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Video Icon रामनाथ कोविंद की जीत के लिए कन्याओं ने रखा व्रत, ग्रामीणों ने किया यज्ञ

Updated: IST Ramnath Kovind
सावन का दूसरा सोमवार था। शिवालयों में बम-बम के जयकारे लग रहे थे, वहीं दूसरी तरफ रामनाथ कोविंद के नाम की गूंज से कानपुर सराबोर रहा।

विनोद निगम
कानपुर. सावन का दूसरा सोमवार था। शिवालयों में बम-बम के जयकारे लग रहे थे, वहीं दूसरी तरफ रामनाथ कोविंद के नाम की गूंज से कानपुर सराबोर रहा। उनके पैतृक निवास में भाई और भतीजों के साथ उनके मित्रों ने प्रेसीडेंट चुनाव फतेह करने के लिए हवन-पूजन के साथ यज्ञ का आयोजन किया। कन्याओं को भोज कराया गया तो वहीं शिव मंदिरों में उनके चाहने वालों ने मन्नत मांगी। इसके अलावा अपने शहर के बेटे के लिए मुस्लिम समुदाय के लोग भी बड़ी संख्या में मंस्जिद नमाज अता करने के बाद जीत के लिए दुआ मांगी।
ननिहाल में जीत के लिए उठे सैकड़ों हाथ
देश के 15वें राष्ट्रपति पद के लिए सोमवार को मतदान संपन्न हो गया। इस बार का चुनाव पिछले 14 चुनाव के मुकाबले कुछ खास था, क्योंकि 70 साल बाद शहर के रहने वाले रामनाथ कोविंद और कुछ साल तक यहीं पर रहकर शिक्षा ग्रहण करने वाली मीरा कुमार के बीच महामहिम के लिए सीधी भिड़न्त थी। इसी के चलते मतदान शुरू होने से पहले मंदिर, मस्जिद, गांव और मोहल्लों में लोगों ने कोविंद की जीत के लिए दुआ मांगी। हवन-पूजन का सिलसिला देर रात तक चलता रहा।

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घाटमपुर के कुरियां गांव निवासी कल्लू कोरी, जो कोविंद के रिश्तेदार हैं। उन्होंने पीपल के पेड़ के पास ग्रामीणों के साथ यज्ञ किया। इसमें पुरुष, महिलाएं और लड़कियों ने भाग लिया। कल्लू ने बताया कि चाचा जी लोकसभा चुनाव के दौरान कई दिन तक हमारे घर पर रुके थे और उन्होंने अपना कार्यालय भी यहीं पर खोला हुआ था। चाचा की जीत के बाद गांव से एक दर्जन ग्रामीण दिल्ली जाकर बधाई देंगे।
11 कन्याओं ने जीत के लिए रखा व्र
रामनाथ कोविंद की नातिन के साथ ग्यारह कन्याओं ने मिलकर उनकी जीत के लिए व्रत रखा और रामचरित मानस का पाठ किया। कोविंद की नातिन ने कहा कि बाबा जी जब भी घर आते हैं तब वो हमसे पढ़ाई-लिखाई पर चर्चा करते हैं। हम भी वकील बनना चाहते हैं। इसी के चलते बाबा से टिप्स भी लेते रहते हैं। वहीं गांव के अन्य लड़कियों ने कहा कि बाबा देश के प्रेसीडेंट बनने जा रहे हैं, इसके चलते हमारे गांव में एक डिग्री कॉलेज जरूर खुलेगा। हमें अब दूसरे गांव पढ़ने के लिए नहीं जाना पड़ेगा। कोविंद के बनवाए गए शिव मंदिर में स्थिति शिवलिंग को उनके मित्रों ने 50 लीटर दूध से नहलाया।

पथरी देवी के दर पर उमड़े भक्त
चुनाव को लेकर कोविंद के गांव ही नहीं पूरे क्षेत्र में जबरदस्त उत्साह है। सभी के मन में एक ही तमन्ना है कि अपने बीच का कोई व्यक्ति देश की सर्वोच्च कुर्सी पर बैठे। इसीलिए उनकी जीत के लिए कोई कोर कसर लोग नगीं छोड़ना चाहते। पैतृक गांव में घर-घर धार्मिक अनुष्ठान के साथ पथरी देवी पर इसलिए अखंड पाठ शुरू किया गया है, क्योंकि इस मंदिर पर लोगों की बहुत आस्था है। रामनाथ कोविंद के पिता पथरी देवी मंदिर में पूजा पाठ किया करते थे। खुद कोविंद गांव में रहने के दौरान पथरी देवी मंदिर में मत्था टेकना नहीं भूलते। गांव के लोग उन्हें देश के सर्वोच्च पद के करीब ले जाने तक पथरी देवी की ही कृपा मानते हैं।

संतों ने भी अपने भक्त के लिए मांगी मन्नत
प्रेसीडेंट पद के उम्मीदवार रामनाथ कोविंद की जीत के लिए संतों ने भगवान ने भी भगवान की पूजा-अर्चना की। आन्नदेश्वर मंदिर के पुजारी ने बताया कि सोमवार का दिन बहुत खास रहा, क्योंकि सावन का दूसरा सोमवार, भगवान शिव का त्यौहार था और शिव भक्त रामनाथ कोविंद की जीत पक्की करने के लिए मतदान हो रहा था। आज सुबह हम लोगों ने विशेष पूजा-अर्चना की और बाबा से रामनाथ को विजयी बनाने के लिए मन्नत मांगी। वहीं, पनकी मंदिर में भी रामनाथ कोविंद की जीत के लिए बजरंगबली की विधि-विधान से महंत ने पूजा की और कोविंद की जीत के लिए महाआरती की।

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