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मां दुनिया से विदा, पिता जेल में, बेटी बनी चैम्पियन

Updated: IST Mother died Father in jail, daughter became champi
पहली बार में ही स्कूल टूर्नामेंट में मिला गोल्ड, स्टेट में मिला ब्रॉज मेडलभारतीय खेल प्राधिकरण ने ताराशा सात वर्षिय खिलाड़ी को

खंडवा. प्रतिभा किसी सुविधा की मोहताज नहीं होती। बस उसे मौका मिलना चाहिए। क्योंकि हुनरमंद व्यक्ति विपरीत परिस्थितियों में भी अपनी प्रतिभा विखेर देता है। हां यादि कोई तराशने वाला मिल जाए तब तो चार चांद लग जाते हैं और सफलता की गारंटी भी सौ फीसदी हो जाती है। जी हां हम बात कर रहे हैं खंडवा के चीरा खदान की सात वर्षिय ताईक्वांडो खिलाड़ी पायल की, जिसने पहली बार में ही स्कूल टूर्नामेंट में गोल्ड और स्टेट टूर्नामेंट में ब्रॉंज मेडल प्राप्त किया है। विशेष बात यह है कि पायल की मां अब इस दुनिया में नहीं रही जबकि पिता भी जेल में आजीवन कारावास की सजा काट रहे हैं। एेसे में पायल अन्य खिलाडि़यों के लिए प्रेरणा का श्रोत बन गई है।

पायल को नेशनल चैम्पियन बनाना है

भारतीय खेल प्राधिकरण के ताईक्वांडो कोच सोमेश्वर रॉव ने बताया कि छह माह पहले चीराखदान और निर्मलधाम में बच्चों को खिलाड़ी बनाने के लिए ताईक्वांडो सिखाना शुरू किया। इसमें सात साल की पायल का कम समय में ही बेहतर प्रदर्शन देखने को मिला, लेकिन पारिवारिक पृष्ठभूमि ठीक न होने के चलते आगे बढऩा मुश्किल था। इसलिए खुद के मेहनत और खर्च से पायल को सुविधाएं उपलब्ध करार्इं। जिसमें बेहरत प्रदर्शन करते हुए जबलपुर में आयोजित 30वीं सब जूनियर स्टेट ताइक्वांडो चैम्पियनशिप में ब्रॉज मेडल प्राप्त की। अब इसे नेशनल चैम्पियन बनाने के साथ साथ उसकी शिक्षा की भी व्यवस्था करनी है।

नाना नानी आश्रम में भेजने को हैं तैयार

एक टूटी झोपड़ी में अपना दिन काट रहे नाना कालू और नानी ममता बाई ने कहा कि पायल और उसके भाई की परवरिश करने में बहुत समसस्या आ रही है न तो कोई घर है और नहीं कोई आय का साधान, इसलिए इन बच्चों को पढ़ाना तो दूर पेट भरना भी मुश्किल है, अगर किसी योजना के तहत इन बच्चों को अनाथ आश्रम में रखा दिया जाए, तो शिक्षा के साथ साथ इनकी परवरिश भी ठीक ढंग से हो सकेगी। इस बेहतर प्रदर्शन में पायल के अलावा उनके कोच का अहम योगदान है।

पायल के शिक्षा की करेंगे व्यवस्था

पहली बार में बेहतर प्रदर्शन पर पायल के उज्जवल भवष्यि की कामना करता हूं। अभी वह शिक्षा के अधिकार से वंचित है, इसलिए उनके शिक्षा की जल्द से जल्द व्यवस्था कराने के लिए तैयारी करता हूं।

गोपाल खांडेल, एएसपी और प्रभारी जिला खेल अधिकारी

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