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अनोखा है ये शिवजी का धाम, इनकी आरती आज तक कोई नहीं देख पाया

Updated: IST omkareshwar
ओंकारेश्वर और ममलेश्वर शिवलिंग की गणना एक ही ज्योतिर्लिंग में की गई है। इसलिए कहा जाता है कि जो ओंकारेश्वर शिवलिंग के दर्शन करेगा उसे ममलेश्वर के भी दर्शन करने पर ही पूरा पुण्य प्राप्त होता है।

खंडवा। ओंकारेश्वर और ममलेश्वर शिवलिंग की गणना एक ही ज्योतिर्लिंग में की गई है। इसलिए कहा जाता है कि जो ओंकारेश्वर शिवलिंग के दर्शन करेगा उसे ममलेश्वर के भी दर्शन करने पर ही पूरा पुण्य प्राप्त होता है। ओंकारेश्वर नर्मदा नदी के एक तट पर है, जबकि ममलेश्वर दक्षिणी तट पर है। श्रावण में इस तीर्थ पर आने का एक अलग ही महत्व है। यहां का कंकड़-कंकड़ शिवलिंग कहलाता है। नर्मदा के जल से भोलेनाथ का अभिषेक किया जाता है।

दुनिया में अनोखा है ये मंदिर, आरती के वक्त रहता है बंद
इस मंदिर में सदियों से चली आ रही परंपरा के मुताबिक यहां आरती के वक्त मंदिर में प्रवेश की अनुमति किसी को भी नहीं है। सिर्फ राजपुरोहित ही इस मंदिर में प्रवेश कर सकते हैं। इसके अलावा मंदिर प्रांगण में लगे कैमरे और माइक भी बंद कर दिए जाते हैं। सदियों से चली आ रही इस परंपरा के मुताबिक बताया जाता है कि आज तक ओंकारनाथ की आरती कोई नहीं देख पाया है। यहां आरती के बाद पट खुलते हैं और श्रद्धालुओं को प्रवेश मिलता है।

यह है आरती का समय
मंगला आरती प्रातः 4 से 4.30
मध्याह्न आरतीः दोपहर 12.20 से 1.15
शयन आरतीः 8.30 से 9.30

नर्मदा के बीच है मांधाता द्वीप
यह मंदिर नर्मदा नदी में मांधाता द्वीप पर स्थित एक मनोरम स्थान पर है। ऐसी मान्यता है कि ओंकारेश्वर में स्थापित लिंग स्वयं-भू अर्थात प्राकृतिक रूप से तैयार शिवलिंग है। मंदिर में ओंकार शिव लिंग के साथ ही पार्वती जी व गणेश की मूर्तियां हैं।शिवलिंग चारों ओर हमेशा जल से भरा रहता है। ओंकारेश्वर मंदिर पूर्वी निमाड़ (खंडवा) जिले में नर्मदा के दाहिने तट पर स्थित है जबकि बाएं तट पर ममलेश्वर है, जिसे कुछ लोग असली प्राचीन ज्योतिर्लिंग भी कहते हैं।

चौपड़ पासे खेलते हैं शिव-पार्वती
इसके बारे में कहा जाता है कि रात को शंकर, पार्वती व अन्य देवता यहां चौपड-पासे खेलने आते हैं। इसे अपनी आंखों से देखने के लिए स्वतन्त्रता के पहले भगवान शिव व पार्वती को देखने के लिए अंग्रेज यहां छुप गया था, लेकिन सुबह को वो यहां पर मरा हुआ मिला था। यह भी कहा जाता है कि शिवलिंग के नीचे हर समय नर्मदा का जल बहता है।


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ओंकार पर्वत

यह भी है खास मंदिर
अगर आप ओंकारेश्वर जा रहे हैं तो आपको अंधकेश्वर, झुमेश्वर, नवग्रहेश्वर नाम से भी बहुत से शिवलिंगों के दर्शनों का अवसर मिलेगा। यहां अविमुक्तेश्वर, महात्मा दरियाईनाथ की गद्दी, बटुकभैरव, मंगलेश्वर, नागचंद्रेश्वर, दत्तात्रेय व काले-गोरे भैरव भी प्रमुख दर्शन स्थल हैं।

ऐसे पहुंच सकते हैं यहां
इंदौर का देवी अहिल्या इंटरनेशनल एयरपोर्ट सबसे नजदीकी हवाई अड्डा है। जो ओंकारेश्वर से 77 किलोमीटर दूर है।यहां से आप बस या टैक्सी के जरिए मंदिर तक पहुंच सकते हैं। वैसे रेलवे के मुंबई रूट पर स्थित खंडवा जंक्शन से भी यहां पहुंचा जा सकता है। खंडवा से यह 80 किलोमीटर दूर है। यह मोरटक्का रेलवे स्टेशन से 12 किलोमीटर दूर है। यह स्टेशन इंदौर या खंडवा के बीच है, यहां मीटरगेज ट्रेन के जरिए पहुंचा जा सकता है।

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