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चिमनी के सहारे पढ़ रहे आदिवासी परिवारों के बच्चे

Updated: IST bill
ढीमरखेड़ा के दशरमन आदिवासी मोहल्ले में 1 माह से अंधेरे में 100 से अधिक परिवार

कटनी/ढ़ीमरखेड़ा. गरीबी रेखा के नीचे जीवनयापन करने वाले परिवारों के घरों की रोशनी सरकार पहले ही कैरोसिन का कोटा घटाकर कम कर चुकी है वहीं अब बाकी कसर विद्युत वितरण कंपनी पूरी कर रही है। ढीमरखेड़ा तहसील के दशरमन गांव में आदिवासी परिवारों की मुश्किलें विद्युत वितरण कंपनी ने बिजली कनेक्शन काटकर बढ़ा दी है। आदिवासी परिवेश से बाहर निकल स्कूलों तक पहुंचे इन परिवारों के बच्चों के आगे पर पढ़ाई का संकट भी खड़ा हो गया है।

एक ओर जहां बच्चे बोर्ड सहित अन्य परीक्षाओं की तैयारियों में जुटे हुए हैं वहीं दूसरी ओर इन परिवारों के बच्चे चिमनियों की धीमी लौ के सहारे किताबों में शब्द तलाश रहे हैं। जानकारी के अनुसार दशरमन ग्राम में आदिवासी मोहल्ले में 100 परिवार निवास करते हैं। ग्रामीणों ने बताया कि जिस ट्रांसफार्मर से उनके घरों में लाइट पहुंच रही है वह कई दिनों से खराब पड़ा हुआ है वहीं बिजली बिल जमा न होने के कारण कंपनी द्वारा कनेक्शन काट दिया गया है। ग्रामीणों का आरोप है कि कंपनी द्वारा अधिक बिल भेजा गया था, जिसमें सुधार के लिए आवेदन भी दिया गया, लेकिन अबतक सुनवाई नहीं हुई है। कंपनी ने भी सुनवाई की बजाय कनेक्शन ही काट दिए।

ये है आदिवासियों की फरियाद

रहवासी मोहन कोल, इंद्रकुमार, लखन कोल, भीम कोल, दस्सी कोल, दुर्जन कोल, जीवन कोल, ईश्वरी कोल देवीदीन, सीताराम आदि ने बताया कि बच्चों की परीक्षा समीप होने के कारण सबसे अधिक उन्हें समस्या हो रही है। कंपनी द्वारा निर्धारित किया गया बिल वे वर्तमान में जमा करने में सक्षम नहीं है। बिल में सुधारकार्य यदि कंपनी नहीं कर रही है तो हमें गेहूं की फसल आने तक की मोहलत दी जाए, जिससे हम बिल चुका सके।

समस्या का निराकरण कराएंगे

विद्युत वितरण कंपनी के अधीक्षण यंत्री एलपी खटीक का कहना है कि समाधान योजना के अंतर्गत बिल जमा करने का प्रावधान रखा गया था, इसके एकमुश्त बिल राशि में छूट दी जा रही थी, लेकिन बिल जमा नहीं करवाए गए। दशरमन में बिल अधिक राशि के भेजे जाने की जांच कराई जाएगी। ग्रामीणों की समस्या का निराकरण करने का प्रयास करेंगे।

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