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अजनबी नहीं गहरे दोस्त थे प्रतिभा मर्डर केस के कातिल, मौत देने से पहले बचने की थी प्लॉनिंग

Updated: IST pratibha
जैसे मजिस्ट्रेट प्रतिभा गौतम के कत्ल में सामने आया है जिसमें उसके हत्यारे पति ने बेहद ही प्लांड तरीके से खुद को सेफजोन में रखा है।

कानपुर। जेम्स हेडली चेईज, शरलॉक होम्ज के जासूसी उपन्यासों पर बुनी मर्डर मिस्ट्री में कातिल अक्सर अपने को सेफजोन में रखकर ही वारदात को अंजाम देता है। घटना के पहले ही वह सुबूतों को अपनी बेगुनाही के तौर पर तैयार करता है। जैसे मजिस्ट्रेट प्रतिभा गौतम के कत्ल में सामने आया है जिसमें उसके हत्यारे पति ने बेहद ही प्लांड तरीके से खुद को सेफजोन में रखा है। उसने हत्या के पहले ही वह सारे रास्ते तैयार कर लिए थे, जिनसे वह अदालत के कटघरे में जाने के बाद साफ तरीके से बाहर निकल जाता है। हत्या के बाद जेल में बेपरवाह रहने वाले मनु के व्यवहार के पीछे की वजह भी यही हो सकती है।

मुलाहिजा बैरक में बंद मनु ने अपने करीबी दोस्त से प्रतिभा के मर्डर में अपनाई गई चालों को शेयर किया है। उसका यह दोस्त कोई और नहीं बल्कि दो साल पहले शहर में हुए हाईप्रोफाइल ज्योति मर्डर केस में हत्यारोपी पति पीयूष श्यामदासानी है। तो क्या मैजिस्ट्रेट प्रतिभा गौतम और दो साल पहले हुई हाईप्रोफाइल ज्योति मर्डर केस में कोई समानताएं हैं। जवाब है, क्या हत्या के दोनों ही आरोपी एक दूसरे के नजदीकी है। जवाब है हां, दोनों ही गहरे दोस्त हैं। दोनों ही अपनी पत्नी की हत्याओं में शामिल हैं। दोनों ने ही हत्या करने का प्री प्लान तैयार किया है। दोनों ही अपने बचाव को लेकर मुतमुईन रहे हैं। दोनों ने अपने बचाव के लिए खूबसूरत सुबूत गढ़े थे। इन दोनों में एक और समानता है कि दोनों के ही राज जेल के सीखचों के पीछे से हर आए।

मनु - पियूष के बीच तीसरा दोस्त

कुछ ऐसी जानकारियां मिलीं हैं जिनसे जज प्रतिभा गौतम की हत्या का खुलासा करने में शहर पुलिस को खासी मदद मिल सकती है। सूत्रों की मानें तो इस सनसनीखेज हत्या काण्ड में मनु के सिविल लाइन्स निवासी दोस्त की खासी अहम भूमिका है। यह भूमिका हत्या करने में नहीं बल्कि इस पूरे घटना क्रम में मनु के मददगार के रूप में
थी। मनु ने अपनी जज पत्नी की हत्या से पहले अपने को पूरी तरह से सेफ जोन में ले जाने के रास्ते तैयार किए, यह उसकी बेपरवाही का बड़ा कारण हो सकता है। लेकिन सबसे चौंकाने वाली जानकारी यह रही कि दो साल पहले हुए ज्योति हत्याकाण्ड के मुख्य आरोपी पीयूष औऱ मनु में खासी दोस्ती है। पीयूष औऱ मनु के बीच का पुल सिविल लाइंस निवासी एक दोस्त है शाश्वत। जिसने हत्याकाण्ड वाले दिन मनु की प्लानिंग में पूरी मदद की।

तो प्रतिभा की हत्या की दी गई थी सुपारी

मनु ने पीयूष को हत्या वाले दिन की काफी जानकारियां दी हैं। जेल में इन दोनो की बातें एक कैदी ने सुनी जिसने सूत्रों के हवाले से काफी सनसनीखेज जानकारियां मुहैया कराईं। इससे यह तथ्य सामने आ रहे हैं कि ज्योति की ही तरह प्रतिभा की हत्या भी सुपारी किलिंग है। यानी कि हत्या मनु ने तो नहीं की पर उसके संज्ञान में था कि किस समय उसकी पत्नी की हत्या हो रही होगी। उसने मौके पर जाकर तस्दीक किया। उसके बाद उसने अपनी बचत का ताना बाना बुनना शुरू किया। सूत्रों के अनुसार जेल में पीयूष और मनु एक ही बैरक में रहे। जहां दोनों एनसीआर के बाबत काफी देर बातें करते रहे। पत्नी की हत्या में पीयूष की ही तरह मनु भी घटनास्थल पर मौजूद नहीं था पर उसे पता था कि अमुक समय में उसकी पत्नी का कत्ल हो रहा है। ठीक ऐसा ही ज्योति के मर्डर केस में हुआ था। वारदात की पूरी
जानकारी उसके पति पीयूष को थी।

कैमरे से बचने के लिए खेतों से पहुंचा घर

मनु कत्ल के बाद सूचना पक्की करने मौके पर गया। मुतमईन हो जाने के बाद उसने अपने सिविल लाइंस निवासी दोस्त के साथ शराब का अंतिम दौर चलाया। इसके बाद उसने अपनी एलीबाइ गढ़ी। सूत्रों की मानें तो कानपुर आने से पहले उसने बारा टोल के पहले ही अपनी कार सड़क के किनारे पार्क कर दी थी औऱ पैदल ही सीसीटीवी कैमरे से छिपते हुए खेतों से होकर टोलबूथ पार किया। टोल के उस पार उसका दोस्त अपनी कार में मौजूद था जो उसे कानपुर ले आया। हत्या के बाद उसी दोस्त ने मनु को बारा टोल के पहले छोड़ा, जहां से फिर वह पहले की तरह ही खेतों से होकर अपनी कार तक पहुंचा। उसने कार उठाई और बकायदा टोलबूथ से होता हुआ पर्ची कटवाकर आराम से कानपुर आ गया। यह टोल की पर्ची हत्या के कुछ घंटे बाद की है। इससे मनु अदालत में यह सिद्ध कर सकता है कि जो समय हत्या का था उस समय वह दिल्ली और कानपुर के बीच सफर में था। बारा टोल की पर्ची औऱ सीसीटीवी फुटेज उसकी बात के गवाह भी होते। जेल में
उगला गया यह पूरा सच अगर पुलिस जांच में शामिल हुआ तो मनु को लेने के देने पड़ सकते हैं और उसकी सारी होशियारी सामने आ सकती है।

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