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ये है बेरिस्टर मोहनदास करमचंद गांधी के महात्मा बनने की अनोखी कहानी

Updated: IST yugpurush mahatma ke mahatma
मोहनदास करमदास गांधी और महात्मा गांधी दोनों ही एक शख्सियत हैं और इनके बारे में सभी जानते हैं लेकिन बेरिस्टर मोहनदास कैसे महात्मा बने ये उसकी अनोखी और अनूठी कहानी है।

खंडवा. भारतीय इतिहास की एक अनकही कहानी को प्रस्तुत करता, अध्यात्म एवं संस्कृति को एक नया परिमाण बख्शता और मानवीय मूल्यों को उजागर करके सामाजिक उन्नति में महत्वपूर्ण योगदान प्रदान करता नाटक युगपुरुष - महात्मा के महात्मा का नाट्य मंचन गुरुवार को शहर के गौरीकुंज सभागार में रात 8 बजे से शुरू हुआ। महात्मा के महात्मा को देखकर दर्शक मंत्रमुग्ध हो गए।

इस नाटक में दो युगपुरुष रंगमंच पर पुन: जीवित होते नजर आए। ये दो युगपुरुष हैं- महात्मा गांधी और श्रीमद् राजचंद्र। महात्मा गांधी ने भारत तथा विश्व को सत्य और अहिंसा के सनातन सिद्धांत प्रदान किए हैं लेकिन बेरिस्टर मोहनदास में इन सिंद्धातों को प्रस्थापित करने वाले, उनके चरित्र का गढऩ करने वाले उनके आध्यात्मिक मार्गदर्शक थे राजचंद्र।

सत्य और अहिंसा के सनातन सिद्धांत बैरिस्टर मोहनदास में उनके आध्यात्मिक मार्गदर्शक राजचंद्र ने प्रदान किए।

मोहनदास को महात्मा में रूपातंरित करने वाली एक गहन आध्यात्मिक संबंध का यशोगाधा इस नाटक में सुंदर और कलात्मक तरीके से प्रस्तुत किया गया। सत्य और अहिंसा के मूल्य गांधीजी ने श्रीमद् राजचंद्र से ग्रहण किए। जिनका हृदयस्पर्शी निरूपण इस नाटक में हुआ। गौरीकुंज सभागार में बड़ी संख्या में दर्शक मौजूद रहे। बता दें कि राष्ट्रीय स्तर के तीन अवार्ड इस नाटक को प्राप्त हो चुके हैं।

नाटक में दो युगपुरुष रंगमंच पर पुन: जीवित होते नजर आए। ये दो युगपुरुष हैं- महात्मा गांधी और श्रीमद् राजचंद्र।

अभिनय की अप्रतिम अभिव्यक्ति

श्रीमद् राजचंद्र का यह 150वां जन्मजयंती वर्ष है। इसके निमित्त में हो रहे एक वर्षीय समारोह के तहत राजचंद्र मिशन धरमपुर के संस्थापक राकेशभाई की प्रेरणा से इस नाटक का निर्माण किया है। राजेश जोशी द्वारा दिग्दर्शित, उत्तम गड़ा लिखित तथा संगीतकार सचिन-जिगर की जोड़ी के संगीत से सजे युगपुरुष में उत्तम कथा, हृदयस्पर्शी दिग्दर्शन, संवाद, प्रेरक प्रसंग, रंगमंच की अनोखी सजावट, दृश्यों की मनमोहक रचना और कलाकारों के अभिनय की अप्रतिम अभिव्यक्ति हुई।

हृदयस्पर्शी ये दृश्य बापू को नाथूराम गोड़से द्वारा गोली मारने का है। दिग्दर्शन, संवाद, प्रेरक प्रसंग, रंगमंच की अनोखी सजावट, दृश्यों की मनमोहक रचना और कलाकारों के अभिनय की अप्रतिम अभिव्यक्ति नाट्य मंचन में हुई।

200 बेड का अस्पताल बनाएंगे

इस नाटक से जो भी धन एकत्रित हो रहा है उसका उपयोग दक्षिण गुजरात के आदिवासी क्षेत्र में 200 बेड के आधुनिक अस्पताल के निर्माण में होगा। जो कि दक्षिण गुजरात के आदिवासी और आदिजाति के आर्थिक रूप से पिछड़े हुए ग्रामजनों के लिए सेवा प्रदान करेगा।

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देश के प्रति प्रेम को दर्शाते हुए इस तरह के दृश्यों ने देखने वालों को मंत्रमुग्ध कर दिया।

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