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बिना किसी सरकारी मदद के नक्सलगढ़ में चल रहा अनोखा स्कूल, पहली से आठवीं तक होती है पढ़ाई

Updated: IST  children scholarships
कोकोड़ी में सरकारी मदद के बिना स्थानीय बच्चों के लिए स्व-प्रेरणा से संचालित स्कूल का संचालन किया जा रहा है। मात्र दो बच्चों से शुरू उनके इस स्कूल में आज बच्चों की दर्ज संख्या 54 तक पहुंच गई है।

कोंडागांव. मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने राज्य के नक्सल पीडि़त आदिवासी बहुल इलाके के कोकोड़ी में सरकारी मदद के बिना स्थानीय बच्चों के लिए प्रयाग जोशी द्वारा स्व-प्रेरणा से संचालित' इमली महुआ स्कूल' की सराहना की है।

उन्होंने नक्सलवाद पीडि़त इलाके में आदिवासी बच्चों की शिक्षा के लिए स्कूल संचालक जोशी के हौसले की तारीफ की।

गौरतलब है कि पुणे के चार्टड एकाउंटेंट प्रयाग जोशी ने अपनी नौकरी छोड़कर इस इलाके में तमाम तरह की चुनौतियों के बीच बच्चों को विद्यादान करने का संकल्प लिया है।

जोशी ने बताया कि करीब दस साल पहले मात्र दो बच्चों से शुरू उनके इस स्कूल में आज बच्चों की दर्ज संख्या 54 तक पहुंच गई है। इनमें 34 बालिकाएं और 20 बालक हैं।

यहां पूर्व प्राथमिक और पहली से लेकर आठवीं तक पढ़ाई होती है। उन्होंने अपने बचत के पैसों से गांव में स्कूल शुरू किया। समय-समय पर उनके कुछ मित्रों से भी उन्हें इस विद्यालय के संचालन के लिए मदद मिल जाती है।

स्कूल का नाम इमली-महुआ रखने का कारण बताते हुए जोशी ने कहा कि इन दोनों वृक्षों से आदिवासी समाज का काफी गहरा और भावनात्मक लगाव होता है। इसलिए उन्होंने यह नाम रखा है।

जोशी के मुताबिक शुरुआती दिनों में यहां के बच्चे हिन्दी वर्णमाला भी बड़ी मुश्किल से समझ पाते थे, लेकिन आज ये न सिर्फ धारा प्रवाह हिन्दी बोलते, पढ़ते और लिखते हैं, बल्कि अंग्रेजी भाषा भी वे फर्राटेदार बोलते हैं।

स्कूल में होमी जहांगीर भाभा विज्ञान केन्द्र मुम्बई, एकलव्य संस्थान (होशंगाबाद), राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) की पुस्तकें पढ़ाई जा रही हैं। आठवीं की पढ़ाई पूरी करने के बाद दो बालिकाएं राष्ट्रीय मुक्त विद्यालय के पाठ्यक्रम में दसवीं की तैयारी कर रही हैं।

बच्चों को देते हैं छात्रवृत्ति

जोशी अपने स्कूल के बच्चों के लिए अपनी ओर से छात्रवृत्ति भी दे रहे हैं। उन्होंने इसके लिए डाक घर में बच्चों के नाम से लोक भविष्य निधि (पीपीएफ) खाता भी खुलवा दिया है। खातों का संचालन बच्चों की माताओं के नाम से किया जा रहा है। पहली कक्षा के बच्चों को एक हजार रूपए, दूसरी के बच्चों को दो हजार, तीसरी के बच्चों को तीन हजार और इसी क्रम में आठवीं के बच्चों को आठ हजार रूपए की वार्षिक छात्रवृत्ति दी जाती है।

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