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डॉक्टर की खुली पोल, प्रसूता की जान को खतरा बताकर किया रेफर, फिर अपने-आप हो गया प्रसव

Updated: IST Doctors open pole, referred to as being in danger
मध्यप्रदेश के खरगोन जिले में एक बार फिर जिला अस्पताल की कमजोरी सामने आई है। अब जवाबदार मुंह छिपाते फिर रहे हैं। गनीमत है कि अस्पताल में असुरक्षित तरीके से प्रसव होने के बाद भी मां-बेटी स्वस्थ हैं। महिला पहले ही सेगांव से रेफर होकर आई थी। अस्पताल और डॉक्टर की लापरवाही के कारण परिजनों में आक्रोश है।

खरगोन.

सेगांव से रेफर होकर जिला अस्पताल आई एक महिला को यहां से कमजोर बताकर इंदौर रेफर कर दिया गया। प्रसूता की गंभीर स्थिति को देखते हुए परिजन इंदौर जाने की व्यवस्था कर पाते इससे पहले ही अस्पताल के ही प्रतिक्षा कक्ष में महिला ने एक बच्ची को जन्म दे दिया।

अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाडऩे का जिला अस्पताल में यह पहला मामला नहीं है। इससे पहले भी प्रसूताओं को ऐसी घटनाओं से रूबरू होना पड़ा है। जिला अस्पताल में व्याप्त अव्यवस्थाओं को लेकर पिछले दिनों हुए कांग्रेस के आंदोलन को डॉक्टरों ने अपनी एकता के बल पर नाकाम कर दिया था, लेकिन वे अस्पताल में व्याप्त अव्यवस्थाओं को दुरुस्त नहीं कर पाए।

जननी नहीं मिली सामने आई बदहाली

जानकारी के अनुसार सेगांव क्षेत्र के ग्राम बोदरपुरा निवासी झबरसिंह अपनी बेटी अन्नू पति अजय (19) को डिलीवरी के लिए जिला अस्पताल लाए थे। परिजनों के मुताबिक महिला को सुबह 9 बजे भर्ती कराया और उसके कुछ समय बात ही ड्यूटी डॉक्टर व नर्सों ने इंदौर रेफर करते हुए ले जाने का बोल दिया। लेकिन तब अस्पताल में जननी एक्सप्रेस की गाड़ी भी मौजूद नहीं थी। झबरसिंह ने बताया कि बेटी को इंदौर ले जाने के लिए उनके पास पैसे नहीं थे। इसलिए यही रुक गए और कुछ देर बार बेटी की डिलीवरी हो गई।

फैक्ट फाइल

-02 डिलीवरी हर माह हो रही ऑपरेशन थिएटर के बाहर।

-30 से 35 डिलीवरी होती है प्रतिदिन।

-800 से 900 के बीच प्रसव होते है हर माह।

-5 डॉक्टर और 15 ड्यूटी नर्स का स्टाफ है मेटरनिटी वार्ड में।

बचने का तरीका बना रेफर

जिला अस्पताल में मरीजों के साथ स्टाफ का सौतेले व्यवहार का आलम किसी से छुपा नहीं है। आएदिन स्टाफ की लापरवाही को लेकर कोई न कोई शिकायत सामने आ जाती है। मंगलवार को इसकी बानगी फिर देखने को मिली। गर्भवती महिला का उपचार करने के बजाए उसे रेफर कर अस्पताल से बाहर कर दिया। जिसके चलते महिला ने मेटरनिटी वार्ड से लगभग 20 मीटर की दूरी पर प्रतीक्षालय में एक बेटी को जन्म दिया।

दर्द से कहराती रही महिला

प्रसव पीड़ा के असहनीय दर्द से महिला कहराती रही। उसके साथ मां मुनीबाई थी। पिता उसके लिए नारियल पानी ले गए थे। इसी दौरान महिला ने प्रतीक्षालय की चार दिवारी के अंदर बेटी को जन्म दिया। विडंबना यह थी कि जिस समय महिला को प्रसव हो रहा था, उस वक्त उसे देखने के लिए न तो डॉक्टर आया और ना ही अस्पताल की नर्सें मदद के लिए पहुंची। प्रतीक्षालय में डिलीवरी के चलते फर्श पर जगह-जगह खून के धब्बे पड़े थे।

आनन-फानन में किया भर्ती

मेटरनिटी का स्टाफ पहले जिस महिला को इलाज करने से मना करता रहा, वह पोल खुलने के डर से इलाज को तैयार हुआ। जैसे ही नर्सों को पता चला कि महिला की डिलीवरी अस्पताल के बाहर हुई है, वैसे ही जच्चा और बच्चा दोनों को अस्पताल के अंदर लाया गया। फिर लेबर रूम में दोनों का स्वास्थ्य परीक्षण किया गया। बताया जाता है कि महिला की यह पहली डिलीवरी थी और उसके पेट में 8 महीने का गर्भ था।

लापरवाही की हदें पार

लापरवाही के मामले में मेटरनिटी वार्ड में स्टाफ ने सारी हदें पार कर दी है। अस्पताल के बाहर डिलीवरी का यह कोई पहला मौका नहीं है। मालूम हो कि 10 सितंबर को बरुड़ की एक महिला को इलाज से मना करते हुए स्टाफ ने इंदौर रेफर कर दिया था। तब महिला की डिलीवरी अस्पताल के बाहर हो गई थी। जिसे लेकर खूब बवाल मचा था।

एक महीने नहीं बदला गया ड्यूटी चार्ट

मेटरनिटी वार्डमें हर दर्जे की लापरवाही का आलम देखा जा सकता है। यहां ड्यूटी चार्ज भी एक महीने से नहीं बदला गया।21 जुलाई के बाद से चार्ट को नहीं बदला गया।इससे ड्यूटीरत डॉक्टर व स्टाफ की लापरवाही का अंदाजा लगाया जा सकता है।

ये बोले परिजन...

जान जा सकती थी

मेरी बेटी की तबीयत ज्यादा खराब थी। डॉक्टरों ने सभी जांचे कराने के बाद इंदौर कर दिया। हमारे पास पैसे नहीं थे। डिलीवरी रास्ते में भी हो सकती थी। तब किसी की जान चली जाती, तो उसके लिए कौन जिम्मेदार होता।

झबरसिंह, अन्नू के पिता

10 दिन बाद नार्मल डिलीवरी

संजय नगर निवासी तैय्यबा बी को 10 दिन पूर्व मरीज अस्पताल लाए थे। ड्यूटी डॉक्टर का कहना था कि बच्चे की हालत पेट में ठीक नहीं है ऑपरेशन करना पड़ेगा। मंगलवार को नार्मल डिलीवरी हो गई।

नुरुबानो, महिला की सास

ऑपरेशन करना पड़ेगा

मेरी नाती को ब्लड कम होने से अस्पताल में भर्ती कराया। 4 दिन से इलाज चल रहा है। आज स्टाफ का कहना था कि उसे दर्द का इंजेक्शन लगा देते है। डिलीवरी नहीं होगी, तो ऑपरेशन करना पड़ेगा।

रामबाई, निवासी करही

जानकारी मिली

ड्यूटी डॉक्टर से बात हुई है। महिला के शरीर में 6 ग्राम हिमोग्लोबीन बचा था।ऐसी स्थिति में सीजर करना पड़ता है। इसलिए उसे रेफर किया गया, लेकिन परिजन लेकर नहीं गए।

डॉ. गोविंद गुप्ता सीएमएचओ

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