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आखिर क्यों? दे गया बेटी का दिल दगा, लेफ्ट की जगह राईट में धड़क रहा

Updated: IST But why? Daughter
- डेस्ट्रोकार्डिया बीमारी से पीडित है 12वीं की छात्रा, सांसे फूली तो परिजन को 16 साल बाद पता चला

संजय दुबे खंडवा. 'ख्वाब इतने तो दगाबाज न थे मेरे कभी, ख्वाब इतनी तो मेरी नींद नहीं चाहते थे। यूं तो हर मोड़ पर मिले कुछ दगाबाज, लेकिन दूसरों से क्या उम्मीद रखे हम जनाब, जब खुद के दिल ने ही हमसे दगाबाजी कर लीÓ

इसी पीड़ा के साथ छह महीने से खंडवा के सेलटेक्स कॉलोनी की 16 साल की बेटी सोनाली पाचोरे की नींद उड़ी हुई है। क्योंकि उसके सीने में धड़कने वाला दिल लेफ्ट की जगह राईट में धड़क रहा है। इतना ही नहीं उल्टे हिस्से में दिल के साथ उसमें छेद भी है। परिवार सहित सोनाली को इसकी जानकारी छह महीने पहले ही लगी। स्कूल आने-जाने और घर के कामकाज में थकान व सांसे फूली तो डॉक्टर से चेकअप में यह चौकाने वाला खुलासा हुआ। इलाज को लेकर माता-पिता चिंता में डूबे है। सरकर के निमयों में इस बीमारी के डेढ़ लाख रुपए निर्धारित है। जबकि खर्च ढाई लाख से ज्यादा आ रहा है।

खर्च ढाई लाख, स्वीकृत हुए डेढ़ लाख

पिता रविंद्र ने बताया छोटी बेटी है सोनाली 12वीं में पढ़ती है। बड़ी बेटी रीना बीएससी थर्ड ईयर और बेटा कपिल फस्ट ईयर में है। जैसे-तैसे सब्जी बेचकर परिवार चला रहा हूं। जब से इस बीमारी का पता चला है रातों की नींद उड़ गई है। कलेक्टर-सीएमएचओ ने राज्य बीमारी में डेढ़ लाख रुपए स्वीकृत किए हैं लेकिन इंदौर में भंडारी अस्पताल में ढाई लाख खर्च आएगा। एेसे में बाकी पैसे का इंतजाम नहीं है।

मंत्री-विधायक ने नहीं दी तवज्जो

इंदौर के भंडारी अस्पताल में ऑपरेशन होना है इसमें 75 से 80 हजार रुपए और लगना है। एेसे हालात में मेंने सबकुछ बेचकर कुछ पैसे जुटाए है। लेकिन 50 हजार की जरुरत है। इसके लिए मेंने स्कूल शिक्षा मंत्री विजय शाह और विधायक देवेंद्र वर्मा से गुहार लगाई। किसी ने तवज्जों नहीं दी, विधायक ने सहायता के नाम पर अनुशंसा का पत्र थमा दिया।

शरीर में सबकुछ उल्टे साईड से

- सोनाली का दिल विपरित दिशा में है।

- भोजन की थैली भी राईट साईड में है।

- लीवर भी लेफ्ट की जगह राईट में है।

- स्प्रींग यानी हार्ट से ब्लड नली भी पीछे से है।

- सोनाली सारे काम लेफ्ट हैंड से करती है।

खंडवा का यह पहला केस

- डेस्ट्रोकार्डिया रेयर ककेस है यह लाख मरीजों में एक में मिलती है। ऑपरेशन के बाद कामकाज में कोई फर्क नहीं पड़ता है। खंडवा में मेंने यह पहला केस देखा है। - डॉ. संतोष श्रीवास्तव, हार्ट स्पेशलिस्ट जिला अस्पताल खंडवा

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