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पीएम और कोविन्द की एक थी सोच, मोदी को साइकिल से पहुंचाते थे स्कूल 

Updated: IST kanpur
दोनों भाजपा व संघ के लिए जमीन तैयार करने के लिए रात-दिन काम किया करते थे।

विनोद निगम
कानपुर। रामनाथ कोविन्द और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच गहरी मित्रता थी और दोनों संघ से जुड़े थे। 1988 में बतौर संघ प्रचारक के रूप में नरेंद्र मोदी जब कानपुर आए तो रामनाथ कोविन्द के घर पर रूके थे। गुरूदेव स्थित जयनारायण स्कूल में संघ की बैठक में शामिल होने के लिए नरेंद्र मोदी को रामनाथ कोविन्द साइकिल पर बैठाकर पहुंचाते थे। नरेंद्र मोदी करीब पंद्रह दिन तक शहर में रूके और बिठूर, परमठ मंदिर, जाजमऊ के सिद्धेश्वर मंदिर पूजा-पाठ के लिए इन्हीं के साथ जाया करते थे। रामनाथ कोविन्द के मित्र राजीव शुक्ला (80) ने बताया कि वे दलित, मजदूर और गरीबों के लिए जाने जाते थे। इनकी भलाई कें लिए कोविन्द परदे के पीछे रहकर काम करते थे। राजीव बताते हैं कि नरेंद्र मोदी को एकांतवास पसंद था, इसी के चलते उन्होंने इनका घर चुना। दोनों भाजपा व संघ के लिए जमीन तैयार करने के लिए रात-दिन काम किया करते थे।
चूल्हे की रोटी और तुअर की दाल लेकर जाते थे मोदी
नरेंद्र मोदी संघ के लिए बतौर प्रचारक कानपुर आए तो रामनाथ कोविन्द के घर को अपना ठिकाना चुना। इनके घर से जयनारायण स्कूल की दूरी एक किमी की है। कोविन्द जी अपनी साइकिल निकालते और भोर पहर नरेंद्र मोदी को पीछे बैठाकर स्कूल पहुंचाते थे। इस दौरान दोनों नास्ते की जगह भरपेट भोजन के लिए चूल्हे की रोटी और तुअर की दाल ले जाया करते थे। अजय शुक्ला बताते हैं कि हम भी संघ की शाखा में शामिल हुआ करते थे और कोविन्द जी व नरेंद्र मोदी के साथ बैठकर भोजन करते थे। नरेंद्र मोदी को कोविन्द जी की पत्नी के हाथ की बनी रोटी और दाल बहुत पसंद थी।

साइकिल पंचर हुई तो पैदल पहुंचे थे बिठूर
राजीव शुक्ला के मुताबिक रविवार का दिन था और उस दिन संघ की शाखा नहीं होनी थी। नरेंद्र मोदी ने बिठूर जाने की इच्छा जताई, जिस पर कोविन्द जी राजी हो गए। दोनों साइकिल पर सवार होकर घर से निकले ही थे कि सिंहपुर कछार के पास साइकिल पंचर हो गई। कोविन्द जी ने वहीं पर अपने मित्र के घर साइकिल को खड़ा किया और पैदल बिठूर की ओर निकल पड़े। नरेंद्र मोदी ने गंगा में डुबकी लगाई और ब्राम्हघाट पर पूजा-अर्चना की। इस दौरान उन्हें कोविन्द जी नानराव पेशवा के महल पर ले गए। नरेंद्र मोदी ने कई एतिहासिक चित्र और मूर्तियां देखीं। इसके बाद सीता रसोईया सहित अन्य धार्मिक स्थल के दर्शन किए।

परदे के पीछे रहकर बनाते थे रणनीति
रामनाथ कोविन्द ऐसे नेता हैं, जो सामने न आकर परदे के पीछे रहकर भाजपा के लिए रणनीति बनाया करते थे। रामनाथ कोविन्द पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी के बहुत करीबी रहे और उनके बुलावे पर अक्सर दिल्ली जाते रहते थे। 2017 के विधानसभा चुनाव से पहले बिठूर में संघ की बैठक के दौरान रामनाथ कोविन्द ने दलित समाज को भाजपा में जोडऩे के लिए अपने करीब अरूण संखवार को भेजा था। कहा यहां तक जा रहा है कि यूपी में सीएम पद के लिए रामनाथ कोविन्द ने योगी आदित्यनाथ का नाम पीएम नरेंद्र मोदी को बताया था और इसी के बाद योगी के नाम का आनन-फानन में एलान हुआ। रामनाथ कोविन्द जब भी कानपुर आते तो अपने मित्र राजीव से मिलने जरूर जाते। वर्तमान में इनके निवास में पूर्व पीआरओ रहते हैं।

