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बिल जमा किया फिर कनेक्शन क्यों काटा, तीन हजार रुपए हर्जाना भरो

Updated: IST high court
बिजली बिल जमा करने के बाद भी कंपनी ने उपभोक्ता का विद्युत कनेक्शन काट दिया। मामले में सोमवार को जिला उपभोक्ता फोरम ने सुनवाई करते हुए बिजली कंपनी पर तीन हजार रुपए का जुर्माना लगाया है।

खंडवा. मध्यप्रदेश के खंडवा जिले में बिजली बिल जमा करने के बाद भी कंपनी ने उपभोक्ता का विद्युत कनेक्शन काट दिया। मामले में सोमवार को जिला उपभोक्ता फोरम ने सुनवाई करते हुए बिजली कंपनी पर तीन हजार रुपए का जुर्माना लगाया है। परिवादी महेंद्र पिता मिश्रीलाल विश्वकर्मा निवासी ग्राम मोहना (पुनासा) ने कार्यपालन यंत्री और कनिष्ठ अभियंता मप्र पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी अट्टू खास के खिलाफ जिला उपभोक्ता फोरम में परिवाद पेश किया था। परिवाद में बताया कंपनी ने नियमित बिल जमा करने के बाद भी कनेक्शन काट दिया। इससे व्यवसाय में नुकसान हुआ है। महेंद्र ने कहा मैं कृषि यंत्र बनाने का काम करता हूं।

व्यावसायिक कनेक्शन लेकर रखा था। बिल नियमित भुगतान कर रहा था। बावजूद इसके कंपनी कर्मचारियों ने 1 मार्च 2017 को कनेक्शन काट दिया। परेशान होकर फोरम मैंने परिवाद पेश किया। इसी प्रकरण में सुनवाई करते हुए सोमवार को फोरम अध्यक्ष इंद्रा सिंह, सदस्य माया राठौर, अंजली जैन ने बिजली कंपनी को आदेश देते हुए कहा परिवादी का विद्युत कनेक्शन तुरंत जोड़ा जाए। भविष्य में इस मामले को लेकर परिवादी का कनेक्शन नहीं काटा जाना चाहिए। कनेक्शन कटने से परिवादी को हुए मानसिक संत्रास के रूप में दो हजार रुपए और परिवाद व्यय के एक हजार रुपए का भुगतान एक माह में करें।

इधर, दूसरे मामले में एवरेज रीडिंग लेकर बिल थमाकर उपभोक्ता की सेवा में कमी करने पर फोरम ने बिजली कंपनी पर जुर्माना लगाया है। परिवादी गंगोत्री पति रामवीरसिंह तोमर निवासी शिवपुरम कॉलोनी ने मप्र पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी आनंद नगर के खिलाफ परिवाद पेश किया था। परिवादी ने कंपनी द्वारा अनुमानित रीडिंग का बिल देने और खपत से ज्यादा बिल आने पर कंपनी कार्यालय में शिकायत की। साथ ही मीटर बदलने के लिए आवेदन किया। 18 फरवरी 2016 को राशि जमा करके नया कनेक्शन लिया, लेकिन कम्प्यूटर में जानकारी अपलोड नहीं होने से मार्च तक के बिल जारी नहीं किए। नवंबर व दिसंबर 2016 में एवरेज यूनिट खपत के बिल जारी किए। कंपनी ने अनुमानित रीडिंग 5508 यूनिट खपत का बिल दिया। जबकि इतनी खपत नहीं है। कंपनी से परेशान होकर फोरम में परिवाद लगाया। परिवाद पर सुनवाई करते हुए फोरम अध्यक्ष इंद्रा सिंह ने मीटर रीडिंग लेकर वास्तविक खपत पर बिल देने और परिवादनी को मानसिक संत्रास के रूप में दो हजार और परिवाद व्यय के एक हजार रुपए भुगतान करने के आदेश विद्युत कंपनी को दिए हैं।

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