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पीके के खाट की खुली पोल, प्रश्न पूछने वाले के लिए स्टूल

Updated: IST rahul gandhi
पीके (प्रशान्त किशोर) ने सीधे सूबे की सबसे आबादी किसानों से कांग्रेस के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष राहुल गांधी से रूबरू कराने के खाट चौपाल का प्लॉन बनाया

कानपुर. पीके (प्रशान्त किशोर) ने सीधे सूबे की सबसे आबादी किसानों से कांग्रेस के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष राहुल गांधी से रूबरू कराने के खाट चौपाल का प्लॉन बनाया। इसके तहत राहुल गांधी खाट यात्रा के तहत सूबे के जिलों का दौरा कर किसान पंचायत लगा रहे हैं। लेकिन कानपुर में दो दिन तक खाट सभा राहुल गांधी ने की, जहां पीके की रणनीति की पोल खुलकर सामने आ गई। पीके के टीम के एक दर्जन सदस्य पहले माती और फिर घाटमपुर पहुंचे। चौपाल में किसानों को तीन श्रेणियों में खाट पर बिठाया गया। पहले और दूसरेश्रेणीवाले ही प्रश्न पूछते हैं, तीसरी श्रेणी वाले खाट पर बैठते हैं और सिर्फ तालियां बजाते हैं। पहले और दूसरे श्रेणी वाले किसानों को आगे की पंक्ति पर लकड़ी के स्टूलों पर बिठाया जाता है।

15 दिन पहले पहुंच जाती है पीके की टीम

कानपुर की खाट चौपाल के आगाज से 15 दिन पहले पीके टीम के विवक चंदेल की आगवाई में 11 सदस्यों की टीम पहुंच गई थी। पीके की टीम ने स्थानीय नेताओं के साथ उन गांवों का दौरा किया, जहां पर कांग्रेस पार्टी की अच्छी पकड़ थी। सदस्य किसानों से मिले और उन्हें चौपाल में आने का न्योता दिया। साथ ही इन किसानों को सभा शुरू होने से करीब दो घंटे पहले आने को कहा जाता है। टीम के सदस्य चुने गए किसानों को खाट के बजाय स्टूल में बैठने का आदेश देते हैं।

15 मिनट तक प्रश्नों का करवाते हैं रिहर्सल

पीके टीम के सदस्य मंच पर दो घंटे पहले पहुंच जाते हैं और प्रश्न पूछने वाले किसानों के हाथों पर प्रश्न की लिस्ट थमा दी जाती है। सदस्य किसानों के साथ एकसाथ बैठकर प्रश्न पूछने का रिहर्शल करवाते हैं। घाटमपुर सभा में जहानाबाद के चिल्ली गांव से आए किसान रमेश, रसूल अहमद, अजय कुशवाहा और रामबाबू कोरी ने बताया कि हम राहुल की खाट सभा में पहले पहुंच गए थे। हम राहुल गांधी से मिलना और प्रश्न पूछना चाहते थे, लेकिन वहां काली टी शर्ट और नीली जींस पहने लोगों ने हमें राहुल से नहीं मिलने दिया गया। राहुल गांधी से सिर्फ वही लोग प्रश्न कर सके जो स्टूलों में बैठे थे।

टीम के सदस्य तैयार करते हैं प्रश्न

खाट सभा में किसानों के जरिए जो सवाल राहुल गांधी से पूछे जाते हैं, उनकी पटकथा पहले से ही किसानों को रटा दी जाती है। किसान धान का समर्थन मूल्य न बढ़ना, यूपी में दो साल में शिक्षा का स्तर गिरा, कर्ज माफ न करना, सिंचाई की उचित व्यवस्था न किए जाना, किसानों को अलग से रोलगार न देना, बैंकों द्धारा वसूली के लिए उतपीड़न करना जैसे सवाल राहुल गांधी से करते हैं। इसकी बानगी कानपुर के माती और घाटमपुर सभा के दौरान दिक्षह, जहां किसानों ने सही प्रश्न राहुल गांधी से किए।

खाट पर बैठाई जाती हैं बुजुर्ग महिलाएं

पीके टीम के सदस्य बुजुर्ग और अनपढ़ महिलाओं की खाट सबसे पीछे बिछाई जाती है। राहुल गांधी से जब किसान प्रश्न करते हैं और वह जैसे ही अपने अंदाज में वह उत्तर देते हैं तो पीछे की पंक्ति में बैठे किसान जोर-जोर से तालियां बजाने लगती हैं। इसके अलावा कांग्रेस के स्थानीय युआ नेता खाट सभा में किसानों के बीच में बैठ जाते हैं और राहुल गांधी जिन्दाबाद के नारे लगाने लगते हैं। घाटमपुर में एक कद्दावर कांग्रेस युवा इकाई का नेता अपने समर्थकों से साथ राहुल गांधी जिन्दाबाद के नारे लगा रहा था।

कांग्रेस के युवराज का खुला ड्रामा

जिलाध्यक्ष सुरेंद्र मैथानी ने कहा कि डॉयरेक्टर पीके की लिखी स्क्रिप्ट को किसानों के सामने राहुल गांधी पेश कर रहे हैं। घाटमपुर में खाट सभा में किसान तो नाम मात्र के ही आए, और जो पहुंचे भी वह सवाल नहीं कर पाए। पीके टीम के सदस्यों के चुने लोग ही राहुल गांधी से प्रश्न कर पाए। यह सारा ड्रामा पीके का है और राहुल उनके इशारों पर नाच रहे हैं। इनके इस ड्रामें को पब्लिक जान चुकी है, चुनाव से पहले खटिया टूट चुकी है। वहीं बसपा जिलाध्यक्ष प्रशान्त दोहरे ने कहा कि कांग्रेस का जहाज डूब गया है, राहुल गांधी कुछ भी कर लें । यूपी में इनकी वापसी नहीं हो सकती। सपा जिलाध्यक्ष फजल महमूद ने कहा कि खाट सभा कानपुर में पूरी तरह से फ्लाफ रहा।

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