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किराने की दुकान से शुरू हुआ था सफर अब 104 उपग्रह लॉन्च करने वाली टीम में हैं शामिल

Updated: IST Travel from the grocery store was started in the t
जिले के एक साधारण परिवार से निकलकर इसरों में बतौर साईंटिस्ट इंजीरियर का कार्य करने वाले विकास की कहानी अब प्ररणास्त्रोत बन गई है।

कोरबा. जिले के एक साधारण परिवार से निकलकर इसरों में बतौर साईंटिस्ट इंजीरियर का कार्य करने वाले विकास की कहानी अब प्ररणास्त्रोत बन गई है।

इसरो ने एक साथ 104 सैटेलाई लॉन्च कर ऐसी उपलब्धी हासिल की है जिसने हर भारतीय का सीना गर्व से चौंड़ा कर दिया है।

समूचे विश्व में इसकी चर्चा हो रही है। इस विश्व कीर्तिमान में छोटा सा योगदान विकास का भी है। जो इसरो की उसी टीम के सदस्य हैं। जिसने इस कारनामे को अंजाम दिया है

इंडियन स्पेस रिसर्च ऑर्गनाइजेशन (इसरो) में बलगी के विकास अग्रवाल का चयन मई 2016 में हुआ था। चयन से पहले विकास अपने पिता रातफल अग्रवाल के किराने का दुकान संभालते थे।

कारोबार संभालते हुए विकास ने कामयाबी की ऐसी बड़ी छालांग लगाई, जो दिन रात मेहनत कर महंगे कोचिंग लेने वाले छात्र भी हासिल नहीं कर पाते।

अब वह साइंटिस्ट इंजीनियर बन गए हैं। विकास ने तब दो लाख युवाओं को पछाड़कर ऑल इंडिया लेवल पर टॉप 5 रैंक हासिल किया था।

ऐसा रहा सफर विकास का

विकास के पिता रामाफल अग्रवाल भी नहीं चाहते थे कि तीन बेटियों की शादी करने के बाद घर का इकलौता बेटा दूर जाए यही वजह है कि 10वीं और 12वीं में टॉप करने बाद भी विकास ने कोई प्री इंजीनियरिंग टेस्ट कार एग्जाम नहीं दिया।

विकास ने तब कोरबा के ही केएन कॉलेज से बीएससी मैथ्स में दाखिला लिया। यहां भी दूसरे विद्यार्थियों की तुलना में वह बेहद कॉलेज जाते, इस दौरान पढाई करते हुए भी किराना दुकान ही उनके लिए प्राथमिकता थी। लेकिन जब रिजल्ट आया तब यहां भी वह सब से आगे थे।

बीएससी पूरा करने के बाद वहां के आईटी कॉलेज से मैकेनिकल इंजीनियरिंग में बीई किया है। कोरबा में इंजीनियरिंग की पढ़ाई का विकल्प तब खुला जब 2009 में आईटी कोरबा इंजीनियरिंग कॉलेज की नींव रखी गई।

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यदि कोरबा में इंजीनियरिंग कॉलेज न खुलता तो शायद ही विकास इंजीनियरिंग की पढाई कर पाते। क्योंकि इसके लिए उन्हें घर छोडऩा पड़ता। विकास ने लेटरल एंट्री के तहत उसी साल बीई सेकंड ईयर में वहां एडमिशन ले लिया।

2013 में कोर्स पूरा कर वहीं असिस्टेंट प्रोफेसर हो गए। इस बीच विकास ने केएन कॉलेज में अपनी सीनियर रही दोस्त स्वाति से शादी कर ली और परिणय सूत्र में बंध गए।

2014 में विकास ने इसरो का टेस्ट दिया लेकिन असफल रहे। दूसरी बार 2015 में दोबारा कोशिश की और ऑल इंडिया लेवल पर पांचवा स्थान हासिल किया। अक्टूबर 2015 में रिटन एग्जाम में पास हुए और फरवरी 2016 में इंटरव्यू भी क्लियर कर लिया।

देश भर के दो लाख कैंडिडेट्स में से 300 लोगों को इंटरव्यू के लिए चुना गया था। एक अप्रैल को फाईनल सिलेक्शन का रिजल्ट आ गया। जिसमें विकास का चयन वैज्ञानिक इंजीनियर के तौर पर किया गया।

वर्तमान में विकास की एक बेटी भी है। जो कि 19 नवंबर 2016 को पैदा हुई थी। विकास ने पीछे मुड़कर नहीं देखा इंजीनियर साईंटिस्ट बनने के बाद अब वह उस टीम के सदस्य हैं। जिसने एक साथ 104 सेटैलाईट्य का अंतरिक्ष में सफल प्रक्षेपण कर इतिहास रच दिया है।

कड़ी मेहनत से पाया मुकाम

6वीं कक्षा से किराना दुकान में लोगों को सामान बेचते हुए खाली समय में सेल्फ स्टडी करने वाले विकास अब साइंटिस्ट हैं।

इसका कारण है लगन और लगातार कड़ी मेहनत जिसके दम पर पिछले साल वो सपने को हकीकत में बदलने में कामयाब रहे थे।

इंडियन स्पेस रिसर्च ऑर्गनाइजेशन(इसरो)ने बुधवार को एक साथ 104 उपग्रह लॉन्च कर वल्र्ड रिकॉर्ड बनाया। पीएसएलवी 37 के तहत यह उपग्रह लॉन्च किए गए।

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वकास इन दिनों इसरो के त्रिवेंद्रम सेंटर में हैं। यहां सैटेलाइट को लेकर जाने वाले रॉकेट तैयार किए जाते हैं। इस मिशन में विकास रॉकेट का वो ऊपरी हिस्सा जहां सैटेलाइट कैरी किया जाता है उसे तैयार करने के प्रोजेक्ट में शामिल थे।

मिशन में सभी उपग्रहों को लेकर पीएसएलवी 37 ने श्री हरिकोटा के सतीश धवन स्पेस सेंटर से उड़ान भरी। इसके करीब 17 मिनट बाद रिमोट सेंसिंग कार्टोसेट-2 को कक्षा में स्थापित कर दिया गया।

इसरो ने करीब 28 मिनट के अंदर सभी 104 सैटेलाइट को अपनी-अपनी कक्षा में सफलतापूर्वक स्थापित कर दिया। इसी के साथ वल्र्ड स्पेस साइंस में इसरो ने अपनी धमक और मजबूत कर ली।

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