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कोविंद के प्रेसीडेंट कैंडीडेट की घोषणा के बाद कानपुर में जश्न का माहौल

Updated: IST ramnath
भारतीय जनता पार्टी के दलित नेता वा बिहार के राज्यापाल रामनाथ कोविंद को राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार बनाये जाने से कानपुर में जश्न का माहौल है।

कानपुर। भारतीय जनता पार्टी के दलित नेता वा बिहार के राज्यापाल रामनाथ कोविंद को राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार बनाये जाने से कानपुर में जश्न का माहौल है। मंगलवार को वाल्मीकि समाज के लोगों ने आतिशबाजी और डांस करके अपनी ख़ुशी जाहिर की। इस अवसर पर बाल्मीकि एकता सेवा समिति के अध्यक्ष सुनील वाल्मीकिने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दलित को देश के प्रथम नगारिक के पद पर बैठाने का जो निर्णय लिया है वह सराहनीय है। कोविंद जी के राष्ट्रपति चुने जाने के बाद दलितों का उत्थान होगा। सुनील ने बताया कि उनके पिता जी और कोविंद एक साथ बीएनएसडी शिक्षा निकेतन में पढ़े। वो शिक्षा के दौरान दलित, गरीब और पिछड़ों के विकास की किया करते थे। गांव में बारातशाला नहीं होने के चलते उन्होंने अपना पैतृक निवास को दान कर दिया। कानपुर के लोग कोविंद जी को दूसरे बाबा साहब अंबेडकर मानते हैं।

दूसरे बाबा साहब अंबेडकर

कानपुर के रहने वाले बिहार के राज्यापाल रामनाथ कोविंद को एनडीए ने राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार बनाया है। कानपुर में दलित समाज के लोगां को जैसे ही जानकारी हुयी की कोविंद जी राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार बनाये गए है तो हर्ष और ख़ुशी का माहौल हो गया। दलित समाज के लोगां ने इस ख़ुशी को चौगुना करते हुये आतिशबाजी की और ढोल नगाड़े पर जमकर डांस किया। दलित समाज का मानना है कि एक दलित को देश का प्रथम नागरिक बनने का मौक़ा एनडीए ने दिया है जिससे हम लोग खुश है । सुनील बाल्मीकि का कहना है की प्रधानमंत्री ने एक दलित को राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार बनाया है जिससे अब दलित का उत्पीड़न नहीं होगा बल्कि अब दलितों का उत्थान होगा। दलित समाज ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को इसके लिये बधाई दी।

16 किमी पैदल जाते थे स्कूल

कल्याणपुर निवासी व कोविंद जी के मित्र आशुतोष सिंह ने बताया कि जब भी वो कानपुर आते तो हमको मिलने के लिए बुलाते थे। आशुतोष बताते हैं कि कोविंद जी कक्षा छह से लेकर आठवीं की पढ़ाई खानपुर माध्यमिक स्कूल से की। खानपुर की दुरी इनके गांव से आठ किमी की है और हररोज कोविंद जी पैदल घर से जाते और वापस आते। आशुतोष ने बताया कि कक्षा दस से लेकर स्नातक तक कोविंद जी प्रथम श्रेणी में पास हुए। बीएनएसडी में पढ़ने के दौरान इनका लगावा संघ से हो गया और ये जयनारायण स्कूल में अवकाश के दिन संध की शाखा में भाग लेते थे।

जुबां पर रटी है पूरी रामायण और गीता

आशुतोष के मुताबिक जब कोविंद जी कक्षा सातवीं में थे, तब पिता के कहने पर महज पंद्रह दिनों के अंदर पूरी रामायण और गीता पढ़ी और फिर मुंह जुबानी उन्हें सुनाई। आशुतोष बताते हैं कि वो जो सबजेक्ट एक बार पढ़ लेते थे, तो कभी भूलते नहीं थे। सुनील बाल्मीकि ने बताया कि पिछले पखवारे कोविंद जी कानपुर आए थे और कल्याणपुर अपने मित्र के घर पर गए थे। जहां पर उन्होंने दलित समाज के लोगों से कहा था कि अब बिना भेदभाव के देश के सभी धर्म, समाज के लोगों का विकास होगा। क्योंकि केंद्र में मोदी तो प्रदेश में योगी जी सरकार चला रहे हैं। सुनील बाल्मीकि ने कहा कि दलितों का पहले कांग्रेस ने अपना वोटबैंक समझा, फिर मायावती हमारी बोली लगाने गली। लेकिन अब सबका, साथ, सबका विकास होगा।

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