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गेहूं, दलहन पर जोर, तिलहन कमजोर 

Updated: IST bovni
रबी सीजन में 30 प्रतिशत ज्यादा क्षेत्र में बोनी की लक्ष्य, तिलहन आठ हजार हेक्टेयर तक सीमित

कटनी. खेती को लाभ का सौदा बनाने में रबी सीजन की फसल दलहन व तिलहन की भूमिका अहम होती है। जिले में इस वर्ष अच्छी बारिश से एक ओर कृषि विभाग को अच्छी बोनी की उम्मीद है। जिले के किसानों की गेहूं और दलहन में अधिक रुचि है और तिलहन की महत्वपूर्ण होने के बाद भी उसका प्रतिशत बहुत कम है।
पिछले वर्ष की तुलना में इस बार रबी सीजन का लक्ष्य 30 प्रतिशत बढ़ा है, जिसमें से अकेेले गेहूं का लक्ष्य पिछले साल की अपेक्षा 50 प्रतिशत अधिक तय किया गया है। चना का रकबा भी इस वर्ष बढ़ेगा लेकिन तिलहन की सबसे महत्वपूर्ण सरसों की ओर किसानों की रुचि कम है और इसके चलते मात्र 5 हजार 800 हेक्टेयर में ही जिले भर में बोनी तय की गई है।
तिलहन की ओर किसानों की कम रुचि होने का कारण मिट्टी की क्वालिटी को माना जाता है। काली मिट्टी के क्षेत्र में तिलहन को बोनी से उत्पादन अच्छा नहीं होता है, जिसके चलते जिले में रीठी व बड़वारा क्षेत्र में ही सरसों, अलसी बोने वाले किसानों की संख्या अधिक है। दूसरी ओर जिले को प्रमुख रूप से धान के लिए जाना जाता है। धान खेतों में लगी होने से उसकी कटाई बाद सरसों बोने से उसमें माहू के प्रकोप की संभावना बढ़ जाती है और इसके चलते उसका रकबा कम है।
पिछले वर्ष जिले में सरसों का रकबा 5 हजार 700 हेक्टेयर था, जिसमें इस वर्ष दो प्रतिशत की वृद्धि की उम्मीद करते हुए विभाग ने किसानों को प्रेरित करना प्रारंभ किया है जबकि अलसी 2 हजार 600 हेक्टेयर में बोने का लक्ष्य तय किया गया है, जो पिछले वर्ष की तुलना में आठ प्रतिशत अधिक है। अभी तक की स्थिति में जिले में दलहन की बोनी का कार्य प्रारंभ हो चुका है। उम्मीद है कि दीपावली पर्व के बाद रबी सीजन की बोनी का कार्य गति पकड़ेगा।
एक लाख 5 हजार हेक्टेयर में गेहूं
जिले में इस वर्ष 1200 मिमी. से अधिक बारिश हुई है, जिसके चलते जलाशय लबालब हैं। दूसरी ओर अक्टूबर माह तक हुई बारिश से गेहूं की बोनी का लक्ष्य बढ़ाया गया है। पिछले वर्ष जिले में अल्प वर्षा के कारण 68 हजार हेक्टेयर में गेहूं बोनी तय की गई थी, इसमें इस वर्ष 53 प्रतिशत की वृद्धि की गई है। जिसके चलते इस वर्ष 1 लाख 5 हजार हेक्टेयर में बोनी की जाएगी। इसी तरह चना 46 हजार 800 हेक्टेयर में लगाने का लक्ष्य विभाग ने रखा है, जो पिछले वर्ष की तुलना में 7 प्रतिशत अधिक है। मसूर 12 हजार 500 हेक्टेयर में और मटर 4 हजार 200 हेक्टेयर में लगाया जाएगा। उपसंचालक कृषि एपी सुमन ने बताया कि जिले में तिलहन फसल के अनुरुप मिट्टी नहीं है, जिसके चलते किसान इसमें कम रुचि दिखाते हैं। दूसरी ओर धान के कारण खेत देर से खाली होते हैं और देर से सरसों आदि बोने से माहू रोग लगने का खतरा बढ़ जाता है। इस वर्ष लक्ष्य बढ़ाया गया है और प्रयास किया जा रहा है कि किसान तिलहन फसल की ओर भी प्रेरित हों।

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