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CBI ट्रेन हादसे के मिले आंतकी साजिश के इनपुट, ग्रह मंत्रालय को भेजी रिपोर्ट

Updated: IST Train Derail
पिछले दिनों भोपाल में सिमी आंतकियों को मुठभेड़ में मार गिराया गया था। इसके बाद यह संगठन अंदरखाने देश में बड़ी साजिश का प्लॉन बना रहा था।

विनोद निगम.
कानपुर. पिछले दिनों भोपाल में सिमी आंतकियों को मुठभेड़ में मार गिराया गया था। इसके बाद यह संगठन अंदरखाने देश में बड़ी साजिश का प्लॉन बना रहा था। एनकाउंटर के बाद से कानपुर के आस-पास कई ट्रेन हादसे हुए। इनमें जान माल का भारी नुकसान हुआ। हादसों की जांच के लिए केंद्र सरकार ने सीबीआई को लगाया | सीबीआई की पांच सदस्यीय टीम कानपुर में डेरा जमाए हुए है। जिसने हादसा स्थल पर जाकर पड़ताल की तो उन्हें बड़ी कामयाबी हाथ लगी है | मंधना में जिस तरह से ट्रैक को काटा गया इससे सीबीआई भी सिमी संगठन की तरफ से वारदात को अंजाम देने की साजिश मान कर जांच कर रहे हैं| अब सीबीआई की जांच भी इन्ही बिन्दुओं पर केन्द्रित हो गई है|
भोपाल में 31 अक्टूबर को आठ आतंकी एनकाउंटर में मारे गये। इसके बाद से करीब दो माह के अंदर कानपुर जनपद के 40 किलोमीटर के रेंज पर पुखरायां व रूरा में बड़े रेल हादसे हो गये और कई बार तो टूटी पटरियों से ट्रेनें गुजर गई। लखनऊ में दो जनवरी को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की रैली के पहले 31 दिसम्बर को मंधना के पास पटरी को काट दिया गया और पैंड्रॉल क्लिप खोलकर ट्रेन पलटाने की साजिश की गई | सभी की जांच रेलवे अधिकारियों ने की पर किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंच पाये। जिसके बाद सीबीआई को जांच सौंप दी गई | सीबीआई की टीम दो दिनों से शहर पर डेरा जमाए हुए है। रेलवे कर्मचारियों से लेकर ग्रामीणों से टीम पूछताछ कर रही है, लेकिन कुछ खास सबूत मिलने से अभी भी वह दूर है। सूत्रों की माने तो सीबीआई टीम अब इन हादसों की जांच को सिमी आतंकी की साजिश मान रही है और उन्हीं बिन्दुओं पर ध्यान केन्द्रित कर दिया है। बताया जा रहा है कि टीम 15 से 20 वर्ष पूर्व शहर में मौजूद रहे सिमी के सदस्यों की कुंडली खंगालना शुरू कर दिया है। इसके लिए पुलिस अधिकारियों से इनपुट भी ले रही है।

केन्द्रीय खुफिया ने किया था आगाज

सूत्रों की माने तो भोपाल एनकाउंटर के बाद केन्द्रीय खुफिया ने उत्तर प्रदेश शासन को आगाज किया था कि 80 सिमी के आतंकी उत्तर प्रदेश में सक्रिय है। वह कभी भी बड़ी घटनाओं को अंजाम दे सकते हैं। यह भी बताया गया कि अलीगढ़, मुरादाबाद के साथ कानपुर में यह लोग शरण ले सकते हैं। बताते चलें कि 2001 में कानपुर में सांप्रदायिक दंगा हुआ था जिसमें एडीएम शहीद हो गये थे। जिसकी जांच में सिमी का हाथ पाया गया था।

भोपाल से लेकर उन्नाव तक

31 अक्टूबर को भोपाल में सिमी आतंकियों का एनकाउंटर हुआ। 19 नवम्बर को कानपुर देहात के पास पुखरायां में बड़ा रेल हादसा हुआ। जिसमें 150 यात्रियों की मौत हो गई। 28 दिसम्बर को कानपुर देहात के पास रूरा में बड़ा रेल हादसा हुआ पर गनीमत रही कि किसी की मौत नहीं हुई। 31 दिसम्बर को मंधना के पास पटरी को ही काट दिया गया और पटरी के नटबोल्ट खुले मिले। 12 जनवरी को उन्नाव में मालगाड़ी पटरी से उतर गई। यही नहीं लगभग आधा दर्जन से अधिक बार ट्रेने टूटी पटरियों से गुजर गईं। रूरा हादसे में आईआईटी ने तो दावा भी कर दिया है कि पटरी काटी गई है। कुछ भी हो इन सभी चीजों को देखा जाए तो सीबीआई का इशारा सिमी आतंकी की ओर होना लाजिमी है।

यूपी में हुआ था सिमी का जन्म

कट्टरपंथी छात्रों के संगठन सिमी का गठन 1977 में उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ में हुआ था। इसके संस्थापक प्रेसिडेंट मोहम्मद अहमदुल्ला सिद्दीकी अमेरिका की वेस्टर्न इलिनोइस यूनिवर्सिटी में जर्नलिज्म और पब्लिक रिलेशंस के प्रोफेसर रहे हैं। हालांकि सिद्दिकी का कहना है कि उनका सिमी से अब कोई लेना-देना नहीं है क्योंकि संगठन पर अब रेडिकल लोगों का कब्जा हो गया है।

यह था मकसद
सिमी का मकसद भारत में हावी हो रही पश्चिमी संस्कृति को खत्म कर इसे एक इस्लामिक राष्ट्र बनाना है. अमेरिका में 9/11 के हमले के बाद सिमी पर 2001 में पोटा के तहत पाबंदी लगा दी गई थी. हालांकि यूपीए की सरकार ने पोटा को खत्म कर दिया था लेकिन सिमी पर पाबंदी बरकरार है।

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