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#मास्टर प्लान को फाइलों में बंद करके किया जा रहा ऊर्जा नगरी का विकास

Updated: IST Master plan being closed In files of energy city
किसी शहर का मास्टर प्लान उसकी वर्तमान स्थित और भविष्य में होने वाली विकास का आइना होता है। प्लान के इर्द गिर्द शहर के विकास का चक्र घूमता है

संदर्भ : राजस्थान उच्च न्यायालय की जोधपुर बैंच ने एक एतिहासिक फैसले में सरकार को मास्टर प्लान के अक्षरश: पालन के निर्देश दिए।

यह फैसला प्रदेश ही नहीं देशभर में आम नागरिकों को खुली-स्वच्छ हवा में पूर्ण नागरिक अधिकारियों के साथ जीने की राह प्रशस्त करेगा।

पत्रिका समूह के प्रधान संपादक गुलाब कोठारी ने तेरह साल पहले 7 अप्रैल, 2004 को 'मेरे जयपुर का ये हाल, क्या हो गया' शीर्षक से लेख के साथ एक पत्र उच्च न्यायालय के माननीय मुख्य न्यायाधीश को लिखा।

उच्च न्यायालय ने पत्र को जनहित याचिका मानते हुए सरकार से जवाब-तलब किया, फिर फैसला सुनाया।

कोरबा. किसी शहर का मास्टर प्लान उसकी वर्तमान स्थित और भविष्य में होने वाली विकास का आइना होता है। प्लान के इर्द गिर्द शहर के विकास का चक्र घूमता है,

लेकिन ऊर्जानगरी का विकास मास्टर प्लान को फाइलों में बंद करके किया जा रहा है। प्लान को मूर्त रूप मिलने से पहले जमीन पर बड़ी बड़ी इमारते और उद्योग स्थापित किए जा रहे हैं। प्रदूषण के खिलाफ आवश्यक कदम उठाने से सरकारी विभाग कदम पीछे खींच रहा है।

पहली बार कोरबा शहर का मास्टर प्लान विशेष क्षेत्र प्राधिकरण (साडा) के कार्यकाल में तैयार किया गया था। चार मार्च, 1992 को सरकार ने नोटिफिकेशन जारी किया था।

उसी दिन से प्लान लागू हुआ था। इसकी अवधि 2001 तक थी। इसबीच शहर की आबादी तेजी बढ़ी। 2011 की गनगणना के अनुसार शहरी क्षेत्र में निवास करने वाले लोगों की आबादी चार लाख के करीब पहुंच गई।

शहर को विकास के लिए पुराने मास्टर प्लान में बदलाव की जरूरत महशुस हुई। सरकार ने आईआईटी खडग़पुर को शहर का मास्टर प्लान बनाने का दायित्व सौंपा।

साल 2012 से नए मास्टर प्लान बनाने की प्रक्रिया चल रही है। अभी तक सरकार से नए मास्टर प्लान को मंजूरी नहीं मिली है। इस बीच शहर का पुराना प्लान ही प्रभावी है। लेकिन हर कदम पर प्लान में किए गए प्रावधान का उल्लंघन किया जा रहा है।

वर्तमान में शहर की आबादी तीन लाख 93 हजार से अधिक है। इसी रफ्तार से आबादी बढ़ती रही तो 2031 तक शहर की आबादी छह लाख 64 हजार से अधिक होने का अनुमान है। जबकि 20 साल बाद भी शहर का क्षेत्रफल उतना ही रहेगा।

उल्लंघन रोकना प्रशासन का दायित्व

शहर का नया मास्टर प्लान तैयार नहीं हुआ है। ऐसी स्थिति में पुराना मास्टर प्लान ही लागू है। मास्टर प्लान का उल्लंघन रोकना प्रशासन का दायित्व है।

इसका उल्लंघ उद्योगपतियों के साथ आम लोगों द्वारा किया जा रहा है। उल्लंघन को रोककर ही मास्टर प्लान के लक्ष्य को हासिल किया जा सकता है।

-अशोक शर्मा, पूर्व निगम आयुक्त, कोरबा

यहां हुआ उल्लंघन

-मनाही के बावजूद बना संयंत्र

पहले मास्टर प्लान में कहा गया है कि शहर के दो किलोमीटर की परिधि में नए उद्योग स्थापित नहीं किए जाए। लेकिन इसका पालन नहीं हुआ। शहर में नए बिजली घर की स्थापना हुई।

-ग्रीन बेल्ट पर कारखाना

मास्टर प्लान में ग्रीन बेल्ट के लिए प्रस्तावित स्थल पर एक निजी कंपनी ने बिजली संयंत्र खड़ा कर दिया। प्रशासनिक अफसरों ने रोकने की हिम्मत नहीं दिखाई। इससे संबंधित एक मामला सुप्रीम कोर्ट में चल रहा है।

-बन गए मकान

मास्टर प्लान का उल्लंघ उद्योगपतियों के अलावा शहर के लोगों ने भी खूब किया। बिना अनुमति शहर में ढेरो कॉलोनियां बस गई। लोग बिल्डिंग बनाते रहे और प्रशासनिक अमला शांत बैठा रहा। मास्टर प्लान से इतर निर्माण होता गया।

-प्रदूषित हो गई हसदेव

संयंत्र से निकलने वाली राख और गंदा पानी से हसदेव नदी को होने वाले नुकसान को बचाने के लिए कहा गया। प्रदूषण को खत्म करने के लिए आवश्यक कदम उठाने पर जोर दिया गया, लेकिन अमल नहीं हुआ। संयंत्रों का गंदा पानी हसदेव को लील रहा है।

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