्री के रूप में नरेंद्र मोदी के पद सम्भालने के बाद गोपाल जी ने जब टेलीविजन व अखबारों में पढ़ा कि प्रधानमंत्री ने चाय बेचकर कठिन संघर्ष के बाद लोगों की सेवा करके इस मुकाम को पाया है। उसी के बाद से गोपाल जी ने प्रधानमंत्री के बारे में विस्तृत जानकारी करना शुरू कर दिया और धीरे-धीरे उन्होंने नरेंद्र मोदी की जीवनी खंगाल डाली और उनके जीवनकाल से बहुत कुछ सीख ली। साथ ही पूरे दिन दुकान खोलकर लोगों की सेवा भी करते रहे। वर्तमान मे वह नरेंद्र मोदी के मुरीद बन चुके हैं। आज प्रधानमंत्री की प्रत्येक योजना के बारे में वह स्वयं लोगो से बखान करते हैं। बीते दिनों पुखरायां रेल हादसे में गोपाल जी ने दुर्घटना में घायल हुए जिला अस्पताल में भर्ती यात्रियों सहित सभी डाक्टरों की दिन रात जमकर निशुल्क सेवा की। उन्होंने गरीब व लावारिश रोगियों को निशुल्क चाय-नाश्ता वितरित कर एक सराहनीय कार्य किया। वैसे ये कार्य वो पिछले कई सालों से कर रहे हैं। जहां डाक्टर व स्टाफ घंटों लाशों के बीच जीवन ढूंढते रहे। वहीं गोपाल जी भी उनकी सेवा मे निरंतर लगे रहे। उनका कहना है कि इन कार्याे से उन्हें सुख की अनुभूति होती है।

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पुखरायां रेल हादसे में की निशुल्क सेवा
जिले के पुखरायां में हुए भीषड़ रेल हादसे में कई लोग काल के गाल में समा गये। जाने कितने लोगों का सहारा छिन गया। जहां एक तरफ घटना के बाद मौत के मुंह से बचे लोगों को लूटकर आटो रिक्सा व बस वालों ने मनमाना किराया वसूलकर उनके घर पहुंचाया। वहीं इन सबको बहुत करीब से महसूस करने वाले गोपाल जी मिश्रा ने घटना की जानकारी होते ही भोर पहर ही दुकान खोलकर चाय व समोसे बनाना प्रारम्भ किया और जिला अस्पताल में भर्ती घायलों व उनके तीमारदारों को वितरित करना शुरू किया। यह निशुल्क सेवा करते हुए उन्होंने असहाय घायलों को अपने हाथ से खिलाया। गोपाल जी का कहना है कि पैसा तो हर इंसान कमाता है। किसी के लिये खुशियां कमाने का आनंद ही अलग है। 2-3 दिन तक उन्होंने अपना यह सेवा कार्य जारी रखा। जिससे परेशानी की इस घड़ी में लोगों को बहुत राहत महसूस हुई।

प्रधानमंत्री जी से मिली ये सीख
गोपाल मिश्रा का कहना है कि जिस देश का प्रधानमंत्री चाय बेचकर इस मुकाम तक पहुंचा हो और वह गरीबों के दुख दर्द समझ सकता हो, तो मेरे जैसा एक गरीब चाय बेचने वाला कुछ असहायों की सेवा तो कर ही सकता है। गोपाल का कहना है कि ये सब करने से उन्हें सुख प्राप्त होता है। सभी की दुआएं मिलती हैं। उनका कहना है कि अस्पताल के बाहर दुकान लगाने का मतलब ये नहीं कि रोगी आएं तो मेरा सामान बिके। बल्कि मेरा उद्देश्य ये है कि अस्पताल में आने वाले असहाय रोगियों की निशुल्क सेवा करने का मेरा लक्ष्य पूरा हो।

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प्रधानमंत्री से मिलने की है ख्वाहिश
गोपाल मिश्रा ने अपनी दास्तां बयां करते हुए बताया कि नरेंद्र मोदी जी के प्रधानमंत्री बनने के बाद जब मुझे उनके बारे में जानकारी हुई कि वह चाय बेचकर लोगों की सेवा करके ऐसे मुकाम तक पहुंचे हैं। तो मुझे अपने इस कार्य में बहुत हौंसला मिला और मैं फिर तल्लीनता से सेवा कार्य करने में जुट गया। मैं उनके सभी भाषण सुनता हूं, और मुझे उनसे बहुत कुछ सीखने को मिलता है। बस एक बार उनसे मिलने की कामना है, जो शायद पूरी हो सके।

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