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उज्जवला पर भारी पड़ रही कोयले से जलने वाली सिगड़ी, शहर को स्मोकलेस बनाने अब ब्लैकस्पॉट पर सीसीटीवी

Updated: IST Making the city Smokeless Now CCTV on Blackspot
शहर को स्मोकलैस बनाने के लिए उज्ज्वला के तहत गैस कनेक्शन दिए गए। लेकिन सिगडिय़ां अभी भी जल रही हैं।

कोरबा. शहर को स्मोकलैस बनाने के लिए उज्ज्वला के तहत गैस कनेक्शन दिए गए। लेकिन सिगडिय़ां अभी भी जल रही हैं। प्रशासन की समझाइश के बाद भी लोगों का सिगड़ी से मोहभंग नहीं हो पा रहा है। लिहाजा अब प्रशासन ने भी इसका तोड़ निकाल लिया है।

जिन भी जगहों से घरेलू उपयोग के लिए कोयला चोरी किया जाता है। ऐसी जगहों को ब्लैक स्पॉट के रूप में चिंहित कर वहां सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएंगे। प्रशासन इसकी तैयारी में जुट गया है।

पिछले एक साल से शहर को स्मोकलैस (धुंआ रहित शहर) बनाने के लिए प्रशासन ने अभियान शुरू किया है। अब तक तीन चरण बीत चुके हैं। पहले चरण में जागरूकता के लिए कैंपनिंग कराई गई।

शहर के हजारों लोग इसका संकल्प लेकर दौड़े। इसके बाद निगम अमले ने ऐसी बस्तियों के घर-घर जाकर सिगडिय़ों की पड़ताल की। पड़ताल में खुलासा हुआ कि जिनके पास उज्ज्वला गैस योजना के तहत कनेक्शन दिया गया है उनके द्वारा भी कोयला जलाया जा रहा है।

इसके बाद अधिकारियों ने इन बस्तियों में जाकर लोगों से बातचीत भी की। लेकिन उसके बाद भी लोग सिगडिय़ों से लगातार कोयला जला रहे हैं।

स्मोकलैस शहर का अभियान के आड़े घरेलू उपयोग के लिए हो रही कोयला चोरी है। बड़े पैमाने पर इस तरह से कोयले की चोरी है। लिहाजा प्रशासन ने अब इस चोरी पर नकेल कसने के लिए तैयारी शुरू कर दी गई है।

प्रशासन की एक टीम इसमें काम कर रही है। बताया जा रहा है कि अब तक आठ से दस जगहों को ब्लैक स्पॉट के रूप में चिंहित कर दिया गया है।

अभी कुछ और जगहों को तय करने का काम चल रहा है। इसके बाद इन जगहों पर सीसीटीवी कैमरे लगा दिए जाएंगे। जिससे चोरी पर नजर रखी जाएगी। चोरों पर कार्रवाई भी होगी।

प्रशासन को उम्मीद है कि इस तरह से कार्रवाई के बाद न तो कोयला चोरी होगा ना ही इसका उपयोग सिगडिय़ों के लिए होगा।

जान जोखिम में डालकर करते हैं चोरी- जान जोखिम में डालकर कोयले की चोरी की जा रही है। सबसे अधिक जहां-जहां से रेललाइन गुजरी है। उस क्षेत्र से सबसे अधिक कोयले की चोरी हो रही है।

रूकी मालगाड़ी पर चढ़कर युवक व महिलाएं कोयला नीचे फेंकते हैं। तो इसी बीच अगर मालगाड़ी चलने लगे तो लोगों के बीच उतरने के लिए आपाधापी मच जाती है।

कई बार हादसे भी हो चुके हैं। कई बार तो चलती मालगाड़ी से बांस के सहारे कोयला नीचे फेंका जाता है। इसे बीनने के दौरान भी लोग हादसे का शिकार हो जाते हैं।

वहीं रापाखर्रा, मानिकपुर कोल साइडिंग, कुसमुंडा, सहित अन्य क्षेत्रों के आसपास भी डंपिंग क्षेत्र में कोयला लेने के लिए सुबह लोगों की भीड़ रहती है। डंपिंग से ऐसे कोयले को चुनकर साइकिलों में लादकर बस्तियों में बेचा जाता है।

यहां होती है रोजाना चोरी

-संजयनगर रेलवे फाटक

-सर्वमंगलाबस्ती

-कुआंभटठ

-रेलवे स्टेशन पूर्व केबिन

-मानिकपुर डपिंग

-टीपीनगर रेलवे लाइन

-कुसमंडा डपिंग

-बेरियर में खड़ी गाडिय़ा

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