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ब्लैक बोर्ड पर सफेद झूठ, दलित प्रेसीडेंट पर बोले पीओके के लोग

Updated: IST Ramnath Kovind
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने देश के प्रथम नागरिक के पद के लिए एक दलित (रामनाथ कोविंद) के नाम का एलान कर विरोधी दलों को चारों खाने चित कर दिया।

कानपुर। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने देश के प्रथम नागरिक के पद के लिए एक दलित (रामनाथ कोविंद) के नाम का एलान कर विरोधी दलों को चारों खाने चित कर दिया। लेकिन कानपुर के भीतरगांव ब्लॉक के सिम्मरनपुर गांव, जो दलित बाहूल्य है, यहां के लोग पीएम के निर्णय को सिर्फ वोटबैंक की राजनीति के रूप में देखते हैं। यहां पर 90 घर दलितों के हैं। गांव में बिजली, सड़क, पानी, शिक्षा, स्वास्थ्य और शौचायल न होने के चलते ग्रामीणों ने इसका नाम बदल कर पीओके रख लिया है। लोगों को जब जानकारी हुई की देश का अगला राष्ट्रपति उसकी जाति का बनने जा रहा है तो खुशी की जगह उनके चेहरों में दुख दिखा। गांव वालों ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सिर्फ चुनाव जीतने के लिए कभी राम तो कभी दलितों के उत्थान के नाम पर रामनाथ कोविंद को प्रेसीडेंट पद पर बैठाने की बात करते हैं, जो कि ब्लैक बोर्ड पर सफेद झूठ है।

दलितों के वोट के लिए पीएम की चाल

भाजपा ने सोमवार को कानपुर के निवासी रामनाथ कोविंद को देश के अगले राष्ट्रपति के नाम पर मुहर लगा दी। इसकी भनक जब जिले के सिम्मरनपुर (पीओके) के ग्रामीणों को हुई तो उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तीन साल के कार्यकाल में कुछ नहीं किया और अपनी नाकमियों को छिपाने के लिए दलित को प्रेसीडेंट पद पर बैठाकर वोट लेने के लिए ये कार्ड खेला है। गांव के सर्वेस कुमार ने बताया कि आजादी के 70 साल गुजर जाने के बाद भी हम गुलामी की जिन्दगी जी रहे हैं। हमने 2014 में बसपा के बजाय मोदी को वोट दिया, लेकिन उन्होंने हमारे लिए कुछ नहीं किया। गांव में बिजली नहीं आने के चलते 100 से ज्यादा दलित युवा कुवांरे बैठे हैं, वहीं स्कूल नहीं होने के चलते 70 फीसदी लोग निरक्षर हैं।

लोगों ने कोविंद को दिया था वोट

गांव के बुजुर्ग नत्थू कोरी ने बताया कि 1991 के लोकसभा चुनाव के दौरान रामनाथ कोविंद घाटमपुर की लोकसभा सीट से चुनाव लड़ा था। कोविंद अपने कार्यकर्ताओं के साथ दौलतपुर आए थे, और हमलोगों को बुलाया था। दो ग्रामीणा इनसे मिलने के लिए दौलतपुर पहुंचे और कोविंद को लेकर गांव आए। गांव के बाहर कोविंद ने चौपाल बैठाई और लोगों की समस्याएं सुनी। हमलोगों ने इन्हें पानी और स्कूल न होने की बात से अवगत कराया। जिस पर कोविंद ने जल्द से जल्द स्कूल के निर्माण की बात कही। फलस्वरूप मतदान के दिन हमलोगों ने मायावती के बजाय कोविंद जी को वोट दिया, लेकिन वे चुनाव हार गए और फिर कभी दोबारा इस गांव की तरफ नहीं देखा।

किए गए वादे हमलोगों ने याद दिलाए

गांव के रज्जन कोरी बताते हैं कि 2002 में घाटमपुर के पूर्व विधायक इंद्रजीत कोरी की बेटी में शामिल होने के लिए रामनाथ कोविंद चिल्ली गांव आए थे। यहां पर हमलोगों ने उनसे मुलाकात की और गांव की समस्याओं के बारे में बताया। उस दौरान कोविंद जी तत्कालीन डीएम को फोनकर गांव की समस्याओं के निराकरण के लिए कहा था, लेकिन डीएम के कानों में जूं तक नहीं रेंगी। इसके बाद हमलोग कोविंद जी मिलने के लिए कईबार कानपुर गए, पर उनसे मुलाकात नहीं हो सकी। सर्वेश कहते हैं कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपनी चुनावी सभा के दौरान कहा था कि यूपी में भाजपा की सरकार बनी तो बिना भेदभाव के ग्रामीण क्षेत्रो में बिजली पहुंचाई जाएगी । सूबे में कमल खिला और योगी आदित्यनाथ ने सीएम पद की शपथ ली । सूबे में बीजेपी सरकार बनने के बाद भी हमलोग गुलामी का जीवन जी रहे हैं ।

दलितों ने बदहाली के चलते पीओके रखा नाम

ग्राम प्रधान सड़क के उस पार तो आता है, लेकिन बदहाल गांव की तरफ देखता तक नहीं । इसी के चलते गांव वालों ने अपने गांव का नाम पीओके रख लिया । गांव के बाहर दुकानों, मंदिर और दीवारों पर होर्डिंग्स व बैनरों से बकायदा पाक अधिकृत कश्मीर लिखकर चस्पा कर दिया । गांव के विजय मिश्रा का कहना है कि जब से यह गांव बसा है तब से इस गांव में ना बिजली है ना पानी गांव में केवल एक हैण्डपम्प सही है जिससे पूरे गांव के लोग पानी भरते है। विजय का कहना है कि पाक अधिकृत कश्मीर हिन्दुस्तान और पाकिस्तान का हिस्सा है लेकिन वंहा काम कोई नहीं करता है । जब पीओके में कोई घटना होती है तब उनको याद आती है। यही दास्तां हमारे गांव की भी है। जिलाधिकारी सुरेंद्र सिंह का कहना है कि हर गावों के विकास और कई योजनाआें के लिये ग्राम प्रधानों को पैसा दिया जाता है । इतना सबकुछ होने के बाद भी अगर कोई कार्य नहीं हुआ है तो इसकी जांच कराई जाएगी।

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