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सातों कांग्रेस नेताओं को भेजा जेल

Updated: IST Khargone. Court station known as rally leader and
सभी आरोपी चालान पेश होने के बाद भी थाने पहुंच गए थे गिरफ्तारी देने

खरगोन. बदहाल स्वास्थ्य सेवाओं के विरोध में तीन माह पूर्व आंदोलन करने वाले मध्यप्रदेश युवा कांग्रेस के सचिव सचिन बिरला बुधवार को गिरफ्तारी देने थाने पहुंचे। दरअसल बुधवार को इस मामले में कोर्ट में पेशी थी वकीलों से बिना बात किए ही मामले को राजनीतिक रंग देने के लिए थाने पहुंच गए। यहां पहुंचकर उस समय रोचक स्थिति निर्मित हो गई जब टीआई बोले कि हम तो तुम्हें पहले ही गिरफ्तार कर चुके हैं। नेता जब गिरफ्तारी की जिद करने लगे तो टीआई ने कहा जरूरत पडऩे गिरफ्तार करेंगे। इसके बाद कांग्रेस कार्यकर्ता रैली के रूप में कोर्ट पहुंचे दिनभर गहमा-गहमी के बाद शाम को कोर्ट ने सभी जेल भेज दिया। इस मामले में सुनवाई के लिए 14 दिसंबर की तारीख दी है।

घेराव शब्द से खुद घिरे

कांग्रेस नेताओं के कोर्ट पहुंचने के बाद पूरा दिन यहां गहमा गहमी का माहौल रहा। हर कोई यह जानने को उत्सुक था कि आखिर कोर्ट क्या रुख अपनाती है। बचाव में नेताओं के वकील ने कोर्ट को बताया कि आंदोलन के पहले प्रशासन को इसकी लिखित सूचना दी थी। कोर्ट के मांगने पर वह प्रति कोर्ट में पेश की गई। इस आवेदन के अंत में लिखा था कि कांग्रेस कार्यकर्ता सीएचएमओ कार्यालय का घेराव भी करेंगे। इसी शब्द पर आपत्ति लेते हुए कोर्ट ने सभी को जेल भेजने के आदेश दिए।

आंदोलन की सीडी का अवलोकन

आंदोलन के दौरान कराई गई वीडियो की क्लिपिंग मुख्य न्यायायिक मजिस्टे्रट गंगाचरण दुबे ने करीब एक घंटे तक देखी। यह सीडी कोतवाली पुलिस ने कोर्ट को उपलब्ध कराई थी। सीडी देखकर ही स्पष्ट हो पाया कि कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने सीएचएमओ डॉ. गोविंद गुप्ता के साथ अभद्रता की है। पहले सीडी फिर घेराव शब्द सामने आने के बाद कोर्ट ने सभी आरोपियों को जेल भेजने के आदेश दिए। इस मामले में अगली सुनवाई 14 दिसंबर को तय है। आदेश के बाद पुलिस सभी आरोपियों को जिला जेल लेकर पहुंची।

आज ले सकते हैं जमानत

कांग्रेस नेताओं के वकील नीरज पाठक ने बताया कि कोर्ट ने सुनवाई के लिए 14 दिसंबर की तारीख दी है। जेल भेजने का अर्थ यह नहीं है कि उन्हें जमानत नहीं दी जाएगी। कांग्रेस नेता जमानत के लिए कभी भी आवेदन लगा सकते हैं। पाठक ने बताया सभी कांग्रेस नेताओं की जमानत के लिए गुरुवार को कोर्ट में आवेदन पेश करेंगे।

ऐसे चला पूरा ड्रामा

टहलते आए, नाश्ता किया फिर पहुंचे गिरफ्तारी देने

एक दिन पूर्व घोषणा के बाद बुधवार सुबह 11 बजे कांग्रेस कार्यकर्ता कोतवाली के बाहर इक_ा होना शुरू हो गए थे। जिन सात लोगों के विरुद्ध प्रकरण दर्ज होने थे वे यहां कार से पहुंचे और उनके साथ कई कार्यकर्ता भी थे। थाने के गेट पर ही खड़े होकर सभी ने नाश्ता किया जब कार्यकर्ताओं की भीड़ बढ़ गई तो सभी लोग टीआई के चेंबर में पहुंचे। यहां टीआई एमपी वर्मा ने कहा आप लोगों को यहां नहीं कोर्ट जाना चाहिए। इस पर सचिन बिर्ला बोले हम गिरफ्तारी देने आए हैं तब टीआई ने कहा आपकी गिरफ्तारी पहले ही हो चुकी है और हमने चालान भी पेश किया है। इसपर भी कांग्रेस नेता नहीं माने तो टीआई ने चुटकी लेते हुए कहा जब जरूरत पड़ेगी गिरफ्तार भी कर लेंगे।

कोर्ट पहुंचे तो वकील बोले सब को बाहर करो

कांग्रेस कार्यकर्ता काफी जोश खरोश के साथ रैली के रूप में कोर्ट पहुंचे। यहां 60 से अधिक लोगों की भीड़ देखकर वकीलों ने उन्हें परिसर के बाहर ही रोक लिया। सचिन बिर्ला से कहा कि यह कोर्ट यहां रैली और नारेबाजी नहीं चलेगी। कोर्ट में सिर्फ वही सात लोग जाएंगे जिनके नाम प्रकरण दर्ज हुए है। इसके बाद कार्यकर्ताओं को कलेक्टर कार्यालय परिसर में इंतजार के लिए भेज दिया गया।

ये था मामला

21 सितंबर को मध्यप्रदेश युवा कांग्रेस के सचिव सचिन बिरला के नेतृत्व में बदतर स्वास्थ्य सेवाओं के विरोध में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने प्रभावी आंदोलन किया था। इस आंदोलन के दौरान सीएचएमओ कार्यालय का घेराव किया गया था। कार्यालय में सीएचएमओ के मौजूद नहीं होने के बाद कार्यकर्ताओं ने हंगामा किया था। जब कार्यकर्ता आंदोलन कर लौट रहे थे तभी सीएमएचओ की कार वहां पहुंच गई। कांग्रेस कार्यकर्ताओं से घिरे सीएमएचओ के साथ धक्का मुक्की भी हुई थी। इसके बाद डॉक्टरों ने कोतवाली थाने जाकर सचिन बिरला सहित मोहन मंगतुजी भानबरड़, इंदरलाल बिरला बमनगांव, रामलाल हुकुमचंद खमलाय, सौभागचंद जयराम खनगांव, सुरेश शिवजी बेडिय़ा, रमेश रामसिंह तितरान्या पर प्रकरण दर्ज कराया था।

कोर्ट का मत

- सातों आरोपियों को जेल भेजने के बाद सीजेएम गंगाचरण दुबे ने कहा कि अपराध ऐसे कृत्य को कहते हैं जो विधि द्वारा वर्जित तो होता ही है नैतिक और संवैधानिक व्यवस्था के विरुद्ध भी होता है।

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