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आज के ही दिन गवास्कर ने मार्शनील के साथ लिए सात फेरे, कानपुर के दमाद बने

Updated: IST sunil
वह भारतीय क्रिकेट के माहिर खिलाड़ी थे, वेस्टइंडीज के तेज गेंदबाजों के सामने बिना हैलमेट के सामना करते थे।

कानपुर। वह भारतीय क्रिकेट के माहिर खिलाड़ी थे, वेस्टइंडीज के तेज गेंदबाजों के सामने बिना हैलमेट के सामना करते थे। उनको आउट करने के लिए टीमें एड़ी चोटी का जोर लगा देते पर वह अगर पिच पर जम जाते तो शतक बनाकर ही पवेलियन लौटते थे। सचिन के पहले सबसे ज्यादा रन और शतक उन्हीं के नाम दर्ज थे। मुम्बई में जन्म लिया, इंडिया क्रिकेट टीम के सितारे और कानपुर शहर के दमाद बने। हम बात कर रहे पूर्व इंडिया टीम के कप्तान व ओपनर बल्लेबाज सुनील गवास्कर की। गवास्कर 21 सितंबर को कानपुर पहुंचे, यहां उन्हें बीसीसीआई ने सम्मानित किया। कानपुर से गवास्कर का नाता दिल से है, क्योंकि यहीं की बेटी से उनका दिल मिला और फिर दोस्ती हुई। दोस्ती प्यार में बदली और वह दिन भी आ गया जब दोनों एक धागे में बंध गए। सुनील गवास्कर की शादी 23 सितंबर 1974 को लेदर इंड्रस्ट्रलिस्ट की बेटी मार्शनील मेहरोत्रा से हुई थी।

दिल्ली में नजरें मिली, सनी फिदा हो गए

सुनील गवास्कर की और मार्शनील की नजरें 1973 में मिली थीं। मार्शनील तब दिल्ली के लेडी श्रीराम कॉलेज में पढ़ रहीं थीं। दिल्ली में एक मैच देखने के लिए वह स्टेडियम गई हुई थीं। भोजन के दौरान गवास्कर स्टूडेन्ट्स गैलरी पर खड़े थे, तभी मार्शनील उनके पास पहुंच गईं और ऑटो ग्राफ मांगा। सनी ने उनको ऑटो ग्राफ दिया और उन पर फिदा हो गए। उन्होंने फटाफट मार्शनील के बारे में पता लगाया। सनी ने मार्शलीन के बारे में उन्हें कुछ बताए पूरी जानकारी कर ली। जब वे कानपुर टेस्ट मैच खेलने पहुंचे तो वहां पहुंचकर अपने दिल की बात कही। 23 सितंबर 1974 को सुनील ने मार्शनील से शादी कर ली।

बिना बताए मार्शनील के मोहल्ले भी गए

सनी के प्यार में इस कदर फिदा थे कि वह उनके बारे में जानकारी करने के लिए कई बार कानपुर आए और अपने मित्र अजय गुप्ता के घर में रुका करते थे। अजय ने बताया कि पहले सनी भाई और मार्शनील के बीच चल रहे प्यार के बारे में जानकारी नहीं थी। लेकिन सनी एक मैच खेलने के लिए शहर आए थे और उन्होंने मार्शलीन के परिवार को मैच देखने के लिए इनवाइट किया। मैच खत्म होने के बाद सनी ने सब के सामने अपने दिल की बात रख दी। मार्शलीन और उनके परिवार ने शादी के लिए रजामंदी दे दी और सनी कानपुर के दमाद बने।

रीड़ की हड्डी थे सुनील गवास्कर

सुनील गावस्कर भारत के पूर्व अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट खिलाड़ी और कप्तान हैं। उन्होंने अपने 16 वर्ष के क्रिकेट करियर मे 34 अन्तरराष्ट्रीय शतक लगाए। क्रिकेट इतिहास के महानतम सलामी बल्लेबाजों में से एक के रूप में पहचाने जाने वाले गावस्कर ने 125 टेस्ट मैचों में 10122 रन बनाये। उन्हें वर्ष 1971 के इंडियन क्रिकेट क्रिकेटर ऑफ़ द इयर सम्मान दिया और वर्ष 1980 में विस्डन क्रिकेटर ऑफ़ द इयर के लिए चुने गये। 2012 में गवास्कर को अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद ने उन्हें आईसीसी क्रिकेट हॉल ऑफ़ फेम के लिए चुना।

वेस्टइंडीज के खिलाफ खेला पहला टेस्ट

उन्होंने मार्च 1971 में वेस्टइंडीज़ के विरुद्ध टेस्ट क्रिकेट में पदार्पण किया। गावस्कर ने अपना प्रथम शतक उसी शृंखला के तीसरे मैच में बनाया। क्वींस पार्क ओवल में अन्तिम मैच में उन्होंने दोनों पारियों मंय 124 और 220 रन बनाते हुए शतक लगाये। ऐसा असाधारण कार्य करने वाले वो द्वितीय भारतीय खिलाड़ी बने। दिसम्बर 1978 में वेस्टइंडीज़ के खिलाफ मैच की पारियों में 107 और नाबाद 182 रन बनाकर वो टेस्ट क्रिकेट की दोनो पारियों में तीन बार शतक बनाने वाले प्रथम खिलाड़ी बने। गावस्कर ने 1974 में अपना पहला एक दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय पदार्पण इंग्लैण्ड के विरुद्ध हेडिंग्ले स्टेडियम में खेला था।

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