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राष्ट्रपति पद के लिए बेटे-भांजी के बीच टक्कर, कोविंद का पलड़ा मीरा से भारी

Updated: IST kanpur
71 वर्षीय राम नाथ कोविंद का जन्म स्थान कानपुर देहात का है। लेकिन अब कानपुर नगर ही उनका घर है। वहीं दूसरी ओर राष्ट्रपति चुनाव में विपक्ष की उम्मीदवार मीरा कुमार का ननिहाल कानपुर के कौशलपुरी लालपथनगर में है।

कानपुर. उत्तर प्रदेश की औद्योगिक नगरी कानपुर पिछले कई दिनों से चर्चाओं में है। क्योंकि देश के प्रथम नागरिक के पद के लिए जो कैंडीडेट मैदान पर हैं, उनमें एक यहीं के बेटे हैं तो दूसरी भांजी। देश का अगला प्रेसीडेंट कौन होगा इसके लिए मतदान जारी है। कानपुर नगर व देहात के सभी विधायक व सांसद मतदान में भाग लेने के लिए देर रात शहर से निकल गए। सूबे के कारागार मंत्री जयकुमार जैकी ने कहा कि रामनाथ कोविंद अच्छे इंसान हैं और इनके मार्गदर्शन में देश विकास के पथ पर आगे बढ़ेगा। बीएनएसडी शिक्षा निकेतन के प्रधानाचार्य अंगद सिंह कहते हैं कि कोविंद जी इसी संस्थान से पढ़ लिखकर एडवोकेट बने हैं। हम सब लोग उनकी जीत के लिए दुआ कर रहे हैं। साथ ही मीरा कुमार का भीननिहाल यहीं पर है और दो बार वे भी हमारे स्कूल आ चुकी हैं।

राजनीति में परिवारवाद के खिलाफ हैं कोविंद

71 वर्षीय कोविंद का जन्म स्थान कानपुर देहात का है। लेकिन अब कानपुर नगर ही उनका घर है। बेहद साधारण पृष्ठभूमि से आए कोविंद एनडीए की ओर से राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार बनाए जाने से पहले तक बिहार के राज्यपाल थे। कानपुर नगर के महर्षि दयानंद विहार में कोविंद के पड़ोसी उन्हें ऐसे सौम्य और मृदुभाषी व्यक्ति के रूप में जानते हैं, जो सभी को साथ लेकर चलने में विश्वास करता है। कोविंद के जनसंपर्क अधिकारी रहे भतीजे अशोक द्विवेदी कहते हैं कि चाचा जी राजनीति में परिवारवाद के खिलाफ हैं। चाचा का मानना है कि उसी को राजनीति में आना चाहिए, जो जमीन से जुड़ा हो। जनता के बीच उसकी पैठ हो। अशोक द्विवेदी का कहना है कि कोविंद बहुत साधारण परिवार से हैं और कड़ी मेहनत एवं समर्पण के बल पर यहां तक पहुंचे हैं। उनके अनुसार कोविंद बहुत सादा भोजनपसंद करते हैं।

लालपथ नगर में हैं मीरा कुमार का ननिहाल

दूसरी ओर, राष्ट्रपति चुनाव में विपक्ष की उम्मीदवार मीरा कुमार का ननिहाल कानपुर के कौशलपुरी लालपथनगर में है। मीरा कुमार सरदार हरवंश भल्ला की रिश्तेदार हैं। भल्ला के बेटे व मीराकुमार के भतीजे लॉरी सपा में है। नगर अध्यक्ष हरि प्राकश अग्निहोत्री ने कहा कि पिछले शुक्रवार को लखनऊ आईं मीरा कुमार अपने ननिहाल का जिक्र करना नहीं भूलीं। उनके दिल में कानपुर बसता है। हमें उम्मीद है कि मतदाता दिल की आवाज सुनकर मतदान करेंगे। कानपुर से कांग्रेस के पास एक तो सपा के दो विधायक हैं, जो मीरा कुमार को अपना वोट देंगे। वहीं इससे एक बात तो तय है कि दोनों उम्मीदवारों में से चाहे जो भी राष्ट्रपति बने, कानपुर का चर्चा में आना तय है।

लक्ष्मी सहगल लड़ चुकी हैं चुनाव

कोविंद और मीरा से पहले साल 2002 में कानपुर की ही लक्ष्मी सहगल भी राष्ट्रपति का चुनाव लड़ चुकी हैं। लक्ष्मी नेताजी सुभाष चंद्र बोस की आजाद हिंद फौज में थीं। उन्हें भाकपा, माकपा, रेवोल्यूशनरी सोशलिस्ट पार्टी और ऑल इंडिया फॉरवर्ड ब्लॉक ने मुख्य रूप से समर्थन दिया था। उस चुनाव में एनडीए के प्रत्याशी डॉक्टर एपीजे अब्दुल कलाम को 9,22,884 जबकि लक्ष्मी को 1,07,366 वोट मिले थे। भाजपा नगर अध्यक्ष सूरेंद्र मैथानी कहते हैं कि अंग्रेजों के खिलाफ आजादी का बिगुल कानुपर से फूटा था। 70 साल के बाद ये पहला मौका कानपुर के लोगों के लिए है कि उनके शहर का बेटा देश के राष्ट्रपति की कुर्सी पर बैठने जा रहा है।

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