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बजट नहीं तो थानों में सत्कार नहीं, जानिए कहां

Updated: IST thana
थानों में सत्कार के लिए विभाग से नहीं मिलती राशि, बजट न होने से योजना का सही तरीके से नहीं हो पाता संचालन

कटनी। थानों में आने वाले आंगतुकों का स्वागत करने विभाग की योजना बिना बजट के संचालित है। बजट न होने से थानों में सत्कार कक्षों का संचालन नहीं हो पा रहा है तो वहीं कई स्थानों पर कुर्सियां तक रख पाने मेंं अधिकारी सक्षम नहीं हैं और व्यवस्था बदहाल पड़ी है। लगभग छह वर्ष पूर्व पुलिस मुख्यालय से थानों में सत्कार कक्ष बनाए जाने की व्यवस्था करने के निर्देश दिए गए थे। जिसमें थानों आने वालों के बैठने के साथ पानी आदि की व्यवस्था करने के निर्देश थे। व्यवस्था को संचालित करने के लिए किसी भी प्रकार का बजट निर्धारित नहीं किया गया, जिसके चलते थानों में बोर्ड लगाकर सत्कार कक्ष बना दिए गए लेकिन योजना बोर्ड तक ही सीमित है।
योजना के शुरू होने के समय से थानों में बजट की समस्याएं आई थीं। थानों, चौकियों में कक्ष बनाने व कुर्सियों की व्यवस्था भी मौजूद व्यवस्थाओं के आधार पर ही अधिकारियों को कराई पड़ी थी। पेयजल व्यवस्था आदि के लिए भी यहां पर कोई बजट नहीं है और ऐेसे में शुद्ध पानी भी उपलब्ध करा पाना पुलिस को अपनी जेब से ही करना होता है। ग्रामीण थानों में सत्कार कक्ष बदहाल हो गए हैं तो व्यवस्था बोर्ड तक ही सीमित है तो शहरी क्षेत्रों की स्थिति भी ऐसी ही है।

आज भी साइकिल का भत्ता
वर्तमान समय में जहां अपराधी हाईटेक हो गए हैं तो उन तक पहुंचने के लिए पुलिस को पेट्रोल की जगह साइकिल का ही भत्ता मिल रहा है। विभाग से साइकिल से आना-जाना निर्धारित है और वेतन के साथ मासिक रूप से लगभग 50 रुपए की राशि साइकिल के मेंटीनेंस के लिए पुलिसकर्मियों को मिलती है। ऐसे में अधिकांश पुलिस कर्मी ड्यूटी के दौरान बाइकों से दौडऩे के लिए अपने जेब का पैसा ही खर्च करते हैं।

स्टेशनरी के बजट में ही सुधार
थानों को मिलने वाले बजट में से अभी तक स्टेशनरी के लिए मिलने वाली राशि में ही सुधार हुआ है। पूर्व में प्रति थाना एक माह में 2000 हजार रुपए की राशि निर्धारित थी। ऐसे में जिन थानों में अपराध संख्या कम थीं, उन्हें परेशानी नहीं होती थी लेकिन बड़े थानों में दो हजार की स्टेशनरी एक सप्ताह में ही खफ जाती है। वर्तमान में सारे थानों में ऑनलाइन अपराध दर्ज करने की प्रक्रिया प्रारंभ की गई है, जिसमें पेपरलेस वर्क न होकर पीडि़त रिपोर्ट की कापी देने के साथ थाना में भी उसे रखना होता है, जिसमें राशि कम पड़ती थी। इसकी समीक्षा होने के साथ ही अब थानों में अपराधों की संख्या के हिसाब से स्टेशनरी निर्धारित कर दी गई है। जिससे कुछ हद तक अधिकारियों का राहत मिली है।

बजट की लगातार समीक्षा
विभाग की ओर से मिलने वाले बजट की लगातार समीक्षा हो रही है और उसमें समय-समय पर बढ़ोत्तरी की जा रही है। बैठकों में जिन क्षेत्रों में बजट बढ़ाने की जरूरत है, उसे वरिष्ठ अधिकारियों के संज्ञान में लाया जाता है।
गौरव तिवारी, पुलिस अधीक्षक

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