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बैंकों में नहीं पहुंचा रुपया, नाराज लोगों ने किया प्रदर्शन 

Updated: IST  protest
नोटबंदी के बाद अब छोटे नोट के लिए मारामारी

कौशांबी. नोटबंदी के बाद से बैंकों के सामने लगी लाई कम होने का नाम नहीं ले रही है। लोग अपने दूसरे जरूरी कामों को छोड़ सुबह से ही बैंकों व एटीएम के बाहर लाइन लगा कर खड़े हो जाते हैं। बैंकों के बाहर लाइन मे लगे लोगों की मेहनत पर उस समय पानी फिर जाता है जब बैंक खुलने के बाद उन्हे बताया जाता है कि कैश ही नहीं है तो फिर बांटे कैसे। बैंकों मे रुपये न होने से नाराज कई जगहों पर लोगों ने हंगामा भी किया। कई जगहों पर सड़क जाम तक की नौबत आई। मंगलवार को नेवादा, कल्याणपुर बैंक आग बड़ौदा की शाखा मे रुपये न मिलने से नाराज लोगों ने सड़क जाम किया था, बुधवार को भी जिले के कई बैंकों की शाखाओं मे रुपये न होने से उपभोकताओं मे नाराजगी दिखाई दी।

देवीगंज स्थित बड़ौदा उत्तर प्रदेश ग्रामीण बैंक के बाहर सुबह छह बजे से लाइन मे लगे लोगों को दस बजे बैंक खुलने पर पता चला कि रुपये नहीं है तो उनके सब्र का बांध टूट पड़़ा, नाराज लोगों ने बैंक कर्मियों को जमकर लताड़ लगाई। लोगों को आपे से बाहर होता देख बैंक के कर्मचारी बैंक मे ताला लगा गायब हो गए, बीस दिन से अधिक का समय हो गया है लेकिन बैंकों मे न तो उपभोक्ताओं को समय पर रुपया मिल रहा है और न ही बाइकों के बाहर लगी लोगों की लाइने कम हो रही है।

नोटबंदी के बाद अब छोटे नोट के लिए मारामारी
आठ नवंबर को पांच सौ व एक हजार के नोट बंदी की घोषणा के बाद से बाज़ारों मे सौ व पचास के नोटों की जबरदस्त मारामारी मच गई। हालत यह हुई कि हर कोई पचास व सौ के नोटों के लिए परेशान हो उठा। नोटबंदी के फैसले के बाद शुरुआती दिनों मे तो छोटे नोट खूब दिखाई दिये लेकिन एकाएक ये नोट बाजार से गायब से हो गए हैं। बैंकों व एटीएम से दो हजार के नोट मिल रहे है, जिसने खुल्ले के लिए हर कोई परेशान दिखाई दे रहा है। सौ दो सौ रुपए के समान लेने के बाद ज़्यादातर लोग दो हजार का नोट दुकानदार को पकड़ा देते हैं। कई जगहों पर तो दो हजार के नोट को लेकर छोटे दुकानदार व ग्राहकों के बीच बहस भी हुई हैं। ग्राहकों का कहना है कि सरकार ने दो हजार का नोट चलाया है तो फिर दुकानदार लेने से क्यों मना करते हैंं।

वहीं छोटे दुकानदारों का तर्क है कि दो-चार ग्राहकों को दो हजार का फटकार देने के बाद उनके हाथ से छोटे नोट निकाल जाते हैं जिसके बाद उन्हे ख़ासी परेशानी होती है। बाजार से सौ व पचास के नोट एकाएक गायब होने के बाद अब लोगों ने यह भी कहना शुरू कर दिया है कि बड़े बड़े पूंजीपतियों व बड़े व्यवसाइयों ने सौ व पचास के नोटों को दाब लिया है और बड़े नोटों को किसी न किसी तरह बैंकों मे जमा करा दिया है। फिलहाल जिस तरह से सौ व पचास के नोट बाज़ारों से गायब है उससे लोगों के दिमाग मे चल रहा सवाल आशंकाओं को बल देता है।

जिले मे आए हैं 330 करोड़ के छोटे नोट
एलडीम दिनेश कुमार की माने तो नोटबंदी के बाद से बैंकों ने जिले के लोगों को 25 नवंबर तक 350 करोड़ रुपये बांटें हैं। इसमें से 330 करोड़ रुपए सौ, पचास, बीस व दस के नोट रहे हैं। दो हजार के महज बीस करोड़ रुपये ही लोगों के बीच बांटे गए हैं, इतना सब होने के बाद बाजार मे फुटकर रुपयों की जबरजस्त किल्लत बनी हुई है।

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