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यदि आप आरओ वाटर पी रहे हैं तो सावधान!

Updated: IST If you are drinking RO water then be carefu
ठंडे पानी का धंधा, रोज पी रहे 1.5 लाख लीटर, कितनी शुद्धता पता ही नहीं, जिलेभर में 15 से अधिक आरओ सेंटर, केन में पिला रहे सादा पानी, खाद्य सुरक्षा अधिकारी बोले- सिर्फ पैकेज्ड ड्रिंकिंग वाटर की जांच का अधिकार, दबी जुबान में अब तो डॉक्टर्स भी बाहर से आने वाले आरओ पानी पीने के लिए मना करने लगे हैं। हालांकि घर में लगे आरओ फिल्टर में कोई आपत्ति नहीं है। इसलिए सावधान! आरओ वाटर का पूरी तरह तसल्ली करने के बाद ही उसे उपयोग करें।

खंडवा. पत्रिका. शहर सहित ग्रामीण क्षेत्र में ठंडे पानी का धंधा जोरों पर चल रहा है। गली-मोहल्लों में खुल गए आरओ प्लांट (रिवर्स ऑस्मोसिस वॉटर) से बड़े पैमाने पर केनों में भरकर पानी सप्लाय किया जा रहा है। अकेले शहर में ही दस से अधिक सेंटर्स से पानी बेच रहे हैं। शहर में रोजाना 1.5 लाख लीटर पानी हम पी रहे हैं, लेकिन ये पानी कितना शुद्ध है इसकी जानकारी किसी को नहीं है। सबसे बड़ी बात इतने बढ़े स्तर पर चल रहे आरओ वाटर के इस व्यवसाय के लिए जिले में कोई जांच अधिकारी ही नहीं है। इस बात का पता लगाना मुश्किल है कि सप्लायर्स जो हमें पानी सप्लाई कर रहे हैं उसकी शुद्धता की गारंटी क्या है। क्या वास्तव में ये पानी सभी पैमानों पर खरा है। दबी जुबान में अब तो डॉक्टर्स भी बाहर से आने वाले आरओ पानी पीने के लिए मना करने लगे हैं। हालांकि घर में लगे आरओ फिल्टर में कोई आपत्ति नहीं है। इसलिए सावधान! आरओ वाटर का पूरी तरह तसल्ली करने के बाद ही उसे उपयोग करें।

पत्रिका टीम ने ठंडे पानी के धंधे को गहराई तक खंगाला तो कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। जिस पानी को लोग शुद्धता के चक्कर में खरीद रहे हैं उसकी जांच आज तक नहीं हुई। शुद्धता व स्वच्छता के नमूने कभी लिए ही नहीं गए। न ही वॉटर प्लांट की जांच की गई। आरओ के नाम पर सादा पानी भी मिलाकर बडे़ पैमाने पर पिलाया जा रहा है। वहीं जिम्मेदार फूड सेफ्टी ऑफिसर का कहना है हमें सिर्फ पैकेज्ड वॉटर को सील्ड करने के पावर हैं लेकिन ये बॉटल बंद पानी को न तो चेक कर सकते हैं और न कोई कार्रवाई।

कई क्वालिटी में पानी उपलब्ध

निर्मल नीर संचालक राजेंद्र शाह के मुताबिक शहर में बिकने वाला पानी कई क्वालिटी में है। इसमें खर्च और उपलब्धता की मांग को लेकर पूर्ति करना पड़ रही है। हालांकि सादा पानी भी मिलाया जा रहा है। खैर जो भी हो हम सिर्फ वॉटर केन देखकर ही शुद्ध मानकर पानी पी रहे हैं। जबकि ये स्वास्थ्य के साथ बड़ा खिलवाड़ है।

लाखों का कारोबार, दोगुना हुई सप्लाय

शहर के इन चिलर पाइंट से रोजाना 7500 केन सप्लाई की जाती है। 20 लीटर क्षमता की केन बाजार में 30 रुपए में बेची जा रही है। इस मान से चिलर पाइंट पर 2 लाख 25 हजार रुपए का रोजाना कारोबार हो रहा है। महीने में यह कारोबार 67 लाख 50 हजार पर पहुंच जाता है। इसके अलावा शादी, सगाई, बर्थडे पार्टी में भी खप रही है।


ये है प्लांट की वार्र्किंग

- पानी में गंदगी और तलछट रेत को फि ल्टर करना।

- बारीक कार्बन, फि ल्टर पानी से क्लोरीन और नए ऑर्गेनिक्स गंध के जरिए गंदगी को कम करना।

- हानिकारक केमिकल को खत्म करना।

- खनिज को जरूरत के हिसाब से मेंटेन रखना।

ये होना जरूरी मिनरल वॉटर में

- फ्लोराइड 0.5 से 1.5 मिलीग्राम

- घुलनशील लवण 500 से 1500 मिग्रा

- नाइट्रेट 0 से 45 मिलीग्राम

- क्लोराइड 10 से 500 मिलीग्राम

- पीएचपीए 6.5 से 8.5 मिलीग्राम

(डब्ल्यूएचओ के तैयार किए गए मापदंड के अनुसार)

जांच होनी चाहिए

- आरओ वॉटर केन की जांच हमारे दायरे में नहीं आती है। हम पैक्ड बाटल की जांच कर सकते हैं। हालांकि इनकी जांच की जाना चाहिए, ये बढ़ता कारोबार है।
- केएस सोलंकी, फूड सेफ्टी ऑफिसर, खाद्य औषधि

फैक्ट फाइल

7500 केन की रोजापा खपत

150000 हजार लीटर रोजाना पानी पी रहे

2.25 लाख रुपए रोजाना कमाई

18 जिलेभर में आरओ प्लांट

10 आरओ प्लांट शहर में

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