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सीधे किसानों को मिलेगी अब फसल की कीमत

Updated: IST kolkata news
अब किसानों को फसल की कीमत सहकारिता अधिकारियों से लेने की जरूरत नहीं है। राज्य सरकार अब सीधे किसानों को फसल की कीमत उपलब्ध कराएगी। 72 घंटों में कृषकों को पैसा मिल जाएगा

कोलकाता. अब किसानों को फसल की कीमत सहकारिता अधिकारियों से लेने की जरूरत नहीं है। राज्य सरकार अब सीधे किसानों को फसल की कीमत उपलब्ध कराएगी। 72 घंटों में कृषकों को पैसा मिल जाएगा। इसके लिए राज्य में 330 सेंट्रल परचेसिंग सेंटर (सीटीएस) खोले जाएंगे। ये सेंटर दिसम्बर महीने की 10-18 तारीख के बीच खुलेंगे। साथ ही सरकार 100 दिन रोजगार योजना के तहत लोगों को धान काटने में इस्तेमाल करने की सोच रही है।

राज्य के खाद्य मंत्री ज्योतिप्रिय मल्लिक ने बताया कि राज्य में धान तैयार है। अब तक 46 फीसदी धान बाजार में आ जाना चाहिए था लेकिन अब तक सिर्फ 22 फीसदी आए है। प्रक्रिया में तेजी लाया गया है। उन्होंने बताया कि आगामी दस दिनों में प्रक्रिया तेज की जाएगी। इसे 55 फीसदी कर दिया जाएगा। अब कृषकों को सहकारिता अधिकारियों से खाद्य विभाग से सीधे मिलेगा। 72 घंटे के अंदर अब कृषकों को रुपया मिलेगा।

उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ने प्रस्ताव दिया था कि कृषकों को परेशानी नहीं होनी चाहिए। प्रत्येक जिले में बीडीओ ब्लॉक एक्सटेंशन अधिकारी रहेंगे। वे तीन चालान काटेंगे। एक चावल मिल को दिया जाएगा। दूसरा एक्सटेंशन अधिकारी के पास होगा, तीसरा राज्य खाद्य विभाग को दिया जाएगा। उसके आधार पर 72 दिन में कृषकों को भुगतान मिल जाएगा। उन्होंने आशंका जताई की कि राज्य सरकार तो कृषकों को पैसा दे देगा लेकिन नोटबंदी के कारण कृषक उन पैसों को नहीं उठा पाएंगे। बैंक उनको उतने पैसे नहीं दे पाएंगे। प्रति क्विंटल दाल की कीमत 1470 है।

सरकार कृषकों को 1490 रुपए देगा। पैसे बैंक में दिए जाएंगे। बैंक उन पैसों को दे पाने में असमर्थ होगा। उन्होंने कहा कि खाद्य विभाग को केंद्र से दो वित्तीय वर्ष के लिए 2481 करोड़ रुपए देने है। केंद्र सरकार से पैसा मिलने पर चावल मिलों के 1500 करोड़ बताया मिटाया जाएगा। उन्होंने बताया कि राज्य के पास वर्तमान में 4120 लाख मीट्रिक टन चावल है। इसमें से राज्य सरकार झारखंड को 6 लाख मीट्रिक टन चावल भेजेगा। काशीपुर रेललाइन की मदद से भेजी जाएगी। काशीपुर में खाद्य विभाग के 80 गोदाम है जिसका आधुनिकीकरण किया जा रहा है। 63 का काम हो गया है। बाकी का काम चल रहा है।

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