पीएम मोदी ने कनपुरिए पर लगाया दांव
कई दिनों से राष्ट्रपति के उम्मीदवार को लेकर चली आ रही कसमकस को भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने विराम लगा दिया। देश के अगले राष्ट्रपति के रूप् में एनडीए की तरफ से कानपुर के निवासी व बिहार के राज्यपाल रामनाथ कोविन्द के नाम का एलान कर दिय गया। इसकी जानकारी जैसे ही कानपुरवालों को हुई तो लोग जश्न में डूब गए। कनपुरियों ने कहा कि देश की गद्दी पर पहले से गंगा के छोरा विराजमान है, अब कोविन्द राष्ट्रपति बनने जा रहे हैं इससे शहर का विकास होगा, बंद मिलें फिर से चलेंगी। राज्यपाल रामनाथ कोविन्द के पूर्व पीआरओ अशोक त्रिवेदी ने बताया कि वे बहुत इमानदार और गरीबों के मसीहा हैं। 25 साल पहले कोविन्द जी कानपुर देहात से शहर आए और इंद्रानगर स्थित एक डॉक्टर के घर पर किराए से रहे थे।
गर्व की बात, हमारे शहर से होगा अगला राष्ट्रपति
देश की आजादी के लिए क्रांतिकारियों से लेकर कांग्रेस व साम्यवादियों ने कानपुर को रणनीतिक केन्द्र बनाया और कानपुरवासियों ने उसमें बढ़ चढ़कर भाग लिया। लेकिन आजादी के बाद से कानपुर का नाम धीमा होता चला गया। लेकिन भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता डा. मुरली मनोहर जोशी के शहर से सांसद बनने व केन्द्र में मंत्री न बनने के बाद से कानपुरवासी यह कयास लगा रहे थे कि अगला राष्ट्रपति शहर से होगा। जिससे शहर का नाम रोशन होगा। शहरवासियों का यह कयास काफी हद तक उस समय सच साबित हुआ जब सोमवार को दिल्ली में भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार की घोषणा कर दी। यह अलग बात है कि सांसद जोशी के बजाय मूलरूप से कानपुर के रहने वाले व बिहार के राज्यपाल रामनाथ कोविंद के नाम पर मोहर लगी। अशोक त्रिवेदी ने बताया कि कानपुरवासियों के लिए गर्व की बात है कि अपने शहर का व्यक्ति देश का प्रथम नागरिक बनने जा रहा है।

घाटमपुर से लड़ेते थे लोकसभा का चुनाव
महापौर कैप्टन जगतवीर सिंह द्रौण ने कहा कि हमें तो बहुत खुशी है कि उत्तर प्रदेश से पहले राष्ट्रपति अपने शहर से होने जा रहे हैं। अपनी यादों को ताजा करते हुए बताया कि 1991 के चुनाव में हम दोनों ने क्रमश: कानपुर नगर व घाटमपुर से लोकसभा का चुनाव लड़ा। लेकिन कोविंद जी चुनाव हार गये और मैं कानपुर नगर से चुनाव जीत गया। जिससे मुझे बहुत दुख हुआ और मैं उनके घर गया तो मुरझाया चेहरा देख कोविंद जी ने कहा कि यह क्या है चुनाव सेवा के उद्देश्य से लड़ा जाता है। नहीं जीता तो क्या सेवाभाव खत्म हो गया। इन्हीं की पड़ोसी रितु शुक्ला ने बताया कि हमलोग इन्हें प्यार से बाबू जी के नाम से पुकारते हैं और जब वो कानपुर आते हैं तो मोहल्लेवाले से उनके दुखदर्द जरूर पूछते हैं।

कानपुर से दूसरे राष्ट्रपति उम्मीदवार
रामनाथ कोविंद के पहले केन्द्र की अटल बिहारी सरकार के दौरान 2002 के राष्ट्रपति चुनाव में एनडीए उम्मीदवार डा. एपीजे अब्दुल कलाम के खिलाफ कानपुर की लक्ष्मी सहगल ने चुनाव लड़ा था। लेकिन वामपंथियों सहित कुछ ही पार्टियों का उनको समर्थन मिला जिससे भारी अंतर से चुनाव हार गईं। अब कोविंद कानपुर से दूसरे राष्ट्रपति उम्मीदवार बने हैं और एनडीए की संख्या के आधार पर उनकी जीत भी तय है।

